अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में प्रस्तावित ग्रेट निकोबार विकास परियोजना को लेकर भारत में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi ने इस परियोजना पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे “विकास के नाम पर विनाश” करार दिया है।
नई दिल्ली: राहुल गांधी ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में प्रस्तावित ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस परियोजना को देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के लिए “सबसे बड़े घोटालों और अपराधों में से एक” बताया। हाल ही में राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार द्वीप के कैंपबेल बे क्षेत्र का दौरा भी किया, जहां उन्होंने जंगलों और स्थानीय समुदायों की स्थिति का जायजा लिया।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के प्राचीन और समृद्ध जंगल कई पीढ़ियों में बने हैं, लेकिन अब विकास परियोजना के नाम पर इनके नुकसान की आशंका जताई जा रही है। उनके मुताबिक, इस तरह के फैसलों में पर्यावरण और स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
ग्रेट निकोबार दौरे के बाद राहुल गांधी का बयान
Rahul Gandhi ने हाल ही में ग्रेट निकोबार द्वीप के कैंपबेल बे क्षेत्र का दौरा किया, जहां उन्होंने स्थानीय पर्यावरण और आदिवासी समुदायों की स्थिति का निरीक्षण किया। दौरे के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित परियोजना के तहत लगभग 160 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले घने जंगलों को काटा जाएगा, जिससे पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ये जंगल सदियों में विकसित हुए हैं और इन्हें हटाने का फैसला प्राकृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति होगा।
Rahul Gandhi ने आरोप लगाया कि यह परियोजना स्थानीय आदिवासी समुदायों और निकोबारी जनजातियों के अधिकारों को नजरअंदाज करती है। उन्होंने दावा किया कि विकास के नाम पर वहां के लोगों की जमीन, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान पर खतरा मंडरा रहा है। उनके अनुसार, यह केवल एक विकास परियोजना नहीं बल्कि “आदिवासी विरासत पर सबसे बड़ा हमला” है।
स्थानीय समुदायों से मुलाकात

अपने दौरे के दौरान Rahul Gandhi ने कई आदिवासी नेताओं और स्थानीय निवासियों से मुलाकात की। स्थानीय लोगों ने उनसे शिकायत की कि परियोजना को लेकर उनकी चिंताओं को पर्याप्त रूप से नहीं सुना जा रहा है और उन्हें विस्थापन तथा पर्यावरणीय बदलावों का डर है। राहुल गांधी ने कहा कि लोगों की आवाज को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना बेहद जरूरी है।
दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि लगभग 81,000 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना देश के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।सरकारी योजना के अनुसार, इस परियोजना में एक बड़ा ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, पावर प्लांट और एक आधुनिक शहरी ढांचा विकसित किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि इससे समुद्री व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, लॉजिस्टिक्स मजबूत होगा और भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा भी बेहतर होगी।
आर्थिक और रणनीतिक महत्व
सरकार के अनुसार, ग्रेट निकोबार द्वीप की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करती है। यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के करीब स्थित है, जिससे भारत को वैश्विक व्यापार और सुरक्षा नेटवर्क में अधिक मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, यह क्षेत्र पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।
ग्रेट निकोबार परियोजना ने एक बार फिर भारत में “विकास बनाम पर्यावरण” की बहस को तेज कर दिया है। एक ओर पर्यावरण विशेषज्ञ और विपक्षी नेता इसे पारिस्थितिक नुकसान और जनजातीय अधिकारों के लिए खतरा बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार इसे दीर्घकालिक आर्थिक विकास और रणनीतिक मजबूती के लिए जरूरी मान रही है।










