हरिद्वार की हरकी पैड़ी से महिला के गंगा स्नान के वीडियो के साथ AI के जरिए छेड़छाड़ कर उसे आपत्तिजनक रूप में सोशल मीडिया पर प्रसारित करने का मामला सामने आया है। वायरल वीडियो को लेकर पहले सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे, लेकिन फैक्ट-चेक में सामने आया कि वीडियो के मूल फुटेज में महिला सामान्य कपड़ों में गंगा स्नान करती दिखाई दे रही थी। बाद में इसी मूल वीडियो में डिजिटल तकनीक और AI की मदद से बदलाव कर महिला के कपड़ों को आपत्तिजनक तरीके से बदला गया और फिर उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। मामले की जानकारी सामने आने के बाद महिला ने पुलिस से शिकायत की है और हरिद्वार पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार महिला राजस्थान से हरिद्वार गंगा स्नान और धार्मिक यात्रा के लिए आई थी। यात्रा के दौरान उसने हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान करते हुए अपना वीडियो बनाया था और बाद में उसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया था। यही वास्तविक वीडियो बाद में कुछ लोगों के हाथ लगा। आरोप है कि मूल वीडियो को डाउनलोड करने के बाद उसके साथ डिजिटल छेड़छाड़ की गई और AI तकनीक का इस्तेमाल करते हुए महिला के कपड़ों को बदलकर उसे आपत्तिजनक रूप में दिखाया गया। इसके बाद एडिट किया हुआ वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने लगा।
मामला तब गंभीर हो गया जब महिला को अपने ही वीडियो के बदले हुए रूप के सोशल मीडिया पर वायरल होने की जानकारी मिली। इसके बाद उसने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार महिला ने हरिद्वार नगर कोतवाली में शिकायत दी, जिसके आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम अब वीडियो को वायरल करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ आपत्तिजनक वीडियो महिला का वास्तविक वीडियो नहीं है। कई स्वतंत्र फैक्ट-चेक रिपोर्टों में मूल वीडियो खोजा गया। BOOM की पड़ताल में महिला के सोशल मीडिया अकाउंट पर जून 2026 में साझा किया गया मूल वीडियो मिला, जिसमें महिला सलवार-कमीज पहने हुए गंगा में स्नान करती नजर आती है। वायरल किए गए वीडियो में उसी दृश्य और पृष्ठभूमि को रखते हुए महिला के कपड़ों में बदलाव दिखाई देता है।
Alt News की जांच में भी वायरल वीडियो और मूल वीडियो के बीच समानताएं सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक मूल फुटेज में वही स्थान, पृष्ठभूमि और आसपास दिखाई देने वाले लोग मौजूद थे, जबकि वायरल संस्करण में महिला के कपड़ों में बदलाव कर दिया गया था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि वायरल क्लिप को वास्तविक घटना के रूप में पेश करना भ्रामक है।
फैक्ट-चेक में यह भी सामने आया कि महिला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए लोगों को इस मामले की जानकारी दी थी। उसने बताया कि उसके मूल गंगा स्नान वाले वीडियो के साथ छेड़छाड़ करके उसे वायरल किया गया है और उसने इस संबंध में कानूनी शिकायत की है। उसने लोगों से ऐसे एडिट किए गए वीडियो को आगे साझा नहीं करने की अपील भी की।
हरिद्वार के हरकी पैड़ी क्षेत्र से जुड़े इस मामले ने AI तकनीक के गलत इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। किसी व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर स्वयं साझा किए गए सामान्य वीडियो को डाउनलोड करके उसके चेहरे, कपड़ों या दृश्य में बदलाव करना और फिर उसे वास्तविक बताकर प्रसारित करना पीड़ित व्यक्ति के लिए गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है। खासतौर पर महिलाओं से जुड़े ऐसे फर्जी और आपत्तिजनक वीडियो तेजी से वायरल होने पर उनकी सामाजिक छवि और निजी जीवन पर असर पड़ सकता है।
इस मामले में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने उसे बिना सत्यापन के वास्तविक मान लिया। कुछ पोस्ट में महिला के कपड़ों और गंगा स्नान को लेकर टिप्पणियां की गईं, जबकि बाद की जांच में पता चला कि वायरल फुटेज मूल वीडियो से अलग था। BOOM और Alt News दोनों की पड़ताल में मूल वीडियो और बदले हुए वीडियो के बीच अंतर सामने आया।
AI तकनीक की मदद से किसी वास्तविक व्यक्ति के वीडियो में इस तरह बदलाव करना अब साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। तस्वीर या वीडियो में किसी व्यक्ति के चेहरे, कपड़ों या गतिविधियों को बदलकर ऐसा दृश्य बनाया जा सकता है जो वास्तव में हुआ ही नहीं। इसके बाद यदि उस सामग्री को बिना संदर्भ के सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया जाए तो देखने वाले लोगों के लिए वास्तविक और फर्जी सामग्री के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।
हरिद्वार के इस मामले में भी मूल वीडियो और वायरल वीडियो के बीच अंतर सामने आने के बाद तस्वीर बदल गई। शुरुआत में सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, लेकिन फैक्ट-चेक में पता चला कि महिला ने वास्तविक वीडियो में आपत्तिजनक कपड़े नहीं पहने थे। मूल वीडियो में वह सलवार-कमीज में गंगा स्नान करती नजर आ रही थी।
पुलिस के सामने अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है, जिन्होंने कथित तौर पर मूल वीडियो को डाउनलोड किया, उसमें बदलाव किया और फिर उसे प्रसारित किया। साइबर सेल सोशल मीडिया पोस्ट, अकाउंट, डिजिटल फुटप्रिंट और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर जांच कर सकती है। पुलिस ने मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, इसलिए फिलहाल किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में नामित करना उचित नहीं होगा।
मामले को लेकर हरकी पैड़ी से जुड़े लोगों की ओर से भी कार्रवाई की मांग सामने आई है। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार श्री गंगा सभा ने इस तरह के AI-एडिटेड वीडियो के प्रसार पर नाराजगी जताई और पुलिस से कार्रवाई की मांग की। धार्मिक स्थल से जुड़े वास्तविक वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे आपत्तिजनक रूप में पेश किए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता व्यक्त की गई है।
यह घटना सोशल मीडिया यूजर्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण सबक सामने रखती है कि किसी वायरल वीडियो को देखकर तुरंत निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। खासकर तब जब वीडियो किसी व्यक्ति की निजी या संवेदनशील स्थिति से जुड़ा हो। इस तरह की सामग्री को आगे शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूरी है। फर्जी या छेड़छाड़ किए गए वीडियो को शेयर करने से वह और तेजी से फैल सकता है और पीड़ित व्यक्ति को अतिरिक्त नुकसान पहुंच सकता है।
इस मामले में फैक्ट-चेक संस्थानों ने मूल वीडियो तक पहुंचकर दोनों वीडियो की तुलना की। मूल वीडियो में महिला के कपड़े और वायरल वीडियो में दिखाई गई स्थिति के बीच स्पष्ट अंतर पाया गया। यही वजह है कि वायरल वीडियो को महिला के वास्तविक गंगा स्नान का वीडियो बताना गलत है।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। शिकायत के आधार पर साइबर टीम डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वीडियो को किसने एडिट किया तथा इसे सोशल मीडिया पर किस-किस अकाउंट से प्रसारित किया गया। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपियों की पहचान और उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
हरिद्वार की इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि AI तकनीक का इस्तेमाल केवल रचनात्मक या उपयोगी कामों के लिए ही नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति की छवि खराब करने के लिए भी किया जा सकता है। इसलिए किसी महिला या किसी भी व्यक्ति के वास्तविक वीडियो को बिना अनुमति डाउनलोड करके उसमें बदलाव करना और उसे आपत्तिजनक रूप में फैलाना गंभीर मामला बन सकता है। इस घटना में भी मूल वीडियो को आपत्तिजनक रूप देने की बात सामने आई है और पुलिस शिकायत के बाद जांच आगे बढ़ रही है।
सबसे अहम बात यह है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुई आपत्तिजनक क्लिप को महिला का वास्तविक वीडियो समझना गलत है। उपलब्ध फैक्ट-चेक के अनुसार मूल वीडियो में महिला सामान्य कपड़ों में गंगा स्नान कर रही थी और बाद में उसी फुटेज में डिजिटल/AI छेड़छाड़ की गई। महिला ने शिकायत दर्ज कराई है और मामले में पुलिस जांच जारी है।











