बांग्लादेश के रास्ते नॉर्थ ईस्ट पहुंचेगी भारतीय ट्रेन? भारत ने कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर बढ़ाई बातचीत

India Bangladesh Connectivity: भारत ने बांग्लादेश के रास्ते नॉर्थ ईस्ट तक रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने को लेकर बातचीत तेज की है। प्रस्तावित कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स

भारत ने बांग्लादेश में रेलवे लाइनों और सड़कों के निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम बंद नहीं किया है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि इन परियोजनाओं को लेकर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री तारीक रहमान के नेतृत्व वाली BNP सरकार के साथ लगातार बातचीत जारी है।

India-Bangladesh Connectivity: भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में सुधार के संकेतों के बीच सीमा-पार कनेक्टिविटी परियोजनाओं को फिर से गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है। भारत सरकार ने संसद में बताया है कि बांग्लादेश के साथ रेल और सड़क संपर्क से जुड़ी परियोजनाओं को लेकर बातचीत जारी है। इन योजनाओं का उद्देश्य भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक वैकल्पिक और अधिक सुविधाजनक परिवहन मार्ग विकसित करना है।

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद दोनों देशों के बीच कई परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई थी। अब बांग्लादेश में नई राजनीतिक व्यवस्था के साथ भारत कनेक्टिविटी, व्यापार और परिवहन से जुड़े मुद्दों पर फिर से बातचीत आगे बढ़ा रहा है।

संसद में भारत सरकार ने क्या कहा?

विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि भारत सरकार बांग्लादेश के साथ क्रॉस-बॉर्डर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के विकास पर बातचीत कर रही है। इन परियोजनाओं में सड़क और रेल संपर्क के साथ-साथ व्यापार को बढ़ावा देने वाले बुनियादी ढांचे पर भी चर्चा शामिल है। सरकार के अनुसार, बेहतर सीमा-पार संपर्क से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश के बीच आवाजाही आसान हो सकती है। इससे माल परिवहन का समय और लागत कम करने के साथ क्षेत्रीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

पूर्वोत्तर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बांग्लादेश रूट?

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का देश के बाकी हिस्सों से संपर्क मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के जरिए है। इसे अक्सर 'चिकन नेक' कहा जाता है। यह संकरा भू-भाग रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बांग्लादेश के रास्ते रेल और सड़क संपर्क मजबूत होता है, तो पूर्वोत्तर भारत के लिए परिवहन के अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं। इससे असम, त्रिपुरा, मेघालय और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों तक माल तथा यात्रियों की आवाजाही को फायदा मिल सकता है।

भारत और बांग्लादेश के बीच कनेक्टिविटी सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण अखौरा-अगरतला रेल लिंक है। करीब 12.24 किलोमीटर लंबे इस रेल सेक्शन का उद्घाटन नवंबर 2023 में किया गया था। इस रेल संपर्क का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि इसके जरिए भारत के पूर्वोत्तर हिस्से को बांग्लादेश के रेल नेटवर्क से जोड़ा गया। 

भविष्य में ऐसे संपर्कों के विस्तार से पूर्वोत्तर और भारत के अन्य हिस्सों के बीच परिवहन मार्गों को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। भारत लंबे समय से बांग्लादेश के जरिए पूर्वोत्तर को देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों और बंदरगाहों से जोड़ने की संभावनाओं पर काम करता रहा है।

खुलना-मोंगला रेल परियोजना भी अहम

भारत-बांग्लादेश सहयोग में खुलना-मोंगला रेल लाइन भी महत्वपूर्ण परियोजना है। इसका उद्देश्य बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह को रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ना है। इस तरह की परियोजनाएं केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं हैं। इनका व्यापक उद्देश्य भारत, बांग्लादेश और क्षेत्र के अन्य देशों के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करना है। बेहतर रेल नेटवर्क से सामान को बंदरगाहों तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।

रेल के साथ भारत सड़क संपर्क को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। नॉर्थ ईस्ट रोड नेटवर्क कनेक्टिविटी इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट के तहत पूर्वोत्तर भारत में कई सड़क मार्गों को बेहतर बनाने की योजनाएं शामिल हैं। इनमें मेघालय के शिलॉन्ग और दक्षिणी त्रिपुरा से बांग्लादेश सीमा की ओर जाने वाले मार्गों को अपग्रेड करने जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। बेहतर सड़क संपर्क से सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार, पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बंगाल की खाड़ी से जुड़ सकता है बड़ा व्यापारिक नेटवर्क

भारत की रणनीति केवल बांग्लादेश तक सीमित नहीं है। सड़क, रेल और बंदरगाहों के बीच बेहतर संपर्क के जरिए बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में एक व्यापक सप्लाई और ट्रेड नेटवर्क विकसित करने की संभावना है। बांग्लादेश का मातारबारी पोर्ट इस क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि प्रस्तावित और लंबित परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ता है, तो पूर्वोत्तर भारत के लिए समुद्री बंदरगाहों तक पहुंच के नए रास्ते खुल सकते हैं।

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