जर्मनी के लाइपजिग/हाले एयरपोर्ट पर विस्फोटक ड्रोन मिलने से सुरक्षा अलर्ट, कार्गो विमान से टकराई संदिग्ध वस्तु की भी जांच

जर्मनी के एक एयरपोर्ट पर विस्फोटक ले जा रहा ड्रोन मिलने के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस जांच कर रही है, संदिग्ध वस्तु कार्गो विमान से टकराने की घटना हुई

जर्मनी के लाइपजिग/हाले हवाईअड्डे पर विस्फोटक ले जा रहा एक ड्रोन मिलने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। पुलिस ने विस्फोटक को निष्क्रिय कर नियंत्रित विस्फोट किया, जबकि एक अन्य संदिग्ध वस्तु कार्गो विमान से टकराने की भी जांच जारी है।

बर्लिन: जर्मनी के लाइपजिग/हाले एयरपोर्ट पर विस्फोटक उपकरण ले जा रहे एक ड्रोन के मिलने के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। पुलिस के अनुसार एयरपोर्ट के एक कर्मचारी ने रात के समय यूक्रेनी कार्गो विमानों के पास संदिग्ध ड्रोन देखा, जिसके बाद पूरे क्षेत्र को तत्काल घेर लिया गया और बम निरोधक विशेषज्ञों को बुलाया गया।

सैक्सनी पुलिस ने बताया कि ड्रोन में विस्फोटक उपकरण लगा हुआ था। विशेषज्ञों ने पहले उसका डेटोनेटर सुरक्षित तरीके से हटाया और बाद में नियंत्रित विस्फोट (Controlled Explosion) कर पूरे क्षेत्र को सुरक्षित घोषित किया। इस घटना के कारण एयरपोर्ट के एक रनवे का संचालन कुछ समय के लिए रोकना पड़ा, जबकि बाद में उत्तरी रनवे को दोबारा खोल दिया गया। दक्षिणी रनवे पर सुरक्षा जांच पूरी होने तक परिचालन प्रभावित रहा।

दूसरी संदिग्ध वस्तु कार्गो विमान से टकराई

विस्फोटक ड्रोन मिलने की घटना के साथ ही एक दूसरी संदिग्ध वस्तु भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों के अनुसार एक अज्ञात वस्तु उसी एयरपोर्ट के पास एक कार्गो विमान से टकरा गई। विमान बाद में जर्मनी के हनोवर एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा, जहां जांच में विमान को मामूली क्षति होने की पुष्टि हुई। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है या नहीं। फिलहाल तकनीकी विशेषज्ञ और फोरेंसिक टीमें घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।

यूक्रेनी कार्गो विमानों के पास मिला ड्रोन

पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि संदिग्ध ड्रोन एयरपोर्ट पर खड़े एंटोनोव कार्गो विमानों के नजदीक मिला था। लाइपजिग/हाले एयरपोर्ट यूक्रेन की एंटोनोव एयरलाइंस के लिए एक महत्वपूर्ण परिचालन केंद्र माना जाता है। यही एयरलाइन यूक्रेन के अधिकांश हवाई माल परिवहन का संचालन करती है।

यह एयरपोर्ट केवल नागरिक उड्डयन के लिए ही नहीं बल्कि जर्मन सेना और नाटो सहयोगी देशों द्वारा सैन्य सामान के परिवहन के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा यह अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स कंपनी DHL का प्रमुख कार्गो हब भी है।

जर्मनी के गृह मंत्री ने जताई चिंता

जर्मनी के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंट ने इस घटना को देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम सुरक्षा जोखिम के एक नए स्तर की ओर संकेत करता है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जानकारी के आधार पर यह मामला किसी शौकिया व्यक्ति का नहीं लगता। उनके अनुसार जांच से संकेत मिलते हैं कि यह एक पेशेवर और हाइब्रिड खतरे की रणनीति हो सकती है। हालांकि उन्होंने किसी विशेष देश या संगठन का नाम नहीं लिया और कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदार पक्ष के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी।

रूस पर फिर उठे संदेह

घटना के बाद यूक्रेन के जर्मनी स्थित राजदूत ओलेक्सी माकेयेव ने सार्वजनिक रूप से रूस पर संदेह जताया। उनका कहना था कि इस तरह की गतिविधियों के पीछे रूस की भूमिका से इनकार करना कठिन है। हालांकि रूस ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे पहले भी मॉस्को कई बार इस प्रकार के आरोपों को खारिज करता रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि रूस और यूक्रेन के बीच 2022 में शुरू हुए पूर्ण पैमाने के युद्ध के बाद जर्मनी में संवेदनशील प्रतिष्ठानों के आसपास संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। हालांकि वर्तमान मामले में जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

हाल के वर्षों में बढ़ी ड्रोन गतिविधियां

जर्मनी के कई हवाईअड्डों, सैन्य ठिकानों, ऊर्जा टर्मिनलों, समुद्री बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के ऊपर पिछले कुछ महीनों में अनधिकृत ड्रोन उड़ानों की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं।

सुरक्षा एजेंसियों ने इन गतिविधियों को गंभीर सुरक्षा चुनौती माना है। सरकार ने एयरपोर्ट और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की निगरानी के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। इनमें ड्रोन पहचान प्रणाली, निगरानी रडार और विशेष प्रतिक्रिया इकाइयों की तैनाती शामिल है।

2024 की संदिग्ध पार्सल घटना भी चर्चा में

लाइपजिग/हाले एयरपोर्ट पहले भी सुरक्षा संबंधी घटनाओं का केंद्र रह चुका है। जुलाई 2024 में एक पार्सल DHL के कार्गो विमान में लोड होने से पहले ही आग की चपेट में आ गया था। जांच एजेंसियों ने उस मामले में टाइमर आधारित विस्फोटक उपकरण होने की आशंका जताई थी।

अधिकारियों के अनुसार विस्फोटक उपकरण मसाज पिलो के भीतर इलेक्ट्रॉनिक टाइमर के साथ छिपाए गए थे। उस समय भी यूरोप के कई देशों में ऐसी घटनाओं की जांच हुई थी। हालांकि रूस ने उन घटनाओं में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया था।

एयरपोर्ट सुरक्षा और वैश्विक चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक के बढ़ते उपयोग ने दुनिया भर के एयरपोर्ट और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। छोटे आकार के ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ सकते हैं और पारंपरिक निगरानी प्रणालियों से बच निकलना कई बार आसान हो जाता है।

यही कारण है कि यूरोप सहित कई देशों में एयरपोर्ट सुरक्षा के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक, रेडियो फ्रीक्वेंसी जैमर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और रडार नेटवर्क को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

जांच जारी, आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार

फिलहाल जर्मन पुलिस, बम निरोधक विशेषज्ञ और सुरक्षा एजेंसियां दोनों घटनाओं की विस्तृत जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विस्फोटक ड्रोन और कार्गो विमान से टकराई संदिग्ध वस्तु के पीछे किसका हाथ था।

जर्मनी की सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा। फिलहाल जांच पूरी होने तक किसी देश, संगठन या समूह की जिम्मेदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

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