गोरखपुर में 1.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले से परेशान एक पशु चिकित्सक ने गुरुवार सुबह अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। घटना गोरखनाथ थाना क्षेत्र के राजेंद्र नगर स्थित बसंत इंक्लेव की है। मृतक की पहचान डॉ. परमात्मा सिंह के रूप में हुई है। वह महराजगंज जिले में पशु चिकित्सक के पद पर तैनात थे और परिवार के साथ गोरखपुर में रहते थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुलिस के अनुसार, डॉ. परमात्मा सिंह ने 5 अगस्त को एम्स थाने में 1.40 करोड़ रुपये की ठगी को लेकर FIR दर्ज कराई थी। शिकायत में एक पीएचडी महिला, उसके अधिकारी पिता, शिक्षक पति और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने इस मामले में महिला और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब डॉक्टर की आत्महत्या के बाद पुलिस ठगी के मुकदमे से जुड़े घटनाक्रम को भी जांच का हिस्सा बना रही है।
बताया जा रहा है कि गुरुवार सुबह करीब 9:40 बजे पुलिस को PRV-112 के जरिए बसंत इंक्लेव और भगवती चौराहा के पास एक व्यक्ति के अपार्टमेंट से गिरने की सूचना मिली। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो डॉ. परमात्मा सिंह गंभीर रूप से घायल हालत में मिले। परिजन उन्हें तत्काल नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के सदस्य मऊ से गोरखपुर पहुंचे। डॉक्टर की पत्नी भी पशु चिकित्सक हैं। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। डॉ. परमात्मा सिंह की मौत से पूरा परिवार सदमे में है।
परमात्मा सिंह मूल रूप से मऊ जिले के रहने वाले थे। वर्तमान में उनकी तैनाती महराजगंज जिले के नौतनवा क्षेत्र में बताई गई है। गोरखपुर में वह राजेंद्र नगर कॉलोनी स्थित बसंत इंक्लेव के ब्लॉक बी में परिवार के साथ रहते थे। घटना इसी अपार्टमेंट से हुई।
ठगी के मामले में डॉक्टर ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने उनके साथ बड़ी रकम की धोखाधड़ी की। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महिला आरोपी और उसके पिता को गिरफ्तार किया था। इसी मामले के कुछ ही दिन बाद डॉक्टर की मौत होने से पुलिस अब दोनों घटनाओं के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, डॉक्टर की जेब से एक पन्ने का सुसाइड नोट भी मिलने की बात सामने आई है। हालांकि इस नोट में क्या लिखा है और उसमें किन लोगों का नाम है, इसकी पूरी जानकारी पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस ने अभी घटना के हर पहलू की जांच करने की बात कही है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि डॉक्टर पिछले कुछ दिनों से किन परिस्थितियों से गुजर रहे थे। ठगी की शिकायत दर्ज कराने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी, मुकदमे से जुड़े घटनाक्रम और डॉक्टर की मानसिक स्थिति के बीच क्या संबंध था, इसकी जांच की जा रही है।
पुलिस के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आत्महत्या से पहले डॉक्टर की किन लोगों से बातचीत हुई थी। उनके मोबाइल फोन और अन्य जरूरी साक्ष्यों की जांच से घटना से पहले की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है। परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने अपार्टमेंट और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया। यह भी देखा जा रहा है कि डॉक्टर आठवीं मंजिल तक किस तरह पहुंचे और वहां से गिरने की परिस्थितियां क्या थीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के संबंध में चिकित्सकीय जानकारी मिलने की उम्मीद है।
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि एक ओर डॉक्टर ने कथित 1.40 करोड़ रुपये की ठगी के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की थी और दूसरी ओर कुछ ही दिनों बाद उनकी मौत हो गई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी से जुड़ा तनाव उनकी मौत की परिस्थितियों में किस हद तक प्रभावी था। फिलहाल पुलिस ने इसे जांच का विषय बताया है।
डॉक्टर की शिकायत में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया था, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है। महिला और उसके पिता की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी। अब डॉक्टर की मौत के बाद जांच एजेंसियां ठगी के पूरे नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और शिकायत से जुड़े घटनाक्रम की दोबारा समीक्षा कर सकती हैं।
परिवार के लिए यह घटना बेहद दर्दनाक है। एक तरफ उन्होंने अपने करीबी को खो दिया और दूसरी तरफ करोड़ों रुपये की कथित ठगी का मामला भी उनके सामने है। परिजनों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि ठगी के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल घटना की जांच की जा रही है। आत्महत्या के पीछे के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की जांच जरूरी है। ठगी के मुकदमे से जुड़े घटनाक्रम को भी जांच में शामिल किया जा रहा है।
यह घटना आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को भी सामने लाती है। बड़ी रकम गंवाने के बाद व्यक्ति और परिवार पर आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक दबाव बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में कानूनी मदद लेने के साथ परिवार और करीबी लोगों का भावनात्मक सहयोग भी महत्वपूर्ण होता है।
फिलहाल गोरखपुर पुलिस के सामने दो अहम पहलू हैं—पहला, डॉ. परमात्मा सिंह की मौत की परिस्थितियों का पता लगाना और दूसरा, 1.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले की जांच को आगे बढ़ाना। दोनों मामलों से जुड़े तथ्यों को जोड़कर ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी।
कुल मिलाकर, गोरखपुर में 1.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में FIR दर्ज कराने के कुछ ही दिनों बाद पशु चिकित्सक डॉ. परमात्मा सिंह ने अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और ठगी के मुकदमे से जुड़े घटनाक्रम को भी जांच में शामिल किया है। महिला आरोपी और उसके पिता पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। अब डॉक्टर की मौत के पीछे की परिस्थितियों और ठगी के मामले के बीच संबंध की जांच की जा रही है।











