हिमाचल में ठंड बढ़ी, ताबो का पारा 3.8°C पहुंचा मानसून कमजोर, 20-25 सितंबर तक बारिश से राहत

हिमाचल में बारिश थमने के साथ ठंड बढ़ने लगी है। ताबो में न्यूनतम तापमान 3.8°C पहुंचा। शिमला समेत कई इलाकों में 20 से 25 सितंबर तक मौसम साफ रहने की उम्मीद है।
हिमाचल में ठंड बढ़ी, ताबो का पारा 3.8°C पहुंचा मानसून कमजोर, 20-25 सितंबर तक बारिश से राहत
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हिमाचल प्रदेश में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने के साथ मौसम का मिजाज तेजी से बदलने लगा है। बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के बाद अब प्रदेश में सुबह, शाम और रात के समय ठंड महसूस होने लगी है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। 17 सितंबर की रात प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज हुई और लाहौल-स्पीति के ताबो में पारा 3.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। उपलब्ध मौसम रिपोर्ट में केलांग का न्यूनतम तापमान भी 3.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।

बारिश का दौर कमजोर पड़ने के साथ प्रदेश में अब अगले कुछ दिनों के दौरान मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने की संभावना है। शिमला के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान में 19 सितंबर को हल्के बादल और हल्की बारिश की संभावना के बाद 20 सितंबर से मौसम आंशिक रूप से साफ रहने तथा 22 से 24 सितंबर के बीच मुख्य रूप से साफ आसमान रहने का अनुमान दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि मानसून की सक्रियता में कमी आने के साथ प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश से राहत का दौर बन सकता है।

पिछले दिनों हुई बारिश का असर तापमान पर भी दिखाई दे रहा है। 18 सितंबर को जारी मौसम विभाग से संबंधित रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटों में शिमला, कुल्लू, मंडी समेत कई क्षेत्रों में बारिश हुई थी। सुन्नी बज्जी में 33.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि मनाली में 17 मिलीमीटर, सेओबाग में 19 मिलीमीटर और भुंतर में 14.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। शिमला में भी 3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

बारिश के कारण प्रदेश के कई हिस्सों के अधिकतम तापमान में भी गिरावट आई। मौसम विभाग के अनुसार अधिकांश स्टेशनों पर पिछले 24 घंटे के दौरान अधिकतम तापमान में करीब 2 से 12 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। 17 सितंबर को ऊना प्रदेश का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके विपरीत ऊंचाई वाले इलाकों में रात का तापमान काफी नीचे पहुंच गया।

हिमाचल में तापमान का यह अंतर प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को भी दिखाता है। मैदानी और निचले क्षेत्रों में दिन के समय अभी भी गर्मी महसूस हो सकती है, जबकि मध्य और ऊंचाई वाले इलाकों में सुबह और रात के समय ठंड बढ़ने लगी है। यही वजह है कि एक ही दिन में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के तापमान में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लोगों को अब सुबह और शाम गर्म कपड़ों की जरूरत महसूस होने लगी है।

शिमला के मौसम की बात करें तो 18 सितंबर को न्यूनतम तापमान करीब 14.5 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के शहर आधारित पूर्वानुमान के अनुसार 19 सितंबर को शिमला में न्यूनतम तापमान करीब 16 और अधिकतम 25 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। इसके बाद 20 और 21 सितंबर को आंशिक रूप से बादल रहने का अनुमान है, जबकि 22 से 24 सितंबर के दौरान आसमान मुख्य रूप से साफ रहने का पूर्वानुमान है। इन दिनों किसी चेतावनी का उल्लेख नहीं किया गया है।

तापमान में गिरावट का असर खासकर लाहौल-स्पीति और दूसरे ऊंचाई वाले इलाकों में ज्यादा दिखाई दे रहा है। ताबो जैसे क्षेत्रों में रात का तापमान 5 डिग्री के आसपास या उससे नीचे पहुंचना इस बात का संकेत है कि मौसम अब धीरे-धीरे गर्मियों के दौर से आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में साफ मौसम रहने की स्थिति में रात के तापमान में स्थानीय स्तर पर और गिरावट हो सकती है, हालांकि इसका वास्तविक असर बाद के मौसम संबंधी आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

हिमाचल में मानसून की गतिविधि कमजोर पड़ने की स्थिति केवल राज्य तक सीमित नहीं है। भारतीय मौसम विभाग ने भी सितंबर के मध्य में उत्तर-पश्चिम भारत से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने के अनुकूल परिस्थितियां बनने की जानकारी दी थी। सामान्य तौर पर उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी की सामान्य तारीख 17 सितंबर मानी जाती है। इस साल विभाग ने पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से करीब 19 सितंबर के आसपास वापसी की संभावना जताई थी।

मानसून की वापसी का असर हिमाचल के मौसम पर भी पड़ता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि प्रदेश में इसके बाद बिल्कुल बारिश नहीं होगी। स्थानीय मौसम प्रणालियों, पश्चिमी विक्षोभ और ऊंचाई वाले क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बाद में भी कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। इसलिए फिलहाल इसे लंबे समय तक पूरी तरह शुष्क मौसम की गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

पिछले दिनों की बारिश ने प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान को नीचे लाने के साथ-साथ मानसून से जुड़ी समस्याओं को भी बढ़ाया था। सितंबर के शुरुआती और मध्य दिनों में भारी बारिश के कारण कई सड़कें बंद हुई थीं और पेयजल आपूर्ति की योजनाओं पर भी असर पड़ा था। राज्य में बारिश से हुए नुकसान के बाद कई क्षेत्रों में सड़क और दूसरी आधारभूत सुविधाओं की बहाली का काम भी चल रहा है।

अब मौसम साफ होने से ऐसे क्षेत्रों में राहत मिलने की उम्मीद है जहां लगातार बारिश के कारण सड़क संपर्क या दूसरे स्थानीय काम प्रभावित हुए थे। हालांकि जिन इलाकों में बारिश से नुकसान हुआ है, वहां पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने में समय लग सकता है। साफ मौसम राहत और मरम्मत कार्यों के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध करा सकता है।

प्रदेश में दिन और रात के तापमान में बढ़ता अंतर भी लोगों के लिए मौसम परिवर्तन का संकेत है। दिन में धूप निकलने पर मौसम सामान्य या हल्का गर्म लग सकता है, लेकिन सूरज ढलने के बाद तापमान तेजी से नीचे जाने लगता है। पहाड़ी इलाकों में यह बदलाव मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक महसूस होता है। आने वाले दिनों में मौसम साफ रहने पर सुबह के समय हल्की ठंड और दोपहर में अपेक्षाकृत आरामदायक मौसम देखने को मिल सकता है।

हिमाचल के पर्यटन क्षेत्रों में भी इस मौसम परिवर्तन का असर देखने को मिल सकता है। शिमला, मनाली, कुफरी, कल्पा, लाहौल-स्पीति और दूसरे ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम का स्वरूप मैदानी शहरों से अलग रहता है। सितंबर के दूसरे पखवाड़े में मानसून कमजोर होने और तापमान गिरने के साथ इन क्षेत्रों में सुबह-शाम ठंड बढ़ना सामान्य मौसमी बदलाव का हिस्सा है।

मौसम विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 17 सितंबर को शिमला का अधिकतम तापमान 21.5 डिग्री, सोलन का 26 डिग्री, मंडी का 26.6 डिग्री, बिलासपुर का 30 डिग्री, नाहन का 27 डिग्री और मनाली का 24.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इससे स्पष्ट है कि ऊंचाई और भौगोलिक स्थिति के अनुसार प्रदेश में तापमान का अंतर काफी अधिक बना हुआ है।

बारिश के कमजोर पड़ने के साथ किसानों के लिए भी मौसम का यह बदलाव महत्वपूर्ण है। लगातार बारिश से जहां कुछ फसलों और खेतों को नुकसान का खतरा रहता है, वहीं बारिश रुकने से खेतों में काम करने और क्षतिग्रस्त इलाकों में गतिविधियां बहाल करने में सुविधा हो सकती है। हालांकि अलग-अलग फसलों पर मौसम का प्रभाव स्थानीय परिस्थितियों और बारिश की मात्रा पर निर्भर करेगा।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान में गिरावट को देखते हुए स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सुबह और रात के समय सावधानी बरतने की जरूरत होगी। दिन में तापमान सामान्य रहने के बावजूद रात में ठंड बढ़ सकती है। विशेषकर लाहौल-स्पीति और ऊंचे पर्वतीय इलाकों में तापमान में अचानक बदलाव सामान्य बात है, इसलिए वहां जाने वाले लोगों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देखकर यात्रा की योजना बनानी चाहिए।

मौजूदा मौसम स्थिति में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि प्रदेश में लगातार सक्रिय मानसूनी बारिश का दौर कमजोर हो रहा है। शिमला के आधिकारिक पूर्वानुमान में भी 20 सितंबर के बाद बारिश की संभावना में कमी और 22 से 24 सितंबर के दौरान मुख्य रूप से साफ मौसम का संकेत दिया गया है।

हालांकि प्रदेश के हर जिले में मौसम एक जैसा नहीं रहेगा। हिमाचल की ऊंचाई, घाटियों और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एक जिले के भीतर भी मौसम में अंतर हो सकता है। कहीं धूप खिल सकती है तो कहीं बादल बने रह सकते हैं। इसलिए राज्य के लिए जारी सामान्य पूर्वानुमान को हर गांव या कस्बे पर बिल्कुल समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता।

आने वाले दिनों में अगर मौसम विभाग का साफ मौसम का अनुमान बना रहता है तो हिमाचल में सुबह-शाम की ठंड और अधिक महसूस हो सकती है। बारिश से वातावरण में नमी बढ़ने के बाद आसमान साफ होने पर रात में धरातलीय विकिरण के कारण तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है। पहाड़ी इलाकों में यह प्रभाव मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक स्पष्ट हो सकता है।

कुल मिलाकर हिमाचल प्रदेश में मानसून के कमजोर पड़ने के साथ मौसम का मिजाज बदल रहा है। ताबो और केलांग जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि कई अन्य स्थानों पर भी रात का पारा नीचे आया है। दूसरी ओर शिमला समेत कई क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों में मौसम के अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है।

ऐसे में सितंबर के आखिरी हिस्से की ओर बढ़ते हिमाचल में बारिश से राहत के साथ ठंड का असर धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना दिखाई दे रही है। हालांकि स्थानीय स्तर पर बारिश की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और मौसम में बदलाव के साथ पूर्वानुमान भी बदल सकता है। लोगों को विशेषकर पहाड़ी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा से पहले मौसम विभाग की ताजा जानकारी देखते रहना चाहिए।

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