श्रीरंगम मंदिर की ₹50 करोड़ की भूमि धोखाधड़ी मामले में DMK नेता गिरफ्तार

श्रीरंगम मंदिर की ₹50 करोड़ की कथित भूमि धोखाधड़ी में DMK नेता एम. रामकुमार गिरफ्तार हुए। 7,515 वर्ग फुट जमीन और फर्जी दस्तावेजों की जांच जारी है।

श्रीरंगम मंदिर की कथित ₹50 करोड़ भूमि धोखाधड़ी मामले में DMK के क्षेत्र सचिव एम. रामकुमार गिरफ्तार हुए। पुलिस के अनुसार, 7,515 वर्ग फुट मंदिर भूमि को 2022 में कथित फर्जी दस्तावेजों से हस्तांतरित किया गया था। जांच जारी है।

चेन्नई: तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में श्रीरंगम श्री रंगनाथस्वामी मंदिर की कथित भूमि धोखाधड़ी के मामले में DMK के स्थानीय पदाधिकारी एम. रामकुमार को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, रामकुमार पर मंदिर की 7,515 वर्ग फुट भूमि को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपने नाम दर्ज कराने का आरोप है। इस जमीन का अनुमानित मूल्य करीब ₹50 करोड़ बताया गया है।

मदुरै जाते समय पुलिस ने किया गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक, रामकुमार DMK के श्रीरंगम क्षेत्र सचिव हैं। सिटी क्राइम ब्रांच (CCB) की विशेष टीम ने उन्हें 1 अक्टूबर को तिरुचि-मदुरै हाईवे पर पनजापुर के पास रोका और गिरफ्तार किया।

रामकुमार मदुरै जाने के लिए यात्रा कर रहे थे, जहां उन्हें अपनी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई में शामिल होना था। इसी दिन मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने मामले में तत्कालीन श्रीरंगम सब-रजिस्ट्रार जी. वनिता की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज की। वनिता भी इस मामले में आरोपियों में शामिल हैं।

7,515 वर्ग फुट मंदिर भूमि को लेकर मामला

पुलिस जांच का केंद्र श्रीरंगम मंदिर की 7,515 वर्ग फुट भूमि है। प्राथमिकी के अनुसार, यह भूखंड मंदिर की कुल 5.87 एकड़ की बड़ी संपत्ति का हिस्सा है।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि 2022 में इस भूमि को ऐसे दस्तावेजों के आधार पर पंजीकृत कराया गया, जिनकी वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर भूमि पर अधिकार होने का दावा करते हुए दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और संपत्ति का हस्तांतरण कराया।

रिपोर्टों के मुताबिक, विवादित भूखंड पर बाद में DMK से संबंधित एक कार्यालय का निर्माण किया गया और वहां पार्टी कार्यालय संचालित होने लगा।

13 सितंबर को दर्ज हुई थी प्राथमिकी

इस मामले में तिरुचि सिटी क्राइम ब्रांच ने 13 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज की थी। कार्रवाई श्रीरंगम मंदिर के संयुक्त आयुक्त एवं कार्यकारी अधिकारी एस. शिवरामकुमार की शिकायत के आधार पर शुरू हुई।

पुलिस ने रामकुमार के अलावा पांच अन्य लोगों को भी मामले में आरोपी बनाया है। इनमें चेन्नई की पद्मा रेंगराजन, बेंगलुरु की विजया कृष्णासामी, चेन्नई के आर. सुंदरराजन, आर. वेंकट वरदन और तत्कालीन श्रीरंगम सब-रजिस्ट्रार वनिता शामिल हैं।

आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। विभिन्न रिपोर्टों में प्राथमिकी में शामिल धाराओं को IPC तथा बाद की पुलिस जानकारी में BNS के तहत बताया गया है; इसलिए मामले की कानूनी स्थिति को अदालत और जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई के संदर्भ में देखा जाना है।

कथित भूमि सौदे में ₹2.90 करोड़ का उल्लेख

जांच से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, 2022 में विवादित भूमि के संबंध में हुए लेनदेन में कुल ₹2.90 करोड़ की राशि का उल्लेख प्राथमिकी में किया गया है। पुलिस का आरोप है कि भूमि पर अधिकार का दावा करने वाले लोगों ने इसे रामकुमार के पक्ष में हस्तांतरित किया।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, प्राथमिकी में तीन बिक्री लेनदेन का उल्लेख है, जिनकी कुल राशि ₹2.90 करोड़ बताई गई है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2022 में पद्मा रेंगराजन और विजया कृष्णासामी ने कथित तौर पर भूमि को ₹1.45 करोड़ में रामकुमार को बेचने का दावा किया था।

यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है कि भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य करीब ₹50 करोड़ बताया गया है, जबकि प्राथमिकी में संबंधित लेनदेन की राशि ₹2.90 करोड़ बताई गई है। दोनों आंकड़े अलग-अलग पहलुओं को दर्शाते हैं और इन्हें एक ही राशि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

रामकुमार ने आरोपों से किया इनकार

रामकुमार ने इससे पहले आरोपों से इनकार किया था। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, उन्होंने दावा किया कि संपत्ति निजी व्यक्तियों की थी और संबंधित लेनदेन कानूनी तरीके से किया गया था। उन्होंने भूमि खरीद से संबंधित अपने पक्ष को अदालत के समक्ष भी रखा था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रामकुमार की पत्नी एंडाल ने भी उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत बताया और कहा कि उन्हें झूठे मामले में गिरफ्तार किया गया है।

इन दावों और पुलिस के आरोपों के बीच अंतिम तथ्यात्मक स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

अदालत में आगे क्या हुआ?

रामकुमार ने पुलिस मामला दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत का रास्ता अपनाया था। हालांकि, 1 अक्टूबर को मदुरै पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया। UNI की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें 15 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

अदालत का अग्रिम जमानत याचिका खारिज करना मामले में आरोप सिद्ध होने के बराबर नहीं है। भूमि के स्वामित्व, दस्तावेजों की वैधता और कथित लेनदेन में संबंधित लोगों की भूमिका जैसे मुद्दों पर जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

मंदिर संपत्ति की सुरक्षा पर भी सवाल

श्रीरंगम श्री रंगनाथस्वामी मंदिर तमिलनाडु के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और मंदिर से जुड़ी भूमि एवं संपत्तियों का प्रशासन राज्य के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (HR&CE) के दायरे में आता है।

इस मामले ने मंदिर संपत्तियों के रिकॉर्ड, भूमि पंजीकरण प्रक्रिया और पुराने दस्तावेजों की जांच से जुड़े सवालों को भी सामने ला दिया है। जांच एजेंसियों को यह निर्धारित करना होगा कि कथित दस्तावेज कैसे तैयार हुए, भूमि का पंजीकरण किस प्रक्रिया के तहत हुआ और इस पूरी प्रक्रिया में अलग-अलग आरोपियों की क्या भूमिका थी।

जांच जारी, कई सवालों के जवाब बाकी

तिरुचि सिटी क्राइम ब्रांच की जांच अभी जारी है। पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और कथित फर्जी दस्तावेजों तथा भूमि हस्तांतरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

फिलहाल, एम. रामकुमार की गिरफ्तारी मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, लेकिन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी। विवादित 7,515 वर्ग फुट भूमि का स्वामित्व, कथित दस्तावेजों की वैधता और ₹2.90 करोड़ के लेनदेन से जुड़े तथ्य आगे की जांच के प्रमुख बिंदु बने हुए हैं।

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