गोरखपुर में AI से होगा मधुमेह का इलाज, डॉक्टर रखेंगे निगरानी

गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज में मधुमेह मरीजों के लिए AI आधारित ओपीडी शुरू होगी। AI शुरुआती जांच करेगा, अंतिम निर्णय डॉक्टर लेंगे।

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मधुमेह रोगियों के इलाज के लिए एआई आधारित ओपीडी शुरू की जाएगी। डॉक्टर एआई की डायग्नोसिस की निगरानी करेंगे, जिससे इलाज की प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक बनने की उम्मीद है।

Gorakhpur: Artificial Intelligence आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए BRD Medical College में मधुमेह रोगियों के उपचार के लिए एआई ओपीडी शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस पहल के तहत सॉफ्टवेयर Dr. APJ Abdul Kalam Technical University से लिया जाएगा, जहां एआई मरीजों की प्राथमिक जांच और दवा सुझाव देगा, जबकि अंतिम निर्णय डॉक्टर अपने अनुभव के आधार पर करेंगे।

गोरखपुर में AI से होगा मधुमेह का इलाज, डॉक्टर करेंगे अंतिम निर्णय

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यहां नेहरू अस्पताल में मधुमेह रोगियों के इलाज के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ओपीडी शुरू करने की तैयारी है, जहां मरीजों की शुरुआती जांच और उपचार सुझाव AI करेगा, जबकि अंतिम निर्णय डॉक्टरों के हाथ में रहेगा।

कॉलेज प्रशासन ने इस योजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रमुख सचिव के निर्देश पर AI ओपीडी के लिए खर्च का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसकी जिम्मेदारी मेडिसिन विभाग को सौंपी गई है।

AKTU के सॉफ्टवेयर से चलेगी AI ओपीडी

इस नई व्यवस्था के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी से सॉफ्टवेयर लिया जा रहा है। प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल के अनुसार, विश्वविद्यालय के साथ करार हो चुका है और जल्द ही इसे लागू किया जाएगा।

शुरुआत मधुमेह ओपीडी से होगी, लेकिन योजना है कि आगे चलकर अन्य विभागों की ओपीडी को भी AI आधारित किया जाए। इसके लिए अस्पताल में अलग काउंटर और ओपीडी कक्ष तैयार किया जाएगा।

ऐसे काम करेगी AI आधारित प्रणाली

AI काउंटर पर मरीज की पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी, जिसमें नाम, उम्र, पता, लक्षण, पारिवारिक बीमारी का इतिहास और जांच रिपोर्ट शामिल होंगी। यह डाटा सिस्टम में फीड होते ही AI मरीज की स्थिति का विश्लेषण कर डायग्नोसिस और दवा की सिफारिश तैयार करेगा।

इसके बाद यह रिपोर्ट ऑनलाइन ओपीडी में डॉक्टर के पास भेजी जाएगी। मरीज को एक कोड नंबर दिया जाएगा, जिसके जरिए वह डॉक्टर से परामर्श ले सकेगा।

डॉक्टर की निगरानी में होगा इलाज

हालांकि AI शुरुआती उपचार योजना तैयार करेगा, लेकिन अंतिम निर्णय डॉक्टर ही लेंगे। डॉक्टर अपने अनुभव के आधार पर AI द्वारा दी गई रिपोर्ट की समीक्षा करेंगे और जरूरत पड़ने पर उसमें बदलाव करेंगे।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस पहल से मरीजों को तेज और सटीक इलाज मिल सकेगा, साथ ही डॉक्टरों पर बढ़ते दबाव को भी कम किया जा सकेगा। भविष्य में इस तकनीक के विस्तार से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में और सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

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