BRS नेता हरीश राव ने हैदराबाद के रायडुर्ग में 10.63 एकड़ विवादित हेरिटेज भूमि की प्रस्तावित नीलामी रोकने की मांग की। उन्होंने SBI और वक्फ अधिकारों से जुड़े कानूनी विवाद का हवाला देते हुए जमीन का स्वामित्व स्पष्ट होने तक नीलामी रोकने को कहा।
हैदराबाद: तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति यानी BRS ने हैदराबाद के प्रमुख रायडुर्ग इलाके में स्थित 10.63 एकड़ विवादित हेरिटेज भूमि की प्रस्तावित नीलामी का विरोध किया है। BRS के वरिष्ठ नेता और तेलंगाना विधानसभा में उपनेता टी. हरीश राव ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर नीलामी प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि जमीन के स्वामित्व को लेकर पहले से कानूनी विवाद चल रहा है और ऐसे में नीलामी होने से तीसरे पक्ष के अधिकार पैदा हो सकते हैं, जिन्हें बाद में खत्म करना मुश्किल होगा।
हरीश राव के मुताबिक, तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन यानी TGIIC की ओर से रायडुर्ग पनमक्था गांव में करीब 10.63 एकड़ जमीन की नीलामी 17 और 21 अगस्त को प्रस्तावित है। उन्होंने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जमीन के स्वामित्व और कानूनी स्थिति को लेकर विवाद अदालत में लंबित है, तब किसी भी तरह की बिक्री, हस्तांतरण, पंजीकरण या विकास गतिविधि को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
विवादित जमीन के स्वामित्व पर उठे सवाल
हरीश राव ने अपने पत्र में कहा कि सर्वे नंबर 83 की जमीन को हेरिटेज साइट घोषित किया गया है। इसी जमीन के स्वामित्व को लेकर भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI और वक्फ अधिकारों से संबंधित दावे सामने आए हैं। इन दावों पर कानूनी स्तर पर विचार चल रहा है।
BRS नेता ने सुप्रीम कोर्ट के उस रुख का भी हवाला दिया, जिसमें विवादित संपत्ति के मामले में तीसरे पक्ष के हित पैदा होने से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। उनका कहना है कि जब किसी संपत्ति का स्वामित्व अदालत के समक्ष विचाराधीन हो, तब उसके हस्तांतरण या नीलामी से स्थिति और जटिल हो सकती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि जमीन का कानूनी स्वामित्व पूरी तरह स्पष्ट होने तक नीलामी की प्रक्रिया को रोक दिया जाए। उनके मुताबिक, इससे न केवल संभावित कानूनी विवादों से बचा जा सकेगा, बल्कि कथित हेरिटेज भूमि को भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
पहले भी 6.2 एकड़ जमीन की नीलामी का मुद्दा
हरीश राव ने अपने पत्र में पहले हुई जमीन की नीलामी का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इसी सर्वे नंबर से जुड़ी करीब 6.2 एकड़ जमीन पहले लगभग 237 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर से नीलाम की गई थी।
बाद में SBI ने इस जमीन पर अपने स्वामित्व अधिकार का दावा किया। यह मामला फिलहाल तेलंगाना हाई कोर्ट में लंबित बताया गया है। BRS नेता ने कहा कि जब पहले से नीलाम की गई जमीन के स्वामित्व को लेकर मामला अदालत में विचाराधीन है, तब उसी सर्वे नंबर की अतिरिक्त 10.63 एकड़ भूमि को दो अलग-अलग भूखंडों में नीलाम करना गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रस्तावित नीलामी के लिए 10.63 एकड़ जमीन को 5.25 और 5.38 एकड़ के दो प्लॉट में बांटा गया है। हरीश राव ने कहा कि ऐसे समय में नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाना प्रशासनिक सावधानी, उचित जांच और संपत्ति के शीर्षक की पुष्टि को लेकर सवाल पैदा करता है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर लगाए राजनीतिक आरोप
हरीश राव ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर राजनीतिक हमला भी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष में रहते हुए रेवंत रेड्डी ने सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर मुखर रुख अपनाया था, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार की नीतियां अलग दिखाई दे रही हैं।
BRS नेता ने आरोप लगाया कि राज्य के कई महत्वपूर्ण स्थानों की जमीनों को लेकर बिक्री और नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने गाचीबोवली, लगाचार्ला, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी क्षेत्र और रायडुर्ग का उल्लेख करते हुए कहा कि तेलंगाना की मूल्यवान सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी की पर्यावरणीय भूमि और रायडुर्ग की कथित हेरिटेज रॉक लैंड को लेकर भी चिंता जताई। हालांकि, ये आरोप BRS नेता की राजनीतिक टिप्पणी हैं और सरकार का पक्ष इस खबर में उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है।
2020 के अदालती रुख का भी दिया हवाला
हरीश राव ने दावा किया कि वर्ष 2020 में रेवंत रेड्डी ने खुद रायडुर्ग की इन जमीनों की सुरक्षा के लिए अदालत का रुख किया था। इसी संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि सत्ता में आने के बाद विवादित जमीन की नीलामी की अनुमति कैसे दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि संपत्ति पर स्वामित्व विवाद मौजूद है और मामला अदालत में विचाराधीन है, तो नीलामी से नए खरीदारों के अधिकार बन सकते हैं। भविष्य में यदि अदालत का फैसला मौजूदा स्वामित्व दावों से अलग होता है, तो ऐसी स्थिति में नए विवाद पैदा होने की आशंका रहेगी।
BRS नेता ने इसी आधार पर नीलामी रोकने और जमीन के स्वामित्व की पूरी कानूनी जांच कराने की मांग की है।
बिक्री और विकास गतिविधियों पर रोक की मांग
हरीश राव ने मुख्यमंत्री से केवल प्रस्तावित नीलामी रोकने की मांग नहीं की, बल्कि विवादित जमीन पर बिक्री, हस्तांतरण, पंजीकरण और विकास संबंधी किसी भी गतिविधि को रोकने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि जब तक अदालत या सक्षम कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से जमीन का वास्तविक स्वामित्व तय नहीं हो जाता, तब तक किसी भी तरह का नया अधिकार पैदा करना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, एक बार तीसरे पक्ष के अधिकार बनने के बाद विवाद को सुलझाना अधिक मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने सरकार से जमीन से संबंधित सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की भी मांग की। इसके साथ ही उन्होंने कथित तौर पर गायब, गलत जगह रखे गए या छेड़छाड़ किए गए हेरिटेज संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की अपील की है।
वक्फ रिकॉर्ड को लेकर भी जांच की मांग
BRS नेता ने कथित तौर पर गायब या गलत तरीके से रखे गए वक्फ रिकॉर्ड की भी स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी सरकारी या हेरिटेज संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो उनकी स्थिति की जांच होना जरूरी है।
हरीश राव ने पहले की 6.2 एकड़ जमीन की नीलामी की भी समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने SBI द्वारा किए गए स्वामित्व दावे और तेलंगाना हाई कोर्ट में लंबित मामले को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया की जांच की जरूरत बताई।
उनका कहना है कि विवादित संपत्ति से जुड़े सभी रिकॉर्ड, पुराने स्वामित्व दस्तावेज और प्रशासनिक फैसलों की निष्पक्ष समीक्षा से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
रायडुर्ग की जमीन क्यों है महत्वपूर्ण?
रायडुर्ग हैदराबाद के प्रमुख IT और कारोबारी क्षेत्रों में शामिल है। शहर के तेजी से विकसित हो रहे इस इलाके में जमीन का आर्थिक मूल्य काफी अधिक है। ऐसे में किसी भी बड़े भूखंड की नीलामी का वित्तीय और प्रशासनिक महत्व बढ़ जाता है।
इसी वजह से 10.63 एकड़ जमीन की प्रस्तावित नीलामी पर BRS का विरोध राजनीतिक बहस के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति और कानूनी स्वामित्व के सवाल से भी जुड़ गया है।
हरीश राव ने सरकार से आग्रह किया है कि जमीन की हेरिटेज स्थिति, स्वामित्व दावों और लंबित कानूनी मामलों को पूरी तरह स्पष्ट करने के बाद ही किसी तरह का फैसला लिया जाए।
अब सरकार के फैसले पर नजर
रायडुर्ग की 10.63 एकड़ विवादित जमीन की प्रस्तावित नीलामी को लेकर अब राज्य सरकार के अगले कदम पर नजर रहेगी। BRS ने स्पष्ट रूप से नीलामी रोकने की मांग की है और जमीन के स्वामित्व की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक किसी भी प्रकार की बिक्री या विकास गतिविधि पर रोक लगाने की अपील की है।
मामले में SBI के स्वामित्व दावे, वक्फ अधिकारों से जुड़े प्रश्न और पहले नीलाम की गई 6.2 एकड़ जमीन से संबंधित हाई कोर्ट की कार्यवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और सरकारी निर्णयों के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल हरीश राव की मांग ने हैदराबाद में सार्वजनिक और हेरिटेज भूमि की सुरक्षा, सरकारी संपत्तियों की नीलामी और विवादित जमीनों पर प्रशासनिक फैसलों को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।











