तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने SIR को चुनाव आयोग की प्रक्रिया बताया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य मृत, फर्जी और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाना है। विपक्ष इस प्रक्रिया का विरोध कर रहा है और पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंका जता रहा है।
हैदराबाद: तेलंगाना में Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच BJP प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कहा है कि यह प्रक्रिया भारतीय जनता पार्टी नहीं, बल्कि भारत निर्वाचन आयोग की ओर से कराई जा रही है। उन्होंने विपक्ष पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को सही करना है।
SIR को लेकर तेलंगाना में राजनीतिक टकराव
तेलंगाना में मतदाता सूची के Special Intensive Revision को लेकर BJP और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बहस तेज है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी समेत विपक्षी नेताओं ने SIR को लेकर आपत्तियां जताई हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं और इसका राजनीतिक लाभ BJP को मिल सकता है।
इसके जवाब में तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कहा कि SIR BJP की पहल नहीं है। उनके मुताबिक, यह भारत निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद मृत, फर्जी और डुप्लीकेट नामों की पहचान करना है।
रामचंदर राव ने ओवैसी पर साधा निशाना
रामचंदर राव ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और SIR का विरोध कर रहे अन्य नेताओं से कहा कि उन्हें यह समझना चाहिए कि यह प्रक्रिया BJP की ओर से शुरू नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि SIR चुनाव आयोग की प्रक्रिया है और पहले भी इस तरह का संशोधन कांग्रेस के शासन के दौरान किया गया था। राव ने सवाल उठाया कि यदि उस समय इस प्रक्रिया का विरोध नहीं किया गया था, तो अब इसका विरोध क्यों किया जा रहा है।
BJP प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि केरल में SIR के बाद कांग्रेस ने चुनाव जीता था। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि जब कांग्रेस या INDIA Bloc चुनाव हारता है, तो वह कभी चुनाव आयोग और कभी EVM को इसके लिए जिम्मेदार ठहराता है।
SIR का उद्देश्य क्या बताया गया?
रामचंदर राव के मुताबिक, SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को व्यवस्थित और सही करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में मृत मतदाताओं, डुप्लीकेट मतदाताओं और विदेशी नागरिकों के नाम हटाने की प्रक्रिया शामिल है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई मतदाता किसी दूसरे स्थान पर रहने लगा है, तो उसका वोट नए निवास स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। राव ने SIR को इसी तरह की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इसमें कुछ भी अवैध नहीं है और इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, ये SIR के समर्थन में BJP प्रदेश अध्यक्ष की ओर से दिए गए तर्क हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका को लेकर सवाल उठाए हैं।
ओवैसी ने लगाए थे गंभीर आरोप
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने SIR को लेकर आरोप लगाया है कि BJP कार्यकर्ता तेलंगाना में Form 7 के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग और तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से Form 7 के जरिए नाम हटाने के लिए दिए गए हर आवेदन की जांच करने की मांग की है।
ओवैसी ने आरोप लगाया था कि कुछ मामलों में BJP से जुड़े लोगों ने मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किए हैं। उन्होंने चुनाव अधिकारियों से आवेदन करने वालों की पहचान सत्यापित करने और गलत आवेदन पाए जाने पर कार्रवाई करने की मांग की।
BJP ने इन आरोपों को खारिज किया
BJP की ओर से विपक्ष के आरोपों को खारिज किया गया है। तेलंगाना BJP के प्रवक्ता एन.वी. सुभाष ने कहा कि यदि ओवैसी के पास चुनावी गड़बड़ी से जुड़े सबूत हैं, तो उन्हें उचित कानूनी मंच पर पेश करना चाहिए।
BJP का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप केवल सार्वजनिक बयानों के आधार पर नहीं लगाए जाने चाहिए। पार्टी ने विपक्ष से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने को कहा है।
SIR के बाद छूटे मतदाताओं के लिए आयोग की पहल
SIR को लेकर चल रही बहस के बीच चुनाव आयोग ने उन पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश भी दिया है, जिनके नाम प्रक्रिया के दौरान छूट गए हैं।
चुनाव आयोग ने राज्यों को निर्देश दिया है कि SIR पूरा होने के बाद ऐसे मतदाताओं की पहचान की जाए, जिनके नाम छूट गए हैं। इसके अलावा पहली बार मतदान करने वाले और युवा मतदाताओं के नाम भी मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
तेलंगाना में 73 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर
तेलंगाना में SIR की प्रक्रिया के दौरान 73,39,235 मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट यानी ASDD श्रेणियों में रखा गया है और उनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं।
यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब SIR को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग ने पात्र लेकिन छूट गए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।
चुनाव आयोग ने प्रक्रिया में किए बदलाव
SIR को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच चुनाव आयोग ने 26 सितंबर की बैठक में प्रक्रिया से जुड़े कई फैसले किए। आयोग ने निर्देश दिया कि जिन लोगों को SIR के दौरान नोटिस जारी किया गया है और जिनके रिकॉर्ड में मैपिंग या अन्य तार्किक विसंगतियां हैं, उनके घर जाकर बूथ लेवल अधिकारी दस्तावेज एकत्र कर सकते हैं। इन दस्तावेजों को आगे निर्णय के लिए संबंधित चुनाव अधिकारी के पास भेजा जाएगा।
आयोग ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर जिला निर्वाचन अधिकारी रात्रि आश्रय गृहों, श्रमिकों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए सहायता केंद्र या विशेष शिविर आयोजित करें।
दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया जारी
चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े दावों और आपत्तियों के लिए भी समयसीमा में बदलाव किए हैं। आयोग के अनुसार, कुछ राज्यों में पात्र मतदाताओं को अपने नाम और रिकॉर्ड से जुड़ी आपत्तियां दर्ज कराने तथा सुधार की प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है।
SIR को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?
SIR को लेकर विवाद मुख्य रूप से इस सवाल पर केंद्रित है कि मतदाता सूची से अपात्र नाम हटाने की प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित न हों। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से वास्तविक मतदाताओं के मतदान अधिकार पर असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, BJP और चुनाव आयोग का रुख है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना जरूरी है तथा मृत, डुप्लीकेट, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अपात्र हो चुके नामों की पहचान की जानी चाहिए।
वर्तमान विवाद में दोनों पक्ष अपने-अपने दावे सामने रख रहे हैं। चुनाव आयोग ने SIR के बाद छूटे पात्र मतदाताओं को दोबारा शामिल करने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का फैसला भी किया है।
तेलंगाना में SIR पर आगे भी जारी रहेगी बहस
तेलंगाना में SIR को लेकर राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। BJP प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने इसे चुनाव आयोग की प्रक्रिया बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। वहीं AIMIM और अन्य विपक्षी दल मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया और उसके संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखना और मतदाता सूची को सही बनाए रखना है। चुनाव आयोग की ओर से छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए शुरू किया गया विशेष अभियान इसी चुनौती के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।










