National Commission for Women (NCW) ने सोमवार को Tata Consultancy Services के नासिक कार्यालय को लेकर गंभीर चिंता जताई। आयोग की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया कि दफ्तर में महिलाओं के लिए बेहद असुरक्षित और जहरीला कार्य वातावरण बना हुआ था।
नई दिल्ली: भारत की अग्रणी आईटी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) का नासिक कार्यालय राष्ट्रीय स्तर पर जांच और विवाद के केंद्र में आ गया है। National Commission for Women (NCW) ने अपनी हालिया फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में दावा किया है कि कार्यालय में महिलाओं के लिए असुरक्षित और भयपूर्ण कार्य वातावरण मौजूद था। रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम (POSH Act) के कथित उल्लंघन, मानसिक प्रताड़ना, धार्मिक दबाव और कर्मचारियों के बीच भय के माहौल जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर किया गया है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि कई महिला कर्मचारी शिकायत दर्ज कराने से डरती थीं क्योंकि उन्हें आंतरिक शिकायत प्रणाली पर भरोसा नहीं था। आयोग के अनुसार, कुछ कर्मचारियों को आशंका थी कि आवाज उठाने पर उनके खिलाफ ट्रांसफर, नौकरी समाप्ति या अन्य प्रतिकूल कदम उठाए जा सकते हैं।
9 FIR दर्ज, कई आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में कथित रेप, यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण से जुड़े कुल 9 FIR दर्ज की गई हैं। पुलिस ने अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हाल ही में आरोपी निदा खान को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए NCW ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की थी।
आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ आरोपियों पर महिला कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, धार्मिक टिप्पणियां करने और कार्यस्थल पर डर का माहौल बनाने के आरोप हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई पीड़ित कर्मचारियों ने लंबे समय तक चुप्पी बनाए रखी क्योंकि उन्हें कंपनी के भीतर निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं थी।
फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने की विस्तृत जांच

NCW द्वारा गठित जांच समिति में बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस साधना जाधव, हरियाणा के पूर्व DGP बी.के. सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा और आयोग की वरिष्ठ समन्वयक लीलावती शामिल थीं। समिति ने 18 और 19 अप्रैल 2026 को नासिक जाकर पीड़ित कर्मचारियों, कंपनी की POSH कमेटी, पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों से बातचीत की।
इसके बाद लगभग 50 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis को सौंपी गई। रिपोर्ट में कार्यस्थल की संस्कृति, HR प्रणाली और शिकायत निवारण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
धार्मिक टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना के आरोप
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ आरोपी कर्मचारियों द्वारा हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की जाती थीं और महिलाओं पर धार्मिक दबाव बनाया जाता था। आयोग ने कहा कि विशेष रूप से Gen Z वर्ग की महिला कर्मचारी इस मानसिक और धार्मिक प्रताड़ना से अधिक प्रभावित हुईं। इसके अलावा, रिपोर्ट में कार्यस्थल पर लगातार स्टॉकिंग, बुलिंग, अपमानजनक व्यवहार और मानसिक दबाव का उल्लेख किया गया है। आयोग का कहना है कि इस तरह का माहौल कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और पेशेवर सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा बन गया था।
NCW ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि गिरफ्तार आरोपी दानिश शेख, तौसीफ अख्तर और रजा मेमन का कार्यालय संचालन पर प्रभाव था और उन्हें कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था। रिपोर्ट में HR हेड और ऑपरेशन मैनेजमेंट की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आयोग के अनुसार, कर्मचारियों में इतना डर था कि कई लोग शिकायत करने या गवाही देने से बचते रहे। कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर यह भी कहा कि विरोध करने वालों को ट्रांसफर या नौकरी जाने का डर दिखाया जाता था।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 25 सिफारिशें दी हैं। इनमें POSH कानून के सख्त पालन, स्वतंत्र और मजबूत शिकायत निवारण तंत्र, पीड़ित कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा, गवाहों की सुरक्षा और कार्यस्थल की नियमित निगरानी जैसी महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं।











