केरल की UDF सरकार में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, Adoor Prakash ने CM Satheesan के कामकाज पर उठाए सवाल

केरल की UDF सरकार में अंदरूनी मतभेद सार्वजनिक हुए हैं। UDF संयोजक अडूर प्रकाश ने CM सतीशन पर महत्वपूर्ण फैसलों में गठबंधन से पर्याप्त परामर्श नहीं करने का आरोप

केरल की UDF सरकार में अंदरूनी मतभेद सार्वजनिक हुए हैं। UDF संयोजक अडूर प्रकाश ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन पर महत्वपूर्ण फैसलों में गठबंधन से पर्याप्त परामर्श नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने मामले को AICC के सामने रखने की बात कही है।

तिरुवंतपुरम: केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार के गठन के करीब चार महीने बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं। UDF संयोजक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अडूर प्रकाश ने मुख्यमंत्री तथा UDF अध्यक्ष वी. डी. सतीशन के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा है कि गठबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों में पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं हुआ।

प्रकाश की सार्वजनिक नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब सरकार के कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच समन्वय पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, सतीशन के समर्थक नेताओं ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि सरकार के फैसले उचित विचार-विमर्श के बाद लिए जा रहे हैं।

अडूर प्रकाश ने क्या कहा?

अडूर प्रकाश ने आरोप लगाया कि UDF के भीतर महत्वपूर्ण मुद्दों पर नियमित चर्चा नहीं हो रही है और कई सरकारी फैसलों की जानकारी उन्हें मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से मिलती है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के अध्यक्ष के तौर पर मुख्यमंत्री को UDF की बैठक बुलाने की पहल करनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

प्रकाश ने यह भी कहा कि वह अपनी नाराजगी कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व यानी ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के सामने रखेंगे। 2 अक्टूबर को उन्होंने कहा कि वह अगले दो-तीन दिनों में पार्टी नेतृत्व को अपनी चिंताओं से अवगत कराएंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति किसी खास नियुक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर है। उनके अनुसार, ऐसे विषय जिन पर गठबंधन के स्तर पर सामूहिक चर्चा जरूरी है, उन्हें उसी प्रक्रिया के तहत तय किया जाना चाहिए।

किन नियुक्तियों को लेकर विवाद बढ़ा?

मतभेद का तत्काल कारण 30 सितंबर को राज्य मंत्रिमंडल द्वारा की गई दो नियुक्तियां बनीं। मंत्रिमंडल ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता और पूर्व मंत्री एम. के. मुनीर को प्रशासनिक सुधार आयोग (Administrative Reforms Commission) का अध्यक्ष नियुक्त किया। इसके अलावा फॉरवर्ड ब्लॉक के राष्ट्रीय महासचिव जी. देवराजन को नई दिल्ली में केरल सरकार का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। दोनों पदों को कैबिनेट रैंक दिया गया।

प्रकाश ने मुनीर और देवराजन की योग्यता या नियुक्ति का व्यक्तिगत रूप से विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा कि दोनों व्यक्ति इन पदों के योग्य हैं, लेकिन UDF संयोजक होने के नाते उन्हें इन फैसलों के बारे में पहले जानकारी दी जानी चाहिए थी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इन नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस के भीतर यह सवाल भी उठा कि फैसले किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत लिए गए। हालांकि, मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं ने कहा कि इन मुद्दों पर पहले चर्चा हो चुकी थी और निर्णय को अचानक लिया गया फैसला बताना उचित नहीं है।

UDF की बैठकें नहीं होने का मुद्दा

अडूर प्रकाश ने UDF की बैठकों में देरी को भी प्रमुख मुद्दा बनाया है। उनके मुताबिक नई सरकार के सत्ता में आने के बाद UDF की बैठक केवल एक बार हुई है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के संयोजक के रूप में उनकी भूमिका प्रभावी ढंग से निभाने के लिए नियमित बैठक और सूचना साझा करने की व्यवस्था जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्यभर से पार्टी कार्यकर्ता और गठबंधन से जुड़े लोग सरकार के फैसलों के बारे में उनसे सवाल करते हैं, लेकिन जब उन्हें स्वयं कई निर्णयों की जानकारी मीडिया से मिलती है, तो उनके लिए उन सवालों का जवाब देना मुश्किल हो जाता है।

प्रकाश ने मुख्यमंत्री के साथ अपने मौजूदा संबंधों को भी सार्वजनिक रूप से चर्चा में लाया। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद हुई पहली और अब तक की एकमात्र UDF बैठक के बाद से उनकी मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत भी नहीं हुई है।

बोर्ड और निगमों में नियुक्तियों पर भी नाराजगी

UDF संयोजक ने राज्य के विभिन्न बोर्डों और निगमों में नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को सत्ता में आए चार महीने हो चुके हैं, लेकिन कई बोर्ड और निगम अभी भी पिछली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार द्वारा नियुक्त लोगों के नेतृत्व में हैं।

प्रकाश के अनुसार, इन पदों पर UDF से जुड़े लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष का भी उल्लेख किया।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बोर्ड और निगम राज्य प्रशासन तथा सार्वजनिक क्षेत्र की विभिन्न गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियुक्तियों में देरी को लेकर गठबंधन के भीतर समन्वय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सवाल उठना स्वाभाविक रूप से सरकार के लिए चुनौती बन सकता है।

मुख्यमंत्री के समर्थकों ने आरोपों का किया विरोध

अडूर प्रकाश के आरोपों पर मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन के करीबी नेताओं ने अलग रुख अपनाया है। उनका कहना है कि सरकार के महत्वपूर्ण फैसले बिना विचार-विमर्श के नहीं लिए गए हैं।

एक मुख्यमंत्री समर्थक नेता ने कहा कि मंत्रिमंडल में KPCC अध्यक्ष, दो कार्यकारी अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और यूथ कांग्रेस अध्यक्ष जैसे कांग्रेस संगठन से जुड़े प्रमुख नेता शामिल हैं। ऐसे में यह कहना कि पार्टी को पूरी तरह अंधेरे में रखा गया, सही नहीं है।

इसी पक्ष के अनुसार, IUML UDF का दूसरा सबसे बड़ा सहयोगी दल है और एम. के. मुनीर को प्रशासनिक सुधार आयोग का पद देने का मुद्दा पहले से गठबंधन स्तर पर चर्चा में था। मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं ने प्रकाश की आलोचना को सतीशन की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश के रूप में भी देखा है। यह उनका आकलन है, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं।

कांग्रेस के भीतर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने प्रकाश के आरोपों पर तत्काल सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के आंतरिक मामलों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करने के बजाय उन्हें पार्टी के भीतर ही उठाना बेहतर है।

दूसरी ओर, मंत्री के. मुरलीधरन ने मुख्यमंत्री का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार के फैसले उचित परामर्श के बाद लिए जाते हैं। उन्होंने एम. के. मुनीर की नियुक्ति को UDF का संयुक्त फैसला बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रत्येक कार्यकर्ता को असंतोष व्यक्त करने का अधिकार है और इस मामले पर अंतिम निर्णय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व कर सकता है।

मंत्री रोजी एम. जॉन ने भी इस मुद्दे पर विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा कि मुख्यमंत्री या AICC नेतृत्व इस मामले पर प्रतिक्रिया देगा।

सरकार के लिए राजनीतिक समन्वय की चुनौती

अडूर प्रकाश की सार्वजनिक आपत्ति ऐसे समय सामने आई है, जब UDF सरकार को सत्ता संभाले लगभग चार महीने हुए हैं। हालिया स्थानीय निकाय उपचुनावों में UDF के प्रदर्शन को लेकर भी गठबंधन के भीतर चर्चा हुई है। प्रकाश ने स्वयं कहा कि स्थानीय निकाय उपचुनावों में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन ने सरकार की छवि को प्रभावित किया है।

हालांकि, किसी उपचुनाव के परिणामों को पूरे राज्य की राजनीतिक स्थिति का निर्णायक संकेत मानना उचित नहीं होगा। स्थानीय चुनावों के परिणामों पर क्षेत्रीय समीकरण, उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे और अन्य कारक प्रभाव डाल सकते हैं।

इस बीच, कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक पुनर्गठन की मांग भी चर्चा में है। पार्टी के कुछ नेताओं का तर्क है कि KPCC अध्यक्ष सहित कई प्रमुख संगठनात्मक पदाधिकारी सरकार में मंत्री पद संभाल रहे हैं। इससे उनके पास संगठन के लिए पर्याप्त समय और राजनीतिक समन्वय की क्षमता प्रभावित हो सकती है। यह कांग्रेस के भीतर उठाई जा रही मांग और चिंता है, न कि सरकार की ओर से स्वीकार किया गया निष्कर्ष।

AICC के सामने मामला रखने की तैयारी

अडूर प्रकाश ने संकेत दिया है कि वह अपने सवालों को कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के सामने औपचारिक रूप से रखेंगे। 2 अक्टूबर को उन्होंने कहा कि वह अगले दो-तीन दिनों में AICC को अपनी चिंताओं से अवगत करा सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध मुख्यमंत्री के फैसलों के खिलाफ व्यक्तिगत अभियान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि उनका मुद्दा निर्णय लेने में UDF के स्तर पर पर्याप्त परामर्श का है।

फिलहाल, इस विवाद का अगला चरण कांग्रेस और UDF के भीतर होने वाली बैठकों तथा AICC नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। मुख्यमंत्री सतीशन के समर्थक जहां फैसलों में परामर्श होने की बात कह रहे हैं, वहीं प्रकाश गठबंधन संयोजक को पर्याप्त जानकारी और चर्चा में शामिल किए जाने की मांग कर रहे हैं। इस मतभेद का समाधान किस राजनीतिक और संगठनात्मक प्रक्रिया से होता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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