गोरखपुर में 5 घंटे बाद चली सिटी बस: RM के आश्वासन पर माने कंडक्टर, 24 घंटे का अल्टीमेटम; 27 बसें रहीं ठप

गोरखपुर में कम वेतन समेत मांगों को लेकर सिटी बस कंडक्टरों ने 5 घंटे हड़ताल की। RM के आश्वासन पर धरना खत्म हुआ, 24 घंटे में समाधान का अल्टीमेटम दिया।
गोरखपुर में 5 घंटे बाद चली सिटी बस: RM के आश्वासन पर माने कंडक्टर, 24 घंटे का अल्टीमेटम; 27 बसें रहीं ठप
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गोरखपुर में मानक से कम वेतन भुगतान समेत कई मांगों को लेकर सोमवार सुबह ठप हुई सिटी बस सेवा करीब 5 घंटे बाद दोबारा शुरू हो सकी। सिटी बस के कंडक्टरों ने महेसरा स्थित चार्जिंग प्वाइंट स्टेशन पर बसें खड़ी कर हड़ताल शुरू कर दी थी और वहीं धरने पर बैठ गए थे। इससे शहर के हजारों यात्रियों को सुबह के समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

कंडक्टरों का कहना था कि नई कंपनी की ओर से उन्हें तय मानक से कम भुगतान किया जा रहा है। लंबे समय से शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर सभी कंडक्टर सोमवार सुबह महेसरा चार्जिंग प्वाइंट पहुंचे और बसों का संचालन रोक दिया। इसके बाद करीब 5 घंटे तक बस सेवा प्रभावित रही।

मामले की जानकारी मिलने के बाद RM लव कुमार ने कंडक्टरों से बातचीत की। समझाने-बुझाने और समस्याओं के समाधान का आश्वासन मिलने के बाद कंडक्टरों ने धरना समाप्त करने पर सहमति जताई। कंडक्टरों ने अपनी ओर से तीन प्रतिनिधियों का चयन किया है। इन प्रतिनिधियों के माध्यम से समस्याओं को अधिकारियों और कंपनी के सामने रखा जाएगा।

RM की ओर से आश्वासन दिया गया कि एसएस ट्रेडिंग कंपनी को बुलाकर कंडक्टरों की समस्याओं पर बातचीत की जाएगी और सभी मुद्दों का समाधान कराने का प्रयास होगा। इसी आश्वासन के बाद हड़ताल समाप्त हुई। इसके बाद करीब 11 बजे पहली सिटी बस सड़क पर निकली और धीरे-धीरे बस सेवा बहाल होने लगी।

हालांकि कंडक्टरों ने साफ कर दिया है कि उन्हें तत्काल समाधान चाहिए। उन्होंने प्रबंधन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि अगर तय समय में उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

हड़ताल के कारण सुबह से ही यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। गोरखपुर में सिटी बसें सुबह करीब 5 बजे से ही सड़कों पर चलने लगती हैं। शहर के कई हिस्सों को जोड़ने के लिए बड़ी संख्या में लोग इन बसों पर निर्भर हैं। स्कूल जाने वाले छात्र, नौकरीपेशा लोग, कॉलेज के विद्यार्थी और अस्पताल जाने वाले मरीजों के परिजन रोजाना सिटी बसों का इस्तेमाल करते हैं।

सोमवार सुबह अचानक बस सेवा बंद होने से लोगों को काफी देर तक बसों का इंतजार करना पड़ा। महेसरा, मोहद्दीपुर, रेलवे स्टेशन, कचहरी और अन्य प्रमुख रूटों पर यात्रियों की परेशानी बढ़ गई। कई लोगों को मजबूरी में ऑटो और ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ा। यात्रियों का कहना था कि बस नहीं मिलने के कारण उन्हें अतिरिक्त किराया देना पड़ा और कई लोग अपने स्कूल, कॉलेज या कार्यालय पहुंचने में देर से पहुंचे।

शहर में कुल 27 सिटी बसें चलती हैं और इनमें करीब 80 कंडक्टर तैनात हैं। सभी कंडक्टरों के महेसरा चार्जिंग प्वाइंट पर पहुंचकर धरने पर बैठने के कारण बसों का संचालन पूरी तरह प्रभावित हो गया था। बसें चार्जिंग स्टेशन पर खड़ी रहीं और यात्रियों को सुबह के समय सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं मिल सकी।

कंडक्टरों का आरोप है कि पिछली कंपनी का टेंडर समाप्त होने के बाद सिटी बस संचालन की जिम्मेदारी नई कंपनी को दी गई। इसके साथ ही वेतन भुगतान की जिम्मेदारी भी नई कंपनी के पास चली गई। कंडक्टरों के मुताबिक, नई कंपनी उन्हें पहले से तय मानक से कम वेतन दे रही है। उनका कहना है कि भुगतान से जुड़ी शर्तें पहले से तय थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पूरा भुगतान नहीं मिल रहा।

कंडक्टरों ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्याओं को अधिकारियों के सामने कई बार रखा, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। लगातार शिकायतों के बावजूद स्थिति में बदलाव नहीं आने से नाराज होकर उन्होंने सोमवार सुबह सामूहिक रूप से काम बंद करने का फैसला लिया।

धरने पर बैठे कंडक्टरों का कहना था कि महंगाई के मौजूदा दौर में कम वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। घर का खर्च, बच्चों की फीस और अन्य जरूरी जरूरतें पूरी करने के लिए नियमित और निर्धारित वेतन जरूरी है। उनका कहना था कि सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि तय मानक के अनुसार भुगतान और समय पर वेतन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

कंडक्टरों ने अपनी कई मांगें प्रबंधन के सामने रखी हैं। उनकी प्रमुख मांगों में 6 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से वेतन शामिल है। उनका कहना है कि बस जितने किलोमीटर चले, उसके आधार पर निर्धारित दर से भुगतान किया जाना चाहिए।

कंडक्टरों की दूसरी मांग है कि बस की वास्तविक चली हुई किलोमीटर के हिसाब से वेतन का भुगतान किया जाए। इसके अलावा उन्होंने DD यानी डिमांड ड्राफ्ट या जमानत के रूप में जमा रकम वापस करने की मांग भी रखी है।

कंडक्टर चाहते हैं कि वेतन भुगतान की तारीख भी निर्धारित की जाए। उनका कहना है कि हर महीने एक निश्चित तारीख पर वेतन मिलना चाहिए, ताकि कर्मचारी अपने परिवार के खर्च और अन्य आर्थिक जिम्मेदारियों की योजना बना सकें।

इसके साथ ही कंडक्टरों ने सैलरी स्लिप, EPF, ड्रेस और ज्वाइनिंग लेटर समय पर उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि अभी उन्हें EPF और वेतन की स्लिप जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

कंडक्टरों की एक प्रमुख मांग बस खराब होने की स्थिति में भुगतान से जुड़ी है। उनका कहना है कि अगर यात्रा के दौरान बस खराब हो जाती है तो परिचालक को 180 किलोमीटर का भुगतान किया जाना चाहिए। इसके अलावा स्टाफ की कमी या किसी कर्मचारी के साथ समस्या होने पर कंपनी या सिटी ट्रांसपोर्ट स्टेशन की ओर से तत्काल सहयोग की व्यवस्था होनी चाहिए।

कंडक्टरों ने नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी अपनी मांग रखी है। उनका कहना है कि अपनी जायज मांग रखने के कारण किसी परिचालक को ड्यूटी से नहीं हटाया जाना चाहिए। छुट्टी लेने के बाद कर्मचारी को वापस ड्यूटी पर लेने की गारंटी भी दी जानी चाहिए।

इन मांगों को लेकर सोमवार सुबह महेसरा चार्जिंग प्वाइंट पर कंडक्टरों ने बसें खड़ी कर दी थीं। धरने के दौरान उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे ड्यूटी पर लौटने के लिए तैयार नहीं थे।

बाद में RM लव कुमार के साथ हुई बातचीत के बाद स्थिति बदली। अधिकारियों ने कंडक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर कंपनी को बुलाने और समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद कंडक्टरों ने धरना समाप्त कर दिया और बसों का संचालन दोबारा शुरू हुआ।

करीब 11 बजे पहली बस के सड़क पर निकलने के बाद यात्रियों को राहत मिलनी शुरू हुई। हालांकि सुबह के समय सेवा बंद रहने के कारण कई रूटों पर यात्रियों की भीड़ और परेशानी बनी रही।

कंडक्टरों की ओर से चुने गए तीन प्रतिनिधि अब उनकी समस्याओं को आगे अधिकारियों और कंपनी के सामने रखेंगे। एसएस ट्रेडिंग कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वेतन और दूसरी मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।

फिलहाल कंडक्टरों ने 24 घंटे का समय दिया है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि कंपनी और सिटी ट्रांसपोर्ट प्रबंधन उनकी मांगों को लेकर क्या कदम उठाता है। अगर तय समय में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो सिटी बस सेवा एक बार फिर प्रभावित हो सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर शहर के आम यात्रियों पर पड़ा है। गोरखपुर में सिटी बसें कई महत्वपूर्ण इलाकों को जोड़ती हैं और रोजाना बड़ी संख्या में लोग इनका इस्तेमाल करते हैं। अचानक सेवा बंद होने पर यात्रियों के पास सीमित विकल्प रह जाते हैं और उन्हें ऑटो या ई-रिक्शा जैसे साधनों पर निर्भर होना पड़ता है।

यात्रियों का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान जल्द होना चाहिए, ताकि भविष्य में अचानक बस सेवा बंद न हो। वहीं कंडक्टरों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और वे सिर्फ अपना तय भुगतान और जरूरी कर्मचारी सुविधाएं चाहते हैं।

फिलहाल RM के आश्वासन के बाद 5 घंटे से चली आ रही हड़ताल खत्म हो गई है और सिटी बस सेवा दोबारा शुरू हो चुकी है। पहली बस करीब 11 बजे चली। लेकिन कंडक्टरों ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देकर साफ कर दिया है कि अगर एसएस ट्रेडिंग कंपनी के साथ बातचीत में उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो वे फिर से हड़ताल कर सकते हैं। इससे गोरखपुर के हजारों दैनिक यात्रियों की परेशानी दोबारा बढ़ सकती है।

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