इमरान खान सरकार गिराने में अमेरिकी साजिश? नई रिपोर्ट से पाकिस्तान की राजनीति में फिर मचा भूचाल

रिपोर्ट में दावा किया गया कि पूर्व पाक प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार गिराने में अमेरिका और पाक सेना की भूमिका थी। रूस यात्रा के बाद वॉशिंगटन नाराज था।

एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इमरान खान की सरकार गिराने के पीछे अमेरिका और पाकिस्तानी सेना की भूमिका थी। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस यात्रा के बाद वॉशिंगटन नाराज था और इमरान को हटाने के लिए दबाव बनाया गया।

इस्लामाबाद/वाशिंगटन: Imran Khan की सरकार 2022 में कैसे गिरी, इस सवाल पर पाकिस्तान में लंबे समय से बहस चल रही है। अब एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने इस विवाद को फिर से हवा दे दी है। अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म Drop Site News की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इमरान खान की सत्ता सिर्फ संसदीय अविश्वास प्रस्ताव के कारण नहीं गई, बल्कि इसके पीछे अमेरिका और पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था की रणनीतिक भूमिका भी थी।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका इमरान खान की रूस नीति और यूक्रेन युद्ध पर पाकिस्तान के तटस्थ रुख से बेहद नाराज था। यही नाराजगी बाद में राजनीतिक घटनाक्रम में बदल गई और कुछ ही हफ्तों के भीतर पाकिस्तान की सत्ता बदल गई।

रूस यात्रा बनी विवाद की शुरुआत

फरवरी 2022 में Imran Khan मॉस्को पहुंचे थे, जहां उन्होंने Vladimir Putin से मुलाकात की। संयोग से उसी दिन रूस ने यूक्रेन पर सैन्य हमला शुरू कर दिया था। इस मुलाकात ने पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका को असहज कर दिया।

अमेरिका चाहता था कि पाकिस्तान रूस की आलोचना करे और पश्चिमी देशों के साथ खड़ा दिखाई दे। लेकिन इमरान खान सरकार ने यूक्रेन युद्ध पर तटस्थ नीति अपनाई। पाकिस्तान ने न तो रूस की खुलकर आलोचना की और न ही पश्चिमी प्रतिबंधों का समर्थन किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, यही वह मोड़ था जहां से अमेरिका और इमरान सरकार के बीच तनाव बढ़ने लगा।

इमरान हटे तो सब माफ” — कथित अमेरिकी संदेश

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 7 मार्च 2022 को वॉशिंगटन में पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत Asad Majeed Khan और अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी Donald Lu के बीच अहम बातचीत हुई।

बताया गया कि इस मुलाकात के दौरान डोनाल्ड लू ने कहा कि यदि इमरान खान अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से हट जाते हैं, तो अमेरिका पाकिस्तान के साथ संबंध सामान्य कर देगा। कथित तौर पर यह भी संकेत दिया गया कि इमरान के बने रहने पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ना पड़ सकता है।

इस बातचीत का विवरण बाद में एक राजनयिक दस्तावेज यानी “साइफर” के रूप में सामने आया, जिसने पाकिस्तान की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।

साइफर विवाद क्या है?

“साइफर” पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का एक गोपनीय राजनयिक संदेश था, जिसमें वॉशिंगटन में हुई बातचीत का उल्लेख किया गया था। Imran Khan ने मार्च 2022 में एक सार्वजनिक रैली में दावा किया था कि विदेशी ताकतें उनकी सरकार गिराने की साजिश रच रही हैं।

हालांकि उस समय विपक्ष और पाकिस्तानी सेना ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। लेकिन अब नई रिपोर्ट आने के बाद इमरान खान की पार्टी Pakistan Tehreek-e-Insaf ने कहा है कि साइफर मामले में उनके दावे सही साबित हो रहे हैं।

पार्टी नेता Salman Akram Raja ने कहा कि यह रिपोर्ट साबित करती है कि विदेशी दबाव वास्तविक था और सत्ता परिवर्तन में बाहरी ताकतों की भूमिका थी।

कैसे गिरी इमरान खान की सरकार

9 अप्रैल 2022 को पाकिस्तान की संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई और Imran Khan अपनी बहुमत सरकार खो बैठे। इसके अगले ही दिन Shehbaz Sharif पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री बने।

इमरान खान ने लगातार आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं बल्कि “रेजिम चेंज ऑपरेशन” था, जिसमें विदेशी ताकतों और पाकिस्तान के भीतर शक्तिशाली संस्थानों ने भूमिका निभाई।

पाकिस्तानी सेना की भूमिका पर भी सवाल

रिपोर्ट में पाकिस्तान की सेना की भूमिका को लेकर भी गंभीर संकेत दिए गए हैं। खासतौर पर पूर्व सेना प्रमुख Qamar Javed Bajwa और वर्तमान सेना प्रमुख Asim Munir के नाम चर्चा में आए हैं।

नवंबर 2022 में बाजवा के रिटायर होने के बाद आसिम मुनीर को सेना प्रमुख बनाया गया। इमरान खान ने आरोप लगाया था कि यह नियुक्ति राजनीतिक समझौते के तहत हुई थी। बाद के वर्षों में मुनीर की शक्ति लगातार बढ़ती गई।

रिपोर्ट के अनुसार, संवैधानिक बदलावों के बाद उन्हें फील्ड मार्शल और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज जैसे अतिरिक्त अधिकार भी मिले, जिससे पाकिस्तान की रक्षा व्यवस्था और परमाणु कमान पर उनकी पकड़ मजबूत हुई।

इमरान की गिरफ्तारी और राजनीतिक संकट

मई 2023 में Imran Khan को भ्रष्टाचार के एक मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट परिसर से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद पूरे पाकिस्तान में हिंसक प्रदर्शन हुए। कई सैन्य प्रतिष्ठानों और सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया।

इसके बाद सरकार ने पीटीआई के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की। पार्टी नेताओं को गिरफ्तार किया गया और कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ दी।

2024 के आम चुनावों से पहले पीटीआई का चुनाव चिन्ह “बैट” भी छीन लिया गया। इसके बावजूद पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों ने बड़ी संख्या में सीटें जीतीं। हालांकि बाद में Pakistan Muslim League-Nawaz और Pakistan Peoples Party ने गठबंधन बनाकर सरकार बना ली।

अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में आई नजदीकी

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इमरान खान के सत्ता से हटने के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार आया।

दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग बढ़ा। पाकिस्तान ने कई नए आर्थिक और सुरक्षा समझौते किए। अमेरिकी नेतृत्व ने भी पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व और नई सरकार की सार्वजनिक रूप से सराहना की।

विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की भू-राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत देता है, जहां अमेरिका चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।

जेल में हैं इमरान खान

Imran Khan अगस्त 2023 से जेल में हैं। उनके खिलाफ अब तक 180 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। अल-कादिर ट्रस्ट मामले में उन्हें 14 साल की सजा सुनाई गई थी, जबकि साइफर केस में भी उन्हें और पूर्व विदेश मंत्री Shah Mahmood Qureshi को सजा मिली थी। हालांकि बाद में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने साइफर मामले में राहत दे दी।

इसके बावजूद इमरान खान पाकिस्तान की राजनीति में अब भी एक बेहद प्रभावशाली नेता माने जाते हैं और उनकी पार्टी लगातार यह दावा कर रही है कि उनके खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की गई।

पाकिस्तान की राजनीति में फिर तेज हुई बहस

नई रिपोर्ट सामने आने के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। एक तरफ पीटीआई इसे अपने आरोपों की पुष्टि बता रही है, वहीं सरकार और सेना समर्थक वर्ग इन दावों को राजनीतिक प्रचार करार दे रहे हैं।

हालांकि यह मामला अब सिर्फ पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहा। इसमें अमेरिका, रूस, यूक्रेन युद्ध और दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी जुड़ गए हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह विवाद पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों और देश की घरेलू राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।

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