होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का बड़ा बयान: भारत सहित मित्र देशों के जहाजों पर रोक नहीं

ईरान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजो की आवाजाही जारी रहेगी। 10 हजार भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता है और चाबहार प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ईरान के राजदूत ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं है। ईरान में रह रहे 10 हजार भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता है और चाबहार रेलवे लाइन का 90% काम पूरा हो चुका है।

तेहरान; ईरान ने एक बार फिर साफ किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली ने कहा कि संघर्ष की स्थिति के बावजूद समुद्री व्यापार सामान्य रूप से जारी है और भारत सहित मित्र देशों के जहाज सुरक्षित तरीके से इस महत्वपूर्ण जलमार्ग का उपयोग कर सकते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल और गैस की सप्लाई होती है। ईरान ने स्पष्ट किया कि जो देश किसी सैन्य संघर्ष में शामिल नहीं हैं, उनके जहाजों को पूर्ण सुरक्षा दी जा रही है।

भारत-ईरान संबंधों पर जोर, 10 हजार भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता

ईरानी राजदूत ने यह भी कहा कि ईरान में रहने वाले लगभग 10,000 भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ईरान सभी विदेशी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करता है और किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता।

इसी बीच भारत और ईरान के बीच राजनयिक संवाद भी जारी है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की गई।

चाबहार पोर्ट और रेलवे प्रोजेक्ट में बड़ी प्रगति

फतहाली ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का भविष्य बताया। उन्होंने जानकारी दी कि चाबहार-जोहेदान रेलवे लाइन का लगभग 90% काम पूरा हो चुका है और जल्द ही यह परियोजना पूरी तरह से चालू हो सकती है।

चाबहार पोर्ट भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह परियोजना चीन के प्रभाव वाले व्यापार मार्गों के विकल्प के रूप में भी देखी जाती है।

पश्चिम एशिया तनाव और वैश्विक कूटनीति

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने पिछले कुछ महीनों में क्षेत्रीय सैन्य अभियानों पर भारी खर्च किया है, जबकि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी कार्रवाइयों को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि किसी भी परमाणु समझौते की शर्त ईरान का परमाणु हथियार कार्यक्रम पूरी तरह समाप्त करना होगा।

क्षेत्रीय सुरक्षा और बढ़ते सैन्य तनाव

लेबनान, इजराइल और गाजा क्षेत्र में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हिजबुल्लाह और इजराइली सेना के बीच झड़पों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। वहीं कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान, इराक और लेबनान जैसे क्षेत्रों से यात्रा या निकासी की सलाह दी है।

इजराइल के रक्षा मंत्रालय ने भी बड़े पैमाने पर सैन्य उपकरणों की आपूर्ति की पुष्टि की है, जिससे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और तेज हो गई हैं।

कूटनीति और स्थिरता की कोशिशें जारी

इन तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, कई अंतरराष्ट्रीय प्रयास शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए जारी हैं। अमेरिका ने इजराइल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत की वकालत की है, ताकि क्षेत्रीय संघर्ष को कम किया जा सके।

ईरान का दावा है कि वह अपने रणनीतिक हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करता रहेगा, लेकिन साथ ही क्षेत्रीय सहयोग और व्यापारिक मार्गों को बाधित नहीं करेगा।

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