रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने अमेरिकी श्रम विभाग से PERM प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने की मांग की है। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था का कुछ कंपनियां दुरुपयोग कर रही हैं, जिससे अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी श्रमिकों को प्राथमिकता मिल रही है।
H-1B Visa: अमेरिका में विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड की राह पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। अब PERM प्रक्रिया में संभावित बदलाव की मांग ने भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने अमेरिकी श्रम विभाग से PERM यानी Program Electronic Review Management सिस्टम के नियमों को आधुनिक बनाने और भर्ती प्रक्रिया में ज्यादा सख्ती लाने की मांग की है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल ये बदलाव केवल एक प्रस्ताव और मांग के स्तर पर हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि H-1B या ग्रीन कार्ड के मौजूदा नियम तुरंत बदल गए हैं। वास्तविक असर अमेरिकी श्रम विभाग के भविष्य के फैसले और किसी भी अंतिम नियम पर निर्भर करेगा।
PERM प्रक्रिया में बदलाव की मांग क्यों?
PERM प्रक्रिया अमेरिका में रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी Green Card के लिए इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। आमतौर पर किसी नियोक्ता को विदेशी कर्मचारी के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है या विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी श्रमिकों के रोजगार और वेतन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सीनेटर एरिक श्मिट ने अमेरिकी श्रम विभाग के कार्यवाहक सचिव कीथ सॉन्डरलिंग को पत्र लिखकर मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। उनका तर्क है कि वर्तमान नियमों में ऐसे बदलाव की जरूरत है, जिससे अमेरिकी नागरिकों और स्थायी निवासियों को नौकरियों के लिए वास्तविक अवसर मिल सके।
कंपनियों पर लगाया विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने का आरोप
श्मिट का आरोप है कि कुछ कंपनियां मौजूदा PERM और H-1B व्यवस्था का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने के लिए कर सकती हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि अमेरिकी उम्मीदवारों को वास्तविक अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने श्रम विभाग से भर्ती प्रक्रिया की निगरानी और दस्तावेजीकरण को मजबूत करने की मांग की है। हालांकि, उनके इन आरोपों का अर्थ यह नहीं है कि सभी कंपनियां या H-1B कर्मचारी नियमों का दुरुपयोग करते हैं।
हर अमेरिकी आवेदक का रिकॉर्ड रखने का प्रस्ताव
प्रस्तावित बदलावों में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। इसके तहत नियोक्ताओं को नौकरी के लिए आवेदन करने वाले अमेरिकी उम्मीदवारों का विस्तृत रिकॉर्ड रखने की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा किसी उम्मीदवार को नौकरी के लिए क्यों नहीं चुना गया, इसका कारण भी दर्ज करने की व्यवस्था का सुझाव दिया गया है।
नियोक्ता को यह प्रमाणित करने की आवश्यकता हो सकती है कि नौकरी का पद पहले से किसी विदेशी कर्मचारी के लिए तय नहीं था। ऐसे प्रावधान लागू होने पर कंपनियों के लिए भर्ती और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक विस्तृत हो सकती है।

बेरोजगार अमेरिकी उम्मीदवारों को भी सूचना देने की मांग
एरिक श्मिट ने यह भी सुझाव दिया है कि हाल में नौकरी गंवा चुके और संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी उम्मीदवारों को रोजगार के अवसर की जानकारी दी जानी चाहिए। यदि कोई अमेरिकी उम्मीदवार आवश्यक योग्यता रखता है, तो नियोक्ता को उसका इंटरव्यू लेने की जरूरत हो सकती है। यदि उसे नौकरी नहीं दी जाती है तो उसके चयन नहीं होने का कारण भी दर्ज करने का प्रस्ताव है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी श्रमिकों को केवल कागजी प्रक्रिया के लिए शामिल न किया जाए, बल्कि उन्हें वास्तविक प्रतिस्पर्धा का अवसर मिले।
भारतीय H-1B प्रोफेशनल्स पर असर क्यों पड़ सकता है?
इस प्रस्ताव की चर्चा भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका के H-1B कार्यक्रम में भारतीय नागरिकों की बड़ी हिस्सेदारी है।अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में स्वीकृत H-1B याचिकाओं में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत बताई गई है।
कई भारतीय छात्र अमेरिका में उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद Optional Practical Training (OPT) के माध्यम से काम का अनुभव हासिल करते हैं। इसके बाद कुछ प्रोफेशनल्स H-1B वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियों में काम जारी रखते हैं। लंबे समय में नियोक्ता के माध्यम से रोजगार आधारित Green Card की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।
यही वजह है कि PERM भर्ती प्रक्रिया में अतिरिक्त जांच या दस्तावेजी आवश्यकताओं का असर भारतीय टेक और अन्य कुशल विदेशी कर्मचारियों पर अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है।
Green Card की प्रक्रिया हो सकती है लंबी
यदि श्रम विभाग भर्ती से जुड़े रिकॉर्ड, विज्ञापन, इंटरव्यू और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को ज्यादा सख्त करता है, तो नियोक्ताओं पर अनुपालन का बोझ बढ़ सकता है। इसका संभावित असर रोजगार आधारित Green Card की प्रक्रिया के समय और जटिलता पर पड़ सकता है। कंपनियों को अधिक दस्तावेज तैयार करने और यह साबित करने में अतिरिक्त समय लग सकता है कि उन्होंने अमेरिकी कर्मचारियों को उचित अवसर दिया था। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रस्ताव लागू होने के बाद Green Card प्रक्रिया कितने समय तक लंबी होगी।
20 साल पुराने PERM नियम भी निशाने पर
एरिक श्मिट ने मौजूदा PERM भर्ती व्यवस्था की उम्र पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के कई नियम दो दशक से ज्यादा पुराने हैं और रोजगार बाजार में आए बदलावों के अनुरूप उन्हें अपडेट करने की जरूरत है। परंपरागत रूप से कुछ पदों के लिए अखबारों में विज्ञापन और राज्य की रोजगार एजेंसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण रही हैं।
वहीं, आधुनिक रोजगार बाजार में ऑनलाइन जॉब पोर्टल और डिजिटल भर्ती प्लेटफॉर्म बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं। श्मिट का तर्क है कि पुराने नियम आज के डिजिटल रोजगार बाजार में पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं।










