बंगाल उपचुनाव में BJP का बड़ा दांव, नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत PA की मां हसीरानी रथ को टिकट

पश्चिम बंगाल उपचुनाव में भाजपा ने नंदीग्राम से हसीरानी रथ को टिकट दिया है। वह शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत PA चंद्रनाथ रथ की मां हैं। मतदान 6 अक्टूबर को होगा।
बंगाल उपचुनाव में BJP का बड़ा दांव, नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत PA की मां हसीरानी रथ को टिकट
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। नंदीग्राम से भाजपा ने हसीरानी रथ को मैदान में उतारा है। हसीरानी रथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ रथ की मई में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के कुछ ही समय बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI कर रही है। ऐसे में भाजपा का हसीरानी रथ को नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाना राजनीतिक और भावनात्मक, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भाजपा ने रेजीनगर विधानसभा सीट से शाश्वर सरकार को उम्मीदवार बनाया है। शाश्वर सरकार पार्टी के राज्य सचिव और मुर्शिदाबाद के पूर्व जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। इस तरह पार्टी ने दोनों सीटों पर ऐसे चेहरों को मौका दिया है, जिनके जरिए स्थानीय संगठन और राजनीतिक समीकरण को साधने की कोशिश की गई है। नंदीग्राम में हसीरानी रथ की उम्मीदवारी को खास तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि उनका परिवार शुभेंदु अधिकारी के साथ लंबे समय से जुड़ा रहा है और उनके बेटे चंद्रनाथ रथ की हत्या का मामला अभी जांच के दायरे में है।

नंदीग्राम सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले से ही बेहद अहम रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर सीट से भी जीत दर्ज की थी। नियम के मुताबिक दो सीटों में से एक सीट छोड़नी थी, इसलिए उन्होंने नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया। इसी वजह से यहां उपचुनाव की स्थिति बनी है। दूसरी ओर रेजीनगर सीट भी विधायक हुमायूं कबीर के दो सीटों से चुनाव जीतने के बाद एक सीट छोड़ने के कारण खाली हुई। अब दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है और 9 अक्टूबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे।

भाजपा की ओर से हसीरानी रथ को टिकट दिए जाने के बाद नंदीग्राम का चुनाव और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। चंद्रनाथ रथ शुभेंदु अधिकारी के करीबी और लंबे समय तक उनके निजी सहायक रहे थे। चुनाव परिणाम के दो दिन बाद उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या की जांच फिलहाल CBI कर रही है। ऐसे में हसीरानी रथ का चुनाव मैदान में उतरना इस मुद्दे को भी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला सकता है। हालांकि हत्या के मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

उम्मीदवारी की घोषणा के बाद हसीरानी रथ ने चुनाव लड़ने की तैयारी जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने स्थानीय मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना भी की और नंदीग्राम के लोगों के लिए काम करने की बात कही। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी के क्षेत्र में किए गए कामों की सराहना करते हुए पार्टी के समर्थन के साथ चुनाव मैदान में उतरने का भरोसा जताया। उनके नाम की घोषणा के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी चुनाव को लेकर सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है।

नंदीग्राम का राजनीतिक महत्व केवल विधानसभा सीट होने तक सीमित नहीं है। यह इलाका पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का प्रतीक रहा है। शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक आधार भी नंदीग्राम से जुड़ा रहा है। ऐसे में उनके करीबी सहयोगी के परिवार से आने वाली हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने एक तरफ स्थानीय भावनाओं को साधने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ शुभेंदु अधिकारी के प्रभाव को भी चुनावी मैदान में इस्तेमाल करने का संकेत दिया है।

दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को टिकट दिया गया है। नंदीग्राम में ममता बनर्जी के चुनाव लड़ने की अटकलें भी लगाई जा रही थीं, लेकिन पार्टी की ओर से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद इन चर्चाओं पर विराम लग गया। अब नंदीग्राम में भाजपा और टीएमसी के उम्मीदवार आमने-सामने होंगे।

हालांकि मुकाबला केवल भाजपा और टीएमसी तक सीमित नहीं रहने वाला है। टीएमसी के भीतर बने एक बागी गुट ने भी दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। बागी गुट ने नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउज्जमां शेख को मैदान में उतारा है। इससे चुनावी मुकाबला और बहुकोणीय होने की संभावना है। नंदीग्राम में अलग-अलग राजनीतिक दलों और गुटों के उम्मीदवार मैदान में होने के कारण वोटों के बंटवारे का असर भी चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।

भाजपा के लिए नंदीग्राम की सीट इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहती है। शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद नंदीग्राम का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। अब उनकी छोड़ी हुई सीट पर उपचुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को उनके प्रभाव और भाजपा संगठन की ताकत से जोड़कर भी देखा जाएगा। हसीरानी रथ की उम्मीदवारी से चुनाव में व्यक्तिगत और पारिवारिक भावनाओं का पहलू भी जुड़ गया है।

वहीं टीएमसी के सामने इस सीट पर भाजपा के प्रभाव को चुनौती देने की जिम्मेदारी है। पार्टी ने स्थानीय उम्मीदवार संचिता प्रधान डे को मैदान में उतारा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों की ओर से जोरदार प्रचार अभियान शुरू होने की संभावना है। नंदीग्राम के मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए विकास, स्थानीय मुद्दों, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा जैसे मुद्दे चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं।

रेजीनगर में भी मुकाबला कम महत्वपूर्ण नहीं है। भाजपा ने शाश्वर सरकार को मैदान में उतारा है, जो संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। दूसरी तरफ टीएमसी ने रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा बागी गुट की मौजूदगी भी इस सीट के चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है। मुर्शिदाबाद क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए रेजीनगर का मुकाबला भी काफी दिलचस्प रहने की उम्मीद है।

नंदीग्राम उपचुनाव के लिए अब उम्मीदवारों की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। भाजपा की ओर से हसीरानी रथ की उम्मीदवारी को सबसे ज्यादा चर्चा मिल रही है। उनके बेटे चंद्रनाथ रथ की हत्या की जांच अभी CBI के पास है और यह मुद्दा चुनावी चर्चा में कितना प्रभाव डालता है, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी। भाजपा इसे भावनात्मक मुद्दे के साथ-साथ न्याय और स्थानीय प्रतिनिधित्व से जोड़ सकती है, जबकि विपक्ष की ओर से इसे लेकर अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना के बाद परिणाम सामने आएंगे। नामांकन प्रक्रिया के बाद चुनाव प्रचार तेज होगा और दोनों प्रमुख दलों के वरिष्ठ नेता भी अपने उम्मीदवारों के समर्थन में मैदान में उतर सकते हैं। नंदीग्राम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है, क्योंकि उनकी राजनीतिक पहचान इस क्षेत्र से गहराई से जुड़ी हुई है।

इस उपचुनाव में भाजपा के सामने अपने प्रभाव को बनाए रखने की चुनौती है, जबकि टीएमसी नंदीग्राम को वापस अपने राजनीतिक प्रभाव में लाने की कोशिश करेगी। इसके अलावा टीएमसी के भीतर बगावत और अलग उम्मीदवारों की मौजूदगी मुकाबले को और पेचीदा बना सकती है। ऐसे में 6 अक्टूबर को होने वाला मतदान केवल दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं होगा, बल्कि पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और स्थानीय समीकरणों की भी परीक्षा होगी।

फिलहाल भाजपा की उम्मीदवार सूची जारी होने के बाद नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर चुनावी हलचल तेज हो गई है। नंदीग्राम से हसीरानी रथ और रेजीनगर से शाश्वर सरकार के नाम सामने आने के बाद भाजपा ने अपना चुनावी रुख स्पष्ट कर दिया है। अब सभी की नजरें नामांकन, प्रचार अभियान और मतदान के दिन मतदाताओं के रुख पर रहेंगी। खास तौर पर नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत PA की मां को टिकट दिए जाने के बाद यह सीट उपचुनाव की सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो गई है।

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