बिहार की श्वेता भारती ने 9 घंटे की प्राइवेट नौकरी के साथ UPSC की तैयारी की और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। इससे पहले वह दो बार BPSC परीक्षा भी पास कर चुकी थीं। उनकी सफलता अनुशासन और निरंतर मेहनत का उदाहरण है।
UPSC Success Story: बिहार की श्वेता भारती ने यह साबित किया कि सही रणनीति और समय प्रबंधन के दम पर नौकरी के साथ भी कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं पास की जा सकती हैं। दो बार BPSC में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने पहले ही प्रयास में UPSC क्रैक कर IAS बनने का सपना साकार किया।
दो बार BPSC में सफलता के बाद UPSC की ओर बढ़ाया कदम
बिहार की श्वेता भारती की सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो नौकरी के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। UPSC में सफलता मिलने से पहले उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा दो बार पास की। पहली बार 64वीं BPSC परीक्षा में चयन होने पर उन्हें सामाजिक सुरक्षा विभाग में उप-निदेशक का पद मिला, लेकिन उन्होंने इस नियुक्ति को स्वीकार नहीं किया क्योंकि उनका लक्ष्य इससे बड़ा था।

इसके बाद उन्होंने 65वीं BPSC परीक्षा भी उत्तीर्ण की और शिक्षा विभाग में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) के पद पर चयनित हुईं। इस बार उन्होंने पदभार संभाला, लेकिन साथ ही UPSC की तैयारी भी जारी रखी।
इंजीनियरिंग के बाद की प्राइवेट नौकरी
श्वेता भारती बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी छात्रा रहीं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा ईशान इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की।
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने आईटी कंपनी विप्रो में नौकरी शुरू की। नौकरी के दौरान रोजाना करीब 9 घंटे काम करने के बावजूद उन्होंने अपने UPSC के लक्ष्य से समझौता नहीं किया। ऑफिस के बाद नियमित रूप से पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया।
समय प्रबंधन बना सफलता की सबसे बड़ी कुंजी
श्वेता ने नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने के लिए सख्त टाइम मैनेजमेंट अपनाया। दिन में ऑफिस की जिम्मेदारियां निभाने के बाद वह रात में कई घंटे पढ़ाई करती थीं। उन्होंने हर विषय के लिए अलग अध्ययन योजना बनाई और नियमित रिवीजन को अपनी तैयारी का अहम हिस्सा रखा।
उनकी यही निरंतरता और अनुशासन उन्हें पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा में सफलता दिलाने में मददगार साबित हुआ। वर्ष 2021 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 356 हासिल की और IAS बनने का सपना पूरा किया।
सोशल मीडिया से बनाई दूरी
श्वेता भारती का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने तैयारी के दौरान सोशल मीडिया का इस्तेमाल लगभग बंद कर दिया था। इतना ही नहीं, उन्होंने WhatsApp ग्रुप्स से भी दूरी बना ली ताकि पढ़ाई के समय किसी तरह का व्यवधान न आए।
उनके अनुसार, सीमित संसाधनों से भी सफलता हासिल की जा सकती है, यदि उम्मीदवार अपने लक्ष्य पर लगातार फोकस बनाए रखे।
युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश
श्वेता भारती की कहानी यह बताती है कि सफलता केवल लंबे समय तक पढ़ाई करने से नहीं, बल्कि सही रणनीति, अनुशासन और निरंतर मेहनत से मिलती है। नौकरी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए उनकी यात्रा इस बात का उदाहरण है कि यदि समय का सही उपयोग किया जाए और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो पहली ही कोशिश में UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा भी पास की जा सकती है।













