ODI क्रिकेट को बचाने के लिए ICC की बड़ी योजना, खत्म हो सकती हैं ‘बिना उद्देश्य’ वाली द्विपक्षीय T20 सीरीज

ODI Cricket को बचाने और उसकी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए ICC बड़ी योजना बना रहा है। ‘बिना उद्देश्य’ वाली द्विपक्षीय T20 सीरीज को खत्म या सीमित करने पर विचार हो

टी20 क्रिकेट को शुरू हुए लगभग दो दशक होने वाले हैं और इस दौरान इसकी लोकप्रियता दुनियाभर में तेजी से बढ़ी है। इसी वजह से मौजूदा समय में लगभग हर बड़े क्रिकेट खेलने वाले देश में फ्रेंचाइजी आधारित टी20 लीग का आयोजन हो रहा है।

स्पोर्ट्स न्यूज़: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टी20 फॉर्मेट की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बीच वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) वनडे और टेस्ट जैसे पारंपरिक प्रारूपों को अधिक प्रासंगिक और आकर्षक बनाने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रही है। ICC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजोग गुप्ता ने संकेत दिया है कि भविष्य में बिना किसी स्पष्ट उद्देश्य या संदर्भ के आयोजित होने वाली द्विपक्षीय टी20 सीरीज का दौर कम हो सकता है।

उनका मानना है कि क्रिकेट कैलेंडर में हर सीरीज और मैच का एक स्पष्ट महत्व होना चाहिए। यदि अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों को बेहतर संदर्भ और उद्देश्य के साथ आयोजित किया जाए, तो वनडे क्रिकेट केवल अपने अस्तित्व की लड़ाई नहीं लड़ेगा, बल्कि मजबूत और लोकप्रिय प्रारूप के रूप में आगे बढ़ सकता है।

T20 की लोकप्रियता के बीच ODI क्रिकेट के सामने चुनौती

टी20 क्रिकेट की शुरुआत के बाद पिछले करीब दो दशकों में इस प्रारूप ने दुनियाभर में तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। आज लगभग हर प्रमुख क्रिकेट खेलने वाले देश में घरेलू या फ्रेंचाइजी टी20 लीग आयोजित की जाती है। तेज रफ्तार खेल, कम समय और मनोरंजन से भरपूर मुकाबलों ने टी20 को वैश्विक दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया है।

हालांकि, क्रिकेट के व्यस्त होते कैलेंडर का असर वनडे और टेस्ट क्रिकेट पर भी पड़ा है। कई देशों में द्विपक्षीय वनडे सीरीज को पहले जैसी दर्शक रुचि नहीं मिलती, जबकि खिलाड़ियों के लिए भी लगातार बढ़ते मैचों और लीग क्रिकेट के बीच सभी प्रारूपों को प्राथमिकता देना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसी कारण ICC अब यह विचार कर रहा है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों प्रारूपों को अलग-अलग स्पष्ट पहचान और महत्व दिया जाए।

‘हर सीरीज का होना चाहिए स्पष्ट उद्देश्य’

संजोग गुप्ता ने कहा कि बिना किसी उद्देश्य और संदर्भ के आयोजित होने वाली द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज का दौर समाप्त होना चाहिए। उनके अनुसार, केवल मैचों की संख्या बढ़ाने के बजाय यह जरूरी है कि प्रशंसकों और खिलाड़ियों को पता हो कि किसी सीरीज का महत्व क्या है और उसका व्यापक क्रिकेट संरचना से क्या संबंध है।

इस सोच का सीधा असर अनावश्यक या कम महत्व वाली टी20 सीरीज पर पड़ सकता है। ICC का उद्देश्य टी20 क्रिकेट को कम करना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में संतुलन बनाना हो सकता है, ताकि लगातार फ्रेंचाइजी और द्विपक्षीय टी20 मुकाबलों के बीच वनडे क्रिकेट अपनी प्रासंगिकता न खो दे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वनडे क्रिकेट की अपनी अलग और महत्वपूर्ण भूमिका है। विशेष रूप से पुरुष और महिला क्रिकेट विश्व कप के साथ इसका गहरा संबंध है। 50 ओवर का प्रारूप क्रिकेट में रणनीति, लंबी बल्लेबाजी, गेंदबाजी के अलग-अलग चरणों और मैच की बदलती परिस्थितियों का अनूठा संतुलन प्रस्तुत करता है।

ODI के लिए अलग विंडो बनाने पर विचार

ICC से जुड़े विचार-विमर्श में यह संभावना भी सामने आई है कि भविष्य में वनडे क्रिकेट के लिए टेस्ट क्रिकेट की तरह अधिक स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय विंडो बनाई जा सकती है। इसका उद्देश्य 50 ओवर के प्रारूप को प्रमुख वैश्विक टूर्नामेंटों और महत्वपूर्ण सीरीज से बेहतर तरीके से जोड़ना होगा। यदि ऐसी व्यवस्था लागू होती है, तो वनडे सीरीज को विश्व कप चक्र, क्वालिफिकेशन या अन्य सार्थक प्रतिस्पर्धी संदर्भों से जोड़ा जा सकता है। इससे दर्शकों की रुचि बढ़ाने और प्रत्येक मुकाबले को अधिक महत्वपूर्ण बनाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इस तरह की किसी योजना के लागू होने से पहले सदस्य देशों, प्रसारकों, खिलाड़ियों और घरेलू टी20 लीगों के व्यस्त कार्यक्रम के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी।

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