होलाष्टक 2026 में धार्मिक मान्यता के अनुसार महत्वपूर्ण और मांगलिक कार्यों से परहेज करना चाहिए। कथावाचक डॉ. शिवम साधक महाराज के अनुसार इस दौरान शादी-विवाह, नए वाहन खरीदना, घर या निर्माण से जुड़े निर्णय टालने चाहिए। इसके बजाय साधना, पूजा और मानसिक स्थिरता पर ध्यान देना शुभ माना जाता है। यह समय संयम और आंतरिक ऊर्जा को संतुलित करने का अवसर है।
Holashtak 2026 Guidelines: 24 फरवरी से शुरू हो रहे होलाष्टक के दौरान कथावाचक डॉ. शिवम साधक महाराज का कहना है कि किसी भी नए विवाह, वाहन खरीद, निर्माण या बड़े वित्तीय निवेश से बचना चाहिए। इस समय को होली से आठ दिन पहले माना जाता है और इसका उद्देश्य लोगों को संयम, मानसिक शांति और आंतरिक ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करना है। धार्मिक दृष्टि से यह अवधि शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती।
शादी-विवाह के मामलों में परहेज
डॉ. शिवम साधक महाराज बताते हैं कि होलाष्टक के दौरान शादी या विवाह से जुड़े किसी भी कार्य को करना वर्जित है। यदि परिवार में किसी बेटे या बेटी की शादी की तैयारी चल रही है, तो इस समय नए रिश्ता देखने या रिश्ता तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना अशुभ माना जाता है।
माना जाता है कि इस अवधि में शुरू किया गया विवाह स्थायित्व नहीं देता और भावी संबंधों में अनिश्चितता बनी रहती है। इसलिए परिवारों को धैर्य बनाए रखना चाहिए और विवाह संबंधी बड़े निर्णय होलाष्टक के समाप्त होने के बाद ही लेना उचित होता है।

नए वाहन और बड़े निवेश टालें
होलाष्टक में नए वाहन खरीदने या बड़े आर्थिक निवेश करने से बचना चाहिए। डॉ. शिवम साधक के अनुसार, वाहन खरीदना और अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय ऊर्जा के असंतुलन के कारण अशुभ साबित हो सकते हैं।
नए वाहन की खरीद, घर या संपत्ति से जुड़े सौदे, वित्तीय निवेश और अन्य बड़े खर्च इस अवधि में टाल देना ही श्रेष्ठ माना गया है। ऐसा करने से भविष्य में नुकसान या मनोवैज्ञानिक तनाव से बचा जा सकता है।
मकान और निर्माण कार्य में संयम
इस समय किसी नए घर का निर्माण शुरू करना या मकान संबंधी बड़े काम करना भी अशुभ है। यदि निर्माण कार्य पहले से चल रहा है, तो होलाष्टक के दौरान उसे रोक देना चाहिए।
कथावाचक के अनुसार, निर्माण कार्य या घर से जुड़ी नई गतिविधियों को इस अवधि में आगे बढ़ाना शुभ नहीं माना जाता। ऐसे कार्यों को स्थगित करने से न केवल धार्मिक दृष्टि से लाभ होता है, बल्कि परिवारिक और मानसिक संतुलन भी बना रहता है।
साधना और संयम पर ध्यान दें
होलाष्टक केवल वर्जित कार्यों की चेतावनी ही नहीं है, बल्कि यह समय आध्यात्मिक साधना और संयम अपनाने का अवसर भी प्रदान करता है। इस दौरान पूजा, ध्यान, भजन, जप और धार्मिक अनुष्ठान करने से ऊर्जा का संतुलन बना रहता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
डॉ. शिवम साधक महाराज का कहना है कि इस समय बड़े फैसले टालकर साधना और सकारात्मक कार्यों पर ध्यान देना ही परंपरा के अनुरूप है। यह समय स्वयं को नियंत्रित करने और आंतरिक ऊर्जा को स्थिर करने के लिए उपयुक्त माना जाता है।
होलाष्टक में बचाव के उपाय
- शादी और विवाह: किसी भी नए विवाह या रिश्ता तय करने से बचें। पुराने संबंधों में सुधार करना या परामर्श लेना सुरक्षित विकल्प है।
- नए वाहन और निवेश: नई कार, बाइक या वित्तीय निवेश इस समय टालें। पुराने निवेश पर ध्यान दें और बचत योजनाओं को प्राथमिकता दें।
- निर्माण और संपत्ति: नए मकान या निर्माण कार्य शुरू न करें। पहले से चल रहे कार्यों में धीमापन रखें।
- आध्यात्मिक साधना: भजन, पूजा, ध्यान और मंत्र जप के माध्यम से मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाएं।











