शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए प्रस्तावित रोबोटिक सर्जरी नेटवर्क को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष एवं विधायक विनोद कुमार ने रोबोटिक सर्जरी नेटवर्क स्थापित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस सरकार से खरीद प्रक्रिया, मशीनों की कीमत, तकनीकी मानकों और टेंडर से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया है कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के नाम पर होने वाली इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है और सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सरकारी धन का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।
भाजपा का कहना है कि उसे रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक चिकित्सा तकनीक के विस्तार पर कोई आपत्ति नहीं है। पार्टी के अनुसार, प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और बड़े अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना मरीजों के हित में है। असली सवाल इस तकनीक को स्थापित करने की प्रक्रिया और उस पर खर्च होने वाली रकम को लेकर है। विनोद कुमार ने इसी आधार पर सरकार से परियोजना से संबंधित विस्तृत दस्तावेज और वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
विनोद कुमार ने कहा कि सरकार केवल रोबोटिक सर्जरी नेटवर्क की कुल लागत बताकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकती। उनका सवाल है कि आखिर किस कंपनी की कौन-सी रोबोटिक सर्जरी प्रणाली खरीदी जा रही है या खरीदने का प्रस्ताव है, उस सिस्टम की तकनीकी क्षमता क्या है और उसके लिए कितनी राशि निर्धारित की गई है। भाजपा नेता ने यह भी मांग की है कि मशीन के तकनीकी स्पेसिफिकेशन और खरीद के आधार को सार्वजनिक किया जाए, ताकि यह पता चल सके कि चयन किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
भाजपा ने इस बात पर भी सवाल उठाया है कि अगर प्रदेश सरकार रोबोटिक सर्जरी के लिए किसी विशेष प्रणाली का चयन कर रही है तो उसकी तुलना दूसरे राज्यों और देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में खरीदी गई समान या तुलनीय प्रणालियों से क्यों नहीं की जा रही है। पार्टी का कहना है कि अलग-अलग कंपनियों की रोबोटिक सर्जरी प्रणालियों की कीमत और तकनीकी क्षमता में अंतर हो सकता है। ऐसे में खरीद की कीमत को समझने के लिए अन्य सरकारी और बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में हुई खरीद की दरों से तुलना करना जरूरी है।
भाजपा नेता ने टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी है। उनका कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजना में सिर्फ मशीन खरीदना ही मुद्दा नहीं है, बल्कि उसके चयन से लेकर स्थापना, संचालन, प्रशिक्षण, सर्विसिंग और रखरखाव तक की पूरी व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी अत्याधुनिक उपकरण पर बड़ी राशि खर्च की जाती है तो उसके इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों और तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही लंबे समय तक मशीन के रखरखाव और तकनीकी सहायता की व्यवस्था भी स्पष्ट होनी चाहिए।
रोबोटिक सर्जरी को लेकर भाजपा की आपत्ति तकनीक के इस्तेमाल से ज्यादा उस प्रक्रिया पर केंद्रित है, जिसके माध्यम से सरकार इस नेटवर्क को स्थापित करने की तैयारी कर रही है। विनोद कुमार ने इसे सरकारी धन और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा मामला बताते हुए कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसके पैसे से खरीदी जाने वाली अत्याधुनिक मशीन की कीमत क्या है और उसके चयन का आधार क्या है।
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि आधुनिक स्वास्थ्य तकनीक के नाम पर यदि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो इससे कई सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मांग की कि सरकार सभी संबंधित जानकारियां सार्वजनिक करे और विपक्ष तथा जनता द्वारा उठाए जा रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब दे। हालांकि ये आरोप भाजपा की ओर से लगाए गए हैं और उपलब्ध रिपोर्ट में इस मामले पर राज्य सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रोबोटिक सर्जरी नेटवर्क की योजना हिमाचल के स्वास्थ्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। रोबोटिक सिस्टम की मदद से कुछ जटिल सर्जरी में डॉक्टरों को अधिक सटीकता और बेहतर नियंत्रण हासिल करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि इस तरह की तकनीक की स्थापना महंगी होती है और इसके लिए सिर्फ उपकरण खरीदना पर्याप्त नहीं माना जाता। अस्पताल की आधारभूत सुविधाएं, प्रशिक्षित विशेषज्ञ, तकनीकी स्टाफ, नियमित मेंटेनेंस और मरीजों के लिए उपचार की लागत जैसे कई पहलू भी इससे जुड़े होते हैं।
इसी वजह से भाजपा चाहती है कि सरकार रोबोटिक सर्जरी नेटवर्क से जुड़े सभी वित्तीय और तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करे। पार्टी का कहना है कि यदि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है तो खरीद से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इससे न केवल विपक्ष के सवालों का जवाब मिलेगा, बल्कि आम लोगों के बीच भी परियोजना को लेकर विश्वास बढ़ेगा।
भाजपा ने यह भी सवाल उठाया है कि रोबोटिक सर्जरी प्रणाली के चयन के लिए सरकार ने किन मानकों को आधार बनाया है। किसी भी अत्याधुनिक मेडिकल उपकरण की खरीद में तकनीकी क्षमता के साथ उसकी उपयोगिता, अस्पताल की जरूरत, डॉक्टरों की उपलब्धता और भविष्य के संचालन खर्च को ध्यान में रखना जरूरी होता है। पार्टी का कहना है कि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि प्रस्तावित सिस्टम का इस्तेमाल किन अस्पतालों में किया जाएगा और इसके माध्यम से कितने मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार मरीजों के लिए काफी मायने रखता है। गंभीर बीमारियों या जटिल सर्जरी के लिए मरीजों को अक्सर बड़े शहरों और दूसरे राज्यों के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। यदि प्रदेश के भीतर ही आधुनिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होती है तो मरीजों और उनके परिवारों को बाहर जाने की परेशानी तथा अतिरिक्त खर्च से राहत मिल सकती है। लेकिन इसके लिए परियोजना की योजना और क्रियान्वयन दोनों मजबूत होना जरूरी है।
भाजपा का कहना है कि सरकार को रोबोटिक सर्जरी नेटवर्क को लेकर विपक्ष के सवालों को राजनीतिक आरोप मानकर खारिज करने के बजाय सार्वजनिक रूप से तथ्य सामने रखने चाहिए। इसमें कंपनी का नाम, मशीन का मॉडल, तकनीकी स्पेसिफिकेशन, खरीद या प्रस्तावित खरीद की कीमत, टेंडर की शर्तें और चयन प्रक्रिया जैसी जानकारियां शामिल होनी चाहिए। पार्टी के अनुसार, इस तरह की जानकारी सामने आने से यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए खर्च की जा रही राशि का इस्तेमाल किस तरीके से किया जा रहा है।
विनोद कुमार ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि यदि किसी विशेष कंपनी या प्रणाली का चयन किया गया है तो उसके पीछे तकनीकी और वित्तीय आधार क्या है। भाजपा की मांग है कि तुलनीय मशीनों की कीमतों और दूसरे राज्यों या संस्थानों में हुई खरीद का विवरण भी सामने रखा जाए। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि हिमाचल में प्रस्तावित खरीद बाजार की परिस्थितियों और अन्य सरकारी संस्थानों में हुई खरीद के अनुरूप है या नहीं।
फिलहाल रोबोटिक सर्जरी नेटवर्क को लेकर भाजपा के सवालों ने हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य परियोजनाओं में पारदर्शिता और सरकारी खरीद की प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। भाजपा ने जहां इसे भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है, वहीं इस परियोजना के वास्तविक स्वरूप, खरीद की अंतिम प्रक्रिया और लागत को लेकर सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। सरकार की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि रोबोटिक सर्जरी नेटवर्क की खरीद और स्थापना किस चरण में है और इसके लिए किन शर्तों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। एक तरफ भाजपा खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और सरकारी खर्च का पूरा ब्योरा मांग रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत भी लगातार बनी हुई है। ऐसे में रोबोटिक सर्जरी नेटवर्क को लेकर सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि सरकार इस अत्याधुनिक तकनीक को कितनी पारदर्शी, प्रभावी और मरीज-केंद्रित व्यवस्था के साथ लागू करती है। फिलहाल भाजपा ने सरकार के सामने खरीद प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल रख दिए हैं और अब इन सवालों पर सरकार के आधिकारिक जवाब का इंतजार है।











