हरियाणा में मानसून पड़ा कमजोर, 25 जुलाई तक सामान्य से 24% कम बारिश,28 जुलाई से मौसम बदलने के आसार

हरियाणा में 25 जुलाई तक सामान्य से 24% कम बारिश दर्ज हुई। 28 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होने के आसार हैं और कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना है।

हरियाणा में 25 जुलाई तक सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। 23 में से 16 जिलों में वर्षा औसत से कम रही। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 28 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होगा और कई जिलों में अच्छी बारिश की संभावना है।

हिसार: हरियाणा में इस बार जुलाई महीने के दौरान मानसून की रफ्तार धीमी रही, जिससे प्रदेश में बारिश का बड़ा घाटा दर्ज किया गया है। 1 जून से 25 जुलाई तक राज्य में सामान्य से 24 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी, राजस्थान और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 28 जुलाई से मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है और प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है।

जुलाई में सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश

हरियाणा में इस मानसून सीजन के दौरान बारिश सामान्य से काफी कम रही है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, 1 जून से 25 जुलाई तक प्रदेश में कुल 132.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 175.4 मिलीमीटर मानी जाती है। यानी राज्य में अब तक करीब 24 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है।

प्रदेश के 23 जिलों में से केवल सात जिलों में सामान्य या सामान्य के आसपास वर्षा हुई, जबकि 16 जिलों में बारिश का स्तर औसत से कम रहा। लगातार कमजोर मानसून के कारण किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी उमस और गर्मी का सामना करना पड़ा।

28 जुलाई से फिर सक्रिय होगा मानसून

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले एक सप्ताह से कमजोर पड़ा मानसून अब दोबारा सक्रिय होने की ओर बढ़ रहा है। राजस्थान और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने दो अलग-अलग निम्न दबाव (लो-प्रेशर) क्षेत्र तथा पहाड़ी इलाकों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव से उत्तर भारत में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में अगले दो से तीन दिनों के दौरान मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। इससे प्रदेश में बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी होने की उम्मीद है।

इन जिलों में सबसे कम और सबसे ज्यादा बारिश

25 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार फरीदाबाद में सबसे अधिक 271 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 41 प्रतिशत अधिक है। दूसरी ओर कई जिलों में बारिश का बड़ा घाटा देखने को मिला।

हिसार में 34 प्रतिशत, कैथल में 46 प्रतिशत, पंचकूला में 49 प्रतिशत, जींद में 65 प्रतिशत और सिरसा में 61 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। वहीं चरखी दादरी, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़, पलवल, रेवाड़ी और यमुनानगर सामान्य श्रेणी में रहे।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून ट्रफ और अन्य सक्रिय मौसम प्रणालियां अधिकतर समय राजस्थान की ओर केंद्रित रहीं, जिसके कारण हरियाणा, दिल्ली और एनसीआर में केवल हल्की या छिटपुट बारिश ही देखने को मिली।

28 से 30 जुलाई के बीच इन इलाकों में बारिश के आसार

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 28 से 30 जुलाई के बीच पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और करनाल में अच्छी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पानीपत और सोनीपत में भी वर्षा की संभावना जताई गई है।

रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और पलवल में भी मध्यम से कहीं-कहीं तेज बारिश होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने लोगों को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने और भारी बारिश के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है।

तापमान में बढ़ोतरी से बढ़ी उमस

बारिश की कमी का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया। रविवार को प्रदेश के अधिकतम तापमान में औसतन दो डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई। हिसार में अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस, अंबाला में 37.2 डिग्री, रोहतक में 36.3 डिग्री और भिवानी में 37 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय रहता है तो तापमान में गिरावट आएगी और उमस से राहत मिलेगी। वहीं पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन, बादल फटने और नदियों-नालों के उफान जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

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