अमेरिका में हंता वायरस के संपर्क में आए 17 यात्रियों को नेब्रास्का में 42 दिन के क्वारंटीन में रखा गया है। यह वायरस गंभीर संक्रमण फैलाता है, जिससे किडनी फेल और सांस लेने में दिक्कत जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं।
वाशिंगटन: अमेरिका ने हंता वायरस (Hantavirus) के संभावित संपर्क में आए 17 यात्रियों को विशेष सुरक्षा व्यवस्था के तहत नेब्रास्का मेडिकल सेंटर में भर्ती किया है। इन सभी यात्रियों को 42 दिनों तक क्वारंटीन और चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।
अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) के अनुसार, इन यात्रियों को एक विशेष सरकारी विमान के जरिए सुरक्षित रूप से अमेरिका वापस लाया गया। ये सभी यात्री “MV होंडियस” नामक क्रूज शिप पर सवार थे, जहां हंता वायरस से जुड़े मामले सामने आए थे। यह जहाज स्पेन के कैनरी आइलैंड्स क्षेत्र में रुका हुआ था।
एक यात्री में संक्रमण की पुष्टि, दूसरे में हल्के लक्षण
अधिकारियों के अनुसार, क्रूज शिप पर मौजूद यात्रियों में से एक व्यक्ति में हंता वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि दूसरे यात्री में हल्के लक्षण पाए गए हैं। संभावित खतरे को देखते हुए दोनों को तुरंत विशेष आइसोलेशन यूनिट में रखा गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम अब बाकी यात्रियों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई और व्यक्ति संक्रमित तो नहीं है। यदि किसी में संक्रमण पाया जाता है, तो उसका तुरंत उपचार शुरू किया जाएगा। वहीं, जिन यात्रियों में संक्रमण नहीं पाया जाएगा, उन्हें घर भेजने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन उन पर निगरानी जारी रहेगी।
हंता वायरस क्या है और कितना खतरनाक है?
हंता वायरस एक गंभीर और संभावित रूप से जानलेवा वायरस है, जो मुख्य रूप से कृंतक (Rodents) जैसे चूहों और गिलहरियों से फैलता है। यह वायरस उनके मल, मूत्र और लार के संपर्क में आने से इंसानों में फैल सकता है।
इस वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की “हंटन नदी” के नाम पर रखा गया है, जहां इसके शुरुआती मामले सामने आए थे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हंता वायरस की कुछ प्रजातियाँ इंसान से इंसान में भी फैल सकती हैं, हालांकि ऐसे मामले बेहद दुर्लभ हैं। संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों के संपर्क, या बेहद करीबी संपर्क जैसे एक ही स्थान पर रहने या देखभाल करने से फैल सकता है।

लक्षण और बीमारी की गंभीरता
हंता वायरस के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 1 से 8 सप्ताह के भीतर दिखाई देते हैं। शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं:
- तेज बुखार
- शरीर में दर्द और कमजोरी
- सांस लेने में कठिनाई
- थकान और चक्कर
जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मरीज को फेफड़ों में तरल भरने (Pulmonary Edema) और किडनी फेल होने का खतरा हो सकता है। गंभीर मामलों में यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ मामलों में मृत्यु दर 35% से 40% तक देखी गई है, खासकर जब इलाज में देरी हो जाती है।
वायरस का इतिहास और वैश्विक प्रसार
हंता वायरस का पहला प्रमुख मामला 1993 में अमेरिका में सामने आया था, जब एक दंपत्ति की अचानक मृत्यु हो गई थी। जांच में उनके घर के आसपास चूहों के संक्रमण के संकेत मिले थे।
दुनियाभर में हर साल लगभग 1.5 लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें अधिकांश मामले एशिया और यूरोप से जुड़े होते हैं। चीन में इस वायरस के सबसे अधिक मामले रिपोर्ट किए जाते हैं।
2018 में अर्जेंटीना में एक बर्थडे पार्टी के दौरान यह वायरस फैला था, जिसमें 34 लोग संक्रमित हुए और 11 लोगों की मृत्यु हो गई थी।
इलाज और वैक्सीन की स्थिति
फिलहाल हंता वायरस का कोई विशिष्ट इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर केवल लक्षणों के आधार पर उपचार करते हैं।
गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट या वेंटिलेटर पर रखा जाता है। शरीर में तरल संतुलन बनाए रखने के लिए फ्लूइड थेरेपी और दवाओं का उपयोग किया जाता है।
चिकित्सकों का मानना है कि समय पर पहचान और तुरंत उपचार से मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
क्वारंटीन व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल
अमेरिका में यात्रियों को नेब्रास्का मेडिकल सेंटर की विशेष क्वारंटीन सुविधा में रखा गया है। यह देश की एकमात्र संघीय रूप से संचालित बायो-कंटेनमेंट सुविधा है।
यहां के कमरे नेगेटिव एयर प्रेशर तकनीक से लैस हैं, जिससे वायरस बाहर फैल नहीं सकता। यात्रियों को होटल जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं, जिसमें भोजन, हल्की गतिविधियाँ और नियमित स्वास्थ्य जांच शामिल है।
यदि किसी यात्री में संक्रमण की पुष्टि होती है, तो उसे विशेष बायोसेफ्टी यूनिट में स्थानांतरित किया जाएगा।
भारत में भी सामने आ चुके हैं मामले
भारत में भी हंता वायरस के कुछ मामले पहले दर्ज किए जा चुके हैं। 2007 में आंध्र प्रदेश में एक व्यक्ति में संक्रमण पाया गया था।
2008 में चूहों और सांपों के संपर्क में आने वाले 28 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। 2016 में मुंबई में एक महिला की हंता वायरस से मृत्यु दर्ज की गई थी।
विशेषज्ञों की चेतावनी और सावधानियाँ
विशेषज्ञों का कहना है कि हंता वायरस कोविड-19 की तरह आसानी से नहीं फैलता, लेकिन इसकी गंभीरता अधिक हो सकती है। यह मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों के संपर्क से फैलता है।
- सावधानियों में शामिल हैं:
- चूहों और कृंतकों से दूर रहना
- घर और आसपास साफ-सफाई रखना
- भोजन को ढककर रखना
- संक्रमित क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय अपनाना












