I.N.D.I.A. ब्लॉक अपनी एकजुटता बनाए रखने का रास्ता भीतर नहीं, बल्कि बाहरी मुद्दों में तलाशता नजर आ रहा है। BJP ने गठबंधन के कई दलों को अलग कर विपक्ष की ताकत को कमजोर किया है, जिससे दोनों सदनों में I.N.D.I.A. ब्लॉक का संख्या बल घटा है।
नई दिल्ली: भारत में विपक्षी दलों का INDIA ब्लॉक एक बार फिर आंतरिक मतभेदों और साझा राजनीतिक रणनीति की कमी को लेकर चर्चा में है। गठबंधन में शामिल दल कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख अपनाते रहे हैं, लेकिन हाल के छात्र आंदोलनों, पेपर लीक के विरोध और अन्य राजनीतिक अभियानों ने विपक्षी दलों को एक साझा मंच पर आने का अवसर भी दिया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े विवाद और अन्य मतभेद विपक्षी गठबंधन की एकता को और कमजोर करेंगे या साझा मुद्दे दलों के बीच दूरी कम करने में मदद करेंगे?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, INDIA ब्लॉक की सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल सत्ता पक्ष का विरोध करने से ज्यादा अपने घटक दलों को एक साझा रणनीति पर साथ रखना है। गठबंधन में शामिल कई दलों के बीच राज्यों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा है। यही कारण है कि राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट दिखाई देने के बावजूद अलग-अलग राज्यों में इन दलों की प्राथमिकताएं अक्सर अलग हो जाती हैं।
साझा मुद्दों ने विपक्ष को दिया एक मंच
20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और उसके बाद पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई को आयोजित ममता बनर्जी की रैली ने विपक्षी राजनीति में एक बार फिर साझा मुद्दों की भूमिका को सामने ला दिया। पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की कोशिश की। इन आंदोलनों ने INDIA ब्लॉक के सहयोगी दलों को एक साझा राजनीतिक एजेंडे पर साथ आने का अवसर दिया। हालांकि, यह एकजुटता कितनी स्थायी होगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
CJP को लेकर सहयोगियों के बीच मतभेद
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़ा घटनाक्रम विपक्षी दलों के बीच अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण का उदाहरण बनकर सामने आया है। शुरुआत में कांग्रेस सहित INDIA ब्लॉक के कई सहयोगी दलों ने इस नए राजनीतिक मंच का स्वागत किया था। लेकिन जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ CJP के प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस के एक वर्ग में संदेह पैदा हुआ।
वहीं, वामपंथी दलों और उनके छात्र संगठनों ने CJP के आंदोलन को समर्थन दिया। CPI(ML) Liberation से जुड़े कार्यकर्ताओं के अलावा AISA, AISF और SFI जैसे छात्र संगठनों की भागीदारी भी देखी गई। समाजवादी पार्टी और RJD की ओर से भी इस मुद्दे पर समर्थन के संकेत मिले। कांग्रेस के कुछ समर्थकों का हालांकि मानना है कि CJP के आंदोलन से राहुल गांधी के पेपर लीक विरोधी अभियान पर राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर विपक्षी खेमे के भीतर एक जैसी राय नहीं बन पाई।
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संसद में एकजुटता दिखाने की कोशिश
CJP विवाद के बावजूद संसद में विपक्षी दल कई मुद्दों पर साथ दिखाई दे रहे हैं। सोनम वांगचुक और राहुल गांधी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक नैरेटिव सामने आने के बाद भी विपक्षी दलों ने कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ साझा रुख अपनाया। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन को CJP से जुड़े राजनीतिक प्रभाव की काट के तौर पर देखने की कोशिश की है। हालांकि, AAP INDIA ब्लॉक से बाहर है, इसलिए विपक्षी गठबंधन की औपचारिक एकता के संदर्भ में उसकी भूमिका अलग है।
INDIA ब्लॉक की सबसे बड़ी समस्या क्या है?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, INDIA ब्लॉक की समस्या वैचारिक मतभेद से अधिक संगठनात्मक है। गठबंधन का कोई स्थायी केंद्रीय मुख्यालय या औपचारिक निर्णय लेने की मजबूत व्यवस्था नहीं है। सहयोगी दलों के बीच तत्काल संवाद और साझा रणनीति तैयार करने के लिए भी कोई स्पष्ट संस्थागत ढांचा नहीं है।
इसके अलावा, गठबंधन ने अब तक राष्ट्रीय स्तर पर कोई व्यापक साझा कार्यक्रम भी तैयार नहीं किया है। कई सहयोगी दल इसे मुख्य रूप से चुनावी गठबंधन के रूप में देखते हैं। ऐसे में चुनाव के बाहर किसी साझा राजनीतिक अभियान को लंबे समय तक जारी रखना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
परिसीमन बिल से होगी एकता की असली परीक्षा
आने वाले समय में परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव विपक्षी एकता की सबसे बड़ी परीक्षा बन सकता है। यदि संविधान संशोधन की आवश्यकता पड़ती है, तो संसद में दो-तिहाई बहुमत का सवाल महत्वपूर्ण हो जाएगा। विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार के सामने चुनौती खड़ी करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, INDIA ब्लॉक के घटक दलों के लिए केवल संसद में संख्या बल पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें एक साझा रणनीति, स्पष्ट राजनीतिक संदेश और बेहतर समन्वय की भी जरूरत होगी।









