सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी हिमाचल में CIC-IC की नियुक्ति नहीं, चौथी बार मांगे आवेदन; पूर्व आयुक्त ने उठाए सवाल

हिमाचल में CIC-IC नियुक्ति के लिए सरकार ने चौथी बार आवेदन मांगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने समयबद्ध नियुक्ति के निर्देश दिए थे। 29 अक्टूबर तक आवेदन होंगे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी हिमाचल में CIC-IC की नियुक्ति नहीं, चौथी बार मांगे आवेदन; पूर्व आयुक्त ने उठाए सवाल
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हिमाचल प्रदेश में राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) और सूचना आयुक्त (IC) के पदों पर नियुक्ति को लेकर एक बार फिर प्रक्रिया शुरू की गई है। राज्य सरकार ने इन पदों के लिए चौथी बार आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए थे। फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हिमाचल सरकार की ओर से बताया गया था कि उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण नई चयन प्रक्रिया शुरू की गई है।

राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के पद लंबे समय से खाली रहने के कारण सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़े मामलों की सुनवाई और अपीलों के निस्तारण पर असर पड़ने की बात सामने आती रही है। सितंबर 2026 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भी इन रिक्तियों को लेकर राज्य सरकार से समयसीमा स्पष्ट करने को कहा था। उस समय रिपोर्ट के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त और एकमात्र राज्य सूचना आयुक्त के पद क्रमशः जून और जुलाई 2025 से खाली थे तथा सरकार पहले दो बार आवेदन आमंत्रित कर चुकी थी।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था। 28 जुलाई 2026 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने चयन प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी थी, लेकिन नगर निकाय चुनावों के कारण परिणाम अधिसूचित नहीं किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आचार संहिता वैधानिक नियुक्तियों के मामले में बाधा नहीं हो सकती और राज्य को चयन प्रक्रिया के परिणाम अधिसूचित कर दो सप्ताह के भीतर नियुक्तियां करने का निर्देश दिया।

इसके बावजूद अब फिर से आवेदन मांगने की प्रक्रिया सामने आई है। हालिया विज्ञापन में सरकार ने मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि 29 अक्टूबर 2026 रात 11:59 बजे निर्धारित की गई है। सरकार ने कानून, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता एवं मीडिया, प्रशासन या शासन के क्षेत्र में व्यापक ज्ञान और अनुभव रखने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तियों से आवेदन मांगे हैं।

नए विज्ञापन में पद की पात्रता और कार्यकाल से जुड़े प्रावधान भी स्पष्ट किए गए हैं। संशोधित व्यवस्था के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से तीन वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, रहेगा। सरकार ने इस बार विज्ञापन में कार्यकाल से जुड़ी पहले की त्रुटि को भी ठीक किया है।

पदों के लिए आवेदन करने वालों के संबंध में भी कुछ प्रतिबंध निर्धारित हैं। संसद या किसी राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा के सदस्य, लाभ के पद पर बैठे व्यक्ति, राजनीतिक दल से जुड़े लोग, व्यवसाय करने वाले या किसी अन्य पेशे में सक्रिय व्यक्ति पात्र नहीं होंगे। इसका उद्देश्य पद पर नियुक्त होने वाले व्यक्तियों को निर्धारित वैधानिक शर्तों के अनुरूप रखना है।

इस पूरी प्रक्रिया पर राज्य के पूर्व सूचना आयुक्तों की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं। पूर्व आयुक्तों में से एक ने आरोप लगाया है कि सूचना आयोग को कमजोर करने से भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज से जुड़ी अनियमितताओं की जानकारी सामने आने में बाधा आ सकती है। यह पूर्व आयुक्त का आरोप है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि के तौर पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। दूसरी ओर, सरकार की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का कारण और उम्मीदवारों की उपलब्धता से जुड़े तथ्य आधिकारिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

दरअसल, सूचना आयोग RTI कानून के तहत नागरिकों को सूचना प्राप्त करने के अधिकार से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि किसी व्यक्ति को किसी सरकारी विभाग से सूचना नहीं मिलती या उपलब्ध कराई गई सूचना से वह संतुष्ट नहीं होता, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत वह अपील कर सकता है। राज्य सूचना आयोग ऐसे मामलों में दूसरी अपील और शिकायतों की सुनवाई करता है। इसलिए आयोग में आयुक्तों के पद खाली रहने का सीधा संबंध लंबित मामलों की सुनवाई से जुड़ता है।

हिमाचल प्रदेश में नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी भी इसी व्यापक संदर्भ में हुई। फरवरी 2026 में अदालत को बताया गया था कि पहले की प्रक्रिया में उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिले, जिसके बाद सरकार ने नए सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू की। बाद में जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने चयन प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी मिलने पर नियुक्तियों को अधिसूचित करने के लिए दो सप्ताह की समयसीमा तय की थी।

वहीं, सितंबर में हिमाचल हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान भी आयोग की रिक्तियों का मुद्दा उठा था। अदालत ने राज्य सरकार से मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त के पदों को भरने की समयसीमा बताने को कहा था। रिपोर्ट के मुताबिक आयोग के पद खाली रहने के कारण RTI से जुड़े आवेदकों को अपीलों की सुनवाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

अब चौथी बार आवेदन मांगने से चयन प्रक्रिया एक बार फिर शुरुआती चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। आवेदन जमा होने के बाद उम्मीदवारों की पात्रता की जांच, चयन समिति की प्रक्रिया और सरकार की ओर से अंतिम नियुक्ति जैसे चरण पूरे किए जाने होंगे। इस बार सरकार ने विज्ञापन में कार्यकाल संबंधी प्रावधान भी संशोधित रूप में स्पष्ट किए हैं।

राज्य सूचना आयोग के पदों पर नियुक्ति केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि RTI व्यवस्था के संचालन से भी जुड़ी है। आयोग में पद खाली रहने की स्थिति में अपीलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में नई चयन प्रक्रिया के जरिए सरकार अब इन पदों को भरने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तारीख 29 अक्टूबर 2026 है, जब आवेदन प्रक्रिया समाप्त होगी। इसके बाद चयन प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है और नियुक्तियां कब अधिसूचित होती हैं, इस पर नजर रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों और हाई कोर्ट में उठे सवालों की पृष्ठभूमि में इस बार नियुक्ति प्रक्रिया के समय पर पूरा होने का मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेगा।

 

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