हिमाचल प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्र में करीब 200 साल पुराने बरगद के आसपास बने सुरक्षात्मक चबूतरे के मामले में NGT ने वन विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है। विभाग को निर्माण की अनुमति और प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी शपथपत्र के जरिए देनी होगी।
शिमला: हिमाचल प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्र में प्राचीन बरगद के पेड़ के चारों ओर बने चबूतरे को लेकर NGT ने वन विभाग से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि निर्माण से पेड़ की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। NGT ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण की अनुमति और पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करने के लिए शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
200 साल पुराने बरगद के आसपास निर्माण का मामला
हिमाचल प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्र में करीब 200 साल पुराने बरगद के पेड़ के चारों ओर बनाए गए सुरक्षात्मक चबूतरे को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने संज्ञान लिया है। मामला परमजीत मनकोटिया बनाम हिमाचल सरकार एवं अन्य के रूप में NGT के समक्ष चल रहा है।
याचिकाकर्ता ने पेड़ के आसपास कथित तौर पर आवश्यक अनुमति के बिना निर्माण किए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि निर्माण से बरगद की जड़ प्रणाली वाले क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।
वन विभाग ने निर्माण को लेकर क्या बताया?
सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों की ओर से बताया गया कि बरगद के चारों ओर केवल एक छोटा सुरक्षात्मक बैठने का चबूतरा बनाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य पुराने पेड़ को सुरक्षित रखना, उसकी जड़ों के आसपास मिट्टी के कटाव को रोकना और वहां आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया गया है। हालांकि, NGT ने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा है कि चबूतरे के निर्माण के लिए किस प्रक्रिया का पालन किया गया और इसके लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई थी या नहीं।
NGT ने शपथपत्र दाखिल करने को कहा
NGT ने हिमाचल प्रदेश वन विभाग के प्रधान सचिव समेत संबंधित पक्षों को निर्माण से जुड़ी पूरी जानकारी शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसमें निर्माण की अनुमति, अपनाई गई प्रक्रिया और मौजूदा स्थिति को स्पष्ट करना होगा।
ट्रिब्यूनल ने संबंधित पक्षों को निर्धारित अवधि के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।
याचिकाकर्ता ने जड़ों को नुकसान की जताई आशंका
कांगड़ा जिले की जवाली तहसील के सिद्धपुरघाड़ गांव निवासी याचिकाकर्ता ने बरगद के आसपास किए गए निर्माण पर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि पेड़ के आसपास अस्थायी और गैर-टिकाऊ निर्माण से उसकी जड़ प्रणाली प्रभावित हो सकती है।
अब NGT के सामने वन विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि पेड़ के चारों ओर चबूतरा बनाने के लिए किस स्तर पर अनुमति ली गई थी और निर्माण के दौरान पर्यावरणीय एवं वन संबंधी नियमों का पालन किया गया या नहीं।











