हिमाचल में प्लास्टिक मुक्त गांवों को मिलेगा इनाम, पंचायतों को प्रदर्शन के आधार पर प्रोत्साहन राशि

हिमाचल की प्लास्टिक मुक्त गांव योजना में पंचायतों के प्रदर्शन का आकलन होगा। बेहतर पंचायतों को पुरस्कार मिलेगा और प्लास्टिक 75 रुपये प्रति किलो खरीदा जाएगा।

हिमाचल सरकार ने गांवों में प्लास्टिक कचरे पर रोक लगाने के लिए प्लास्टिक मुक्त गांव योजना शुरू की है। बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को पुरस्कार और प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि पात्र प्लास्टिक कचरा 75 रुपये प्रति किलो खरीदा जाएगा।

शिमला: हिमाचल प्रदेश में प्लास्टिक कचरे से निपटने के लिए अब ग्रामीण क्षेत्रों पर भी विशेष फोकस किया जाएगा। पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने प्लास्टिक मुक्त गांव योजना तैयार की है। इसके तहत पंचायतों को प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन, नियमित संग्रह, छंटाई और सुरक्षित निस्तारण जैसे मानकों पर परखा जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले गांवों को पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन पर पंचायतों की होगी निगरानी

हिमाचल प्रदेश में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने अब शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी अभियान तेज करने की तैयारी की है। प्रस्तावित प्लास्टिक मुक्त गांव योजना के तहत पंचायतों को केवल सफाई व्यवस्था के आधार पर नहीं, बल्कि प्लास्टिक कचरे के प्रभावी प्रबंधन के ठोस मानकों पर परखा जाएगा।

योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में प्लास्टिक कचरे को खुले में फेंकने और जलाने से रोकना है। इसके अलावा प्लास्टिक को नालियों, खड्डों, नदियों और अन्य जलस्रोतों तक पहुंचने से रोकने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

पहाड़ी क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे की समस्या गंभीर मानी जाती है, क्योंकि यहां प्लास्टिक लंबे समय तक नष्ट नहीं होता। इसके जंगलों, जलस्रोतों और नदी-नालों तक पहुंचने से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

इन मानकों पर होगा गांवों का आकलन

प्लास्टिक मुक्त गांव योजना के तहत पंचायतों के प्रदर्शन का आकलन कई स्तरों पर किया जाएगा। इसमें प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक, घरों से कचरे का संग्रह और स्रोत पर ही उसकी छंटाई जैसे मानक शामिल होंगे।

इसके साथ ही प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित भंडारण और परिवहन की व्यवस्था भी देखी जाएगी। सार्वजनिक स्थानों, जलस्रोतों और गांव के आसपास के क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे की स्थिति की निगरानी की जाएगी।

प्लास्टिक को खुले में फेंकने या जलाने पर रोक लगाने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सामुदायिक भागीदारी को भी महत्वपूर्ण मानक बनाया गया है। लगातार निगरानी और समीक्षा के जरिए पंचायतों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।

बेहतर काम करने वाली पंचायतों और गांवों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार देने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि, पुरस्कार की अलग-अलग श्रेणियों में कितनी राशि दी जाएगी, इसे अभी आधिकारिक रूप से तय और घोषित नहीं किया गया है।

75 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जा रहा प्लास्टिक

सरकार प्लास्टिक कचरे को आर्थिक मूल्य देने के लिए बाय-बैक नीति भी चला रही है। शिमला नगर निगम के पायलट प्रोजेक्ट में पात्र प्लास्टिक कचरे की खरीद 75 रुपये प्रति किलो की दर से की जा रही है।

सरकार अब इस व्यवस्था को ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना बना रही है। कुछ क्षेत्रों में इसे चलाया भी जा रहा है। एकत्र किए गए प्लास्टिक को उचित उपयोग के लिए भेजा जाएगा। इसके संभावित उपयोगों में सड़क निर्माण में बिटुमिन के साथ प्रोसेस्ड प्लास्टिक का इस्तेमाल भी शामिल है।

हिमाचल में 3,758 पंचायतें और 20,690 गांव

हिमाचल प्रदेश में कुल 3,758 पंचायतें हैं, जिनके अंतर्गत 20,690 गांव आते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 15,201 गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन और 15,965 गांवों में तरल कचरा प्रबंधन चालू होने का दावा किया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कचरे की छंटाई के लिए 774 सेग्रीगेशन शेड यानी पृथक्करण शेड बनाए गए हैं। इसके अलावा प्रदेश में करीब 55 प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट संचालित हैं।

पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक डॉ. पुष्पेंद्र राणा के अनुसार, हिमाचल को प्लास्टिक और कचरा मुक्त बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में फैल रहे कचरे को रोकने के लिए प्लास्टिक मुक्त गांव योजना शुरू की जा रही है और निगरानी व समीक्षा व्यवस्था को भी सख्त किया गया है।

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