हाईकोर्ट का अहम फैसला: बच्चे की कस्टडी मां को सौंपी, कहा- इच्छा नहीं, शिक्षा और सुरक्षा सबसे जरूरी

हाईकोर्ट ने बच्चे की कस्टडी मां को सौंपी। कहा- बच्चे की इच्छा से ज्यादा उसकी शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य अहम है।
हाईकोर्ट का अहम फैसला: बच्चे की कस्टडी मां को सौंपी, कहा- इच्छा नहीं, शिक्षा और सुरक्षा सबसे जरूरी
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प्रयागराज- महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने बच्चे की कस्टडी मां को सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में केवल बच्चे की इच्छा को अंतिम आधार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि बच्चे के सर्वांगीण विकास, शिक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता देना अधिक आवश्यक है।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना। इस दौरान यह बात सामने आई कि बच्चा किसके साथ रहना चाहता है, लेकिन न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर फैसला लेना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि बच्चे की उम्र, मानसिक स्थिति और उसके भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।

न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि बच्चे का हित सर्वोपरि होना चाहिए। उसकी शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और बेहतर परवरिश सुनिश्चित करना अभिभावकों और न्याय प्रणाली दोनों की जिम्मेदारी है। ऐसे में यह देखा जाना जरूरी है कि कौन-सा अभिभावक बच्चे को बेहतर माहौल दे सकता है।

कोर्ट ने पाया कि मां के पास बच्चे की देखभाल, शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। इसी आधार पर कस्टडी मां को सौंपने का निर्णय लिया गया।

इस फैसले को पारिवारिक मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय यह स्पष्ट करता है कि कस्टडी से जुड़े मामलों में भावनात्मक पहलुओं के साथ-साथ व्यावहारिक और दीर्घकालिक हितों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, अदालतें अक्सर ‘बेस्ट इंटरेस्ट ऑफ द चाइल्ड’ के सिद्धांत पर काम करती हैं, जिसमें बच्चे की भलाई को सबसे ऊपर रखा जाता है। इस फैसले में भी यही सिद्धांत प्रमुख रूप से नजर आया।

कुल मिलाकर, हाईकोर्ट का यह फैसला यह संदेश देता है कि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से जुड़े मामलों में संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी है, ताकि उनका विकास सही दिशा में हो सके।

 

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