मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल त्रासदी ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल को तेज कर दिया है। शुक्रवार, 2 जनवरी को युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इंदौर नगर निगम मुख्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की लापरवाही और सत्तारूढ़ भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए गए।
Indore Contaminated Water: मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर सियासत और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। शुक्रवार, 2 जनवरी को युवा कांग्रेस ने नगर निगम मुख्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन 21 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिनमें 3 महिलाएं भी शामिल थीं।
भागीरथपुरा त्रासदी को लेकर बढ़ा आक्रोश
प्रदर्शनकारी युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि शहर के भागीरथपुरा इलाके में फैली दूषित पानी की त्रासदी प्रशासन की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाता, तो लोगों की जान नहीं जाती। उन्होंने प्रशासन और नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि इस त्रासदी में जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव से तत्काल इस्तीफा लेने की भी मांग की। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

घंटी बजाकर विरोध जताया
युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने साथ एक घंटी लेकर पहुंचे और इसे बजाकर दूषित पेयजल त्रासदी के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। चश्मदीदों के अनुसार, इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने घंटी छीन ली और उसे पास के एमजी रोड थाने ले गया। इस पर कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर घंटी जब्त करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
पुलिस उपायुक्त राजेश व्यास ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं का रवैया उग्र हो गया था। “सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर 21 लोगों को हिरासत में लिया गया,” उन्होंने कहा। पुलिस का यह कदम भीड़ और संभावित हिंसा से बचने के लिए उठाया गया।










