कर्नाटक SIR: बल्लारी में 7,561 वोटरों के नाम हटाने की मांग, BJP BLA के खिलाफ FIR

कर्नाटक के बल्लारी में SIR प्रक्रिया के दौरान 7,561 मतदाताओ के नाम हटाने की मांग को लेकर BJP से जुड़े बूथ एजेंट के खिलाफ FIR दर्ज हुई। कांग्रेस BLA की शिकायत

कर्नाटक के बल्लारी में SIR प्रक्रिया के दौरान 7,561 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग को लेकर BJP से जुड़े बूथ लेवल एजेंट के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। कांग्रेस BLA की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने BNS की धारा 353 लगाई है।

बल्लारी: कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान Form-7 के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। बल्लारी सिटी विधानसभा क्षेत्र में 7,561 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की मांग किए जाने के मामले में FIR दर्ज की गई है। आरोप एक BJP से जुड़े बूथ लेवल एजेंट पर लगा है।

मामले में 1 अक्टूबर को बल्लारी के ब्रूसपेट पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई। यह शिकायत कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंट (BLA) गौतम एस. की ओर से की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बल्लारी सिटी कॉरपोरेशन में विपक्ष के नेता और BJP BLA-1 टी. श्रीनिवास मोथकुर ने 7,561 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 353 के तहत मामला दर्ज किया है। यह धारा ऐसे बयानों से संबंधित है, जो सार्वजनिक उपद्रव या शरारत को बढ़ावा देने की स्थिति से जुड़ी है।

7,561 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग का आरोप

मामले के अनुसार, BJP से जुड़े बूथ लेवल एजेंट ने दावा किया कि 7,500 से अधिक मतदाता या तो अपने पते पर मौजूद नहीं थे या वहां से दूसरी जगह चले गए थे। इसी आधार पर कथित तौर पर पहले Form-7 के जरिए इन मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की गई। Form-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने के लिए आपत्ति या आवेदन दर्ज कराने के लिए किया जाता है।

हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने इन दावों को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद भी कथित तौर पर उन्हीं मतदाताओं के नामों को लेकर दोबारा आपत्तियां दर्ज कराते हुए उनके नामों के पुनरीक्षण की मांग की गई।

महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन 7,561 मतदाताओं के नामों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई, वे बल्लारी सिटी विधानसभा क्षेत्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल थे।

कांग्रेस BLA की शिकायत के बाद FIR

मामले में कांग्रेस के BLA गौतम एस. ने पुलिस के सामने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर ब्रूसपेट पुलिस स्टेशन में 1 अक्टूबर को FIR दर्ज की गई। यह कर्नाटक में Form-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर दर्ज की गई छठी FIR बताई जा रही है।

शिकायत में कहा गया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नामों को हटाने की कोशिश की गई। पुलिस ने मामले में संबंधित दस्तावेजों और आरोपों के आधार पर जांच शुरू की है। FIR में टी. श्रीनिवास मोथकुर को आरोपी बनाया गया है। वे बल्लारी सिटी कॉरपोरेशन में विपक्ष के नेता होने के साथ-साथ BJP के BLA-1 भी हैं।

Form-7 क्या है?

मतदाता सूची से जुड़े मामलों में Form-7 एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसका इस्तेमाल किसी मतदाता के नाम को सूची से हटाने के लिए आपत्ति या आवेदन दर्ज कराने में किया जाता है।

किसी मतदाता के नाम को हटाने की मांग के पीछे मृत्यु, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना या मतदाता का उस पते पर मौजूद न होना जैसे कारण बताए जा सकते हैं। हालांकि, किसी नाम को हटाने से पहले चुनाव अधिकारियों की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियों की जांच की जाती है। बल्लारी के मामले में विवाद इस बात को लेकर है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नामों को लेकर एक साथ आपत्तियां दर्ज की गईं।

SIR के दौरान सामने आया मामला

यह मामला कर्नाटक में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान सामने आया है। SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा करना और उसमें मौजूद गलतियों या अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है।

इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम, पते और पात्रता से संबंधित विवरणों की जांच की जाती है। राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट भी मतदाता सूची की प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाते हैं और आपत्तियां या दावे संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकते हैं। बल्लारी मामले में आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई।

अधिकारियों ने पहले दावे स्वीकार नहीं किए

मामले की शिकायत के अनुसार, BJP से जुड़े BLA ने 7,500 से अधिक मतदाताओं के बारे में दावा किया कि वे या तो अनुपस्थित हैं या अपने पुराने पते से दूसरी जगह चले गए हैं।

जब चुनाव अधिकारियों ने कथित तौर पर इन दावों को स्वीकार नहीं किया, तो बाद में उन्हीं नामों को लेकर दोबारा आपत्तियां दर्ज कराई गईं। इसमें मतदाताओं के नामों के पुनरीक्षण की मांग की गई।

शिकायतकर्ता ने इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज की।

कर्नाटक में Form-7 को लेकर छठी FIR

बल्लारी का मामला कर्नाटक में Form-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर दर्ज होने वाली छठी FIR है। इससे पहले भी राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान Form-7 के जरिए बड़ी संख्या में नाम हटाने की कोशिशों को लेकर विवाद सामने आए हैं।

Form-7 के इस्तेमाल का उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना है, लेकिन बड़ी संख्या में नामों को हटाने के आवेदन सामने आने पर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

BJP BLA पर क्या आरोप है?

FIR और शिकायत में आरोप है कि टी. श्रीनिवास मोथकुर ने 7,561 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की। शिकायत के मुताबिक, इन मतदाताओं को अनुपस्थित या दूसरी जगह स्थानांतरित बताया गया था। आरोप यह भी है कि प्रारंभिक दावे स्वीकार नहीं होने के बाद भी उन्हीं नामों को लेकर दोबारा आपत्तियां दाखिल की गईं।

हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। FIR में किसी व्यक्ति का आरोपी बनाया जाना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। संबंधित व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार है।

FIR में BNS की धारा 353

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 353 के तहत मामला दर्ज किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह प्रावधान ऐसे बयानों से जुड़ा है, जो सार्वजनिक शरारत या उपद्रव की स्थिति पैदा करने से संबंधित हैं।

अब पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों, Form-7 आवेदनों और मतदाता सूची से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि नाम हटाने के लिए दिए गए दावों का आधार क्या था और आवेदन किस प्रक्रिया के तहत किए गए थे।

मतदाता सूची की शुचिता का मुद्दा

मतदाता सूची किसी भी चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसमें पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत हटाना चुनाव प्रबंधन का हिस्सा है।

साथ ही, किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हट न जाए, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी कारण मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान दावों और आपत्तियों की जांच के लिए प्रक्रिया निर्धारित की जाती है। बल्लारी में सामने आया विवाद इसी व्यापक मुद्दे से जुड़ा है।

राजनीतिक दलों की भूमिका

मतदाता सूची के पुनरीक्षण में राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों की भी भूमिका होती है। वे मतदाता सूची की जांच कर सकते हैं और नामों से संबंधित दावे या आपत्तियां चुनाव अधिकारियों के समक्ष रख सकते हैं।

लेकिन किसी भी आपत्ति या नाम हटाने के अनुरोध पर अंतिम निर्णय निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारियों द्वारा किया जाता है।
बल्लारी के मामले में पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि 7,561 नामों को लेकर की गई आपत्तियों का आधार क्या था और पूरी प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी।

जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल FIR दर्ज होने के बाद मामला पुलिस जांच के चरण में है। आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड की जांच आवश्यक होगी।
पुलिस Form-7 आवेदन, चुनाव अधिकारियों के रिकॉर्ड और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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