India Dairy Industry: दुनिया का 25% दूध पैदा करता है भारत, फिर ग्लोबल एक्सपोर्ट में हिस्सेदारी 0.5% से भी कम क्यों?

India Dairy Industry: भारत दुनिया के करीब 25% दूध का उत्पादन करता है, फिर भी ग्लोबल डेयरी एक्सपोर्ट में उसकी हिस्सेदारी 0.5% से भी कम है। जानें इसके पीछे की

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला देश है, लेकिन वैश्विक डेयरी कारोबार में उसकी हिस्सेदारी अभी भी बेहद कम है। दुनिया के दूध एक्सपोर्ट का बाजार करीब 36 अरब डॉलर का है, जबकि अन्य डेयरी उत्पादों को शामिल करने पर यह बाजार लगभग 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाता है।

बिजनेस न्यूज़: भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और आने वाले वर्षों में भी उसकी स्थिति मजबूत रहने की उम्मीद है। इसके बावजूद वैश्विक डेयरी व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बेहद सीमित है। भारत दुनिया के कुल दूध उत्पादन का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है, लेकिन वैश्विक मिल्क एक्सपोर्ट में उसकी हिस्सेदारी आधे प्रतिशत से भी कम बताई जाती है। यही अंतर भारतीय डेयरी सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती और संभावित अवसर दोनों बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि Free Trade Agreements (FTA) यानी मुक्त व्यापार समझौतों का रणनीतिक इस्तेमाल करके भारत अपनी डेयरी इंडस्ट्री को वैश्विक बाजार के लिए तैयार कर सकता है। हालांकि, इसके लिए किसानों के हितों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।

लगातार बढ़ रहा भारत का दूध उत्पादन

भारत में दूध उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2020-21 में देश का कुल दुग्ध उत्पादन करीब 210 मिलियन टन था, जो 2024-25 में बढ़कर लगभग 248 मिलियन टन हो गया। देश में दूध की घरेलू मांग भी लगातार बनी हुई है। 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण भारत में प्रति व्यक्ति मासिक दूध खपत करीब 5.085 लीटर और शहरी क्षेत्रों में लगभग 5.686 लीटर रही।

इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय तुलना में भारत की प्रति व्यक्ति डेयरी खपत अभी कई विकसित देशों से पीछे है। उदाहरण के लिए डेनमार्क में प्रति व्यक्ति सालाना दूध खपत करीब 395.68 किलोग्राम बताई गई है।

2026 में भी उत्पादन बढ़ने का अनुमान

अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुमान के अनुसार भारत 2026 में दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। रिपोर्ट में गाय के दूध का उत्पादन 2025 के करीब 103.2 मिलियन टन से बढ़कर 2026 में लगभग 105.4 मिलियन टन पहुंचने का अनुमान है। देश में दूध देने वाली गायों की संख्या भी करीब 62.5 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। घरेलू स्तर पर तरल दूध की खपत 2026 में लगभग 93 मिलियन टन रहने की संभावना जताई गई है।

प्रोसेस्ड डेयरी उत्पादों में भी विस्तार की उम्मीद है। उदाहरण के तौर पर मक्खन उत्पादन 2026 में करीब 7.44 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जबकि घरेलू खपत लगभग 7.39 मिलियन टन रहने का अनुमान है।

ग्लोबल डेयरी ट्रेड में भारत कहां है?

भारत का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि उत्पादन में दुनिया में नंबर-1 होने के बावजूद निर्यात में वह प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल नहीं है। 2025 में वैश्विक मिल्क एक्सपोर्ट का मूल्य करीब 36.4 अरब डॉलर था। डॉलर मूल्य के आधार पर न्यूजीलैंड, नीदरलैंड, जर्मनी, बेल्जियम और अमेरिका दुनिया के प्रमुख दूध निर्यातकों में शामिल रहे। इन पांच देशों की संयुक्त हिस्सेदारी वैश्विक मिल्क एक्सपोर्ट में 53 प्रतिशत से अधिक थी।

भारत में उत्पादित दूध का बड़ा हिस्सा घरेलू बाजार में ही खप जाता है। यही कारण है कि विशाल उत्पादन क्षमता के बावजूद अंतरराष्ट्रीय डेयरी व्यापार में भारत की मौजूदगी सीमित बनी हुई है।

छोटे किसानों की वजह से चुनौती अलग

भारत का डेयरी मॉडल न्यूजीलैंड या कई विकसित देशों से काफी अलग है। यहां डेयरी उद्योग करीब 8 करोड़ छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से जुड़ा है। बड़ी संख्या में किसानों के पास कुछ ही पशु होते हैं। इस वजह से भारत के लिए डेयरी आयात को पूरी तरह खोलना सिर्फ व्यापार का मुद्दा नहीं है। इससे किसानों की आय, दूध की कीमतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ते आयात में अचानक बढ़ोतरी होने पर घरेलू दूध की कीमतों पर दबाव बन सकता है। इससे किसानों की आय प्रभावित होने के साथ लंबे समय में दूध उत्पादन को भी नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है।

FTA से कैसे बदल सकती है तस्वीर?

जानकारों के मुताबिक भारत को FTAs को सिर्फ आयात खोलने या बंद करने के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। इन समझौतों का इस्तेमाल भारतीय डेयरी उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए भी किया जा सकता है। इसके लिए पशुओं की उत्पादकता बढ़ाना सबसे अहम कदमों में से एक होगा। वैज्ञानिक ब्रीडिंग, बेहतर पशु पोषण, संतुलित फीड, मिनरल सप्लीमेंट, नियमित स्वास्थ्य जांच और बीमारी की रोकथाम जैसी व्यवस्थाओं पर निवेश बढ़ाना होगा।

इसके अलावा आधुनिक दूध संग्रह केंद्र, बेहतर कोल्ड-चेन, ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग प्लांट और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप परीक्षण व्यवस्था भी जरूरी होगी। भारत अगर प्रीमियम ग्लोबल डेयरी बाजार में जगह बनाना चाहता है तो केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। विदेशी बाजारों के लिए food safety, quality certification, residue monitoring और digital traceability जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करना होगा। इससे भारतीय डेयरी उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और कंपनियों के लिए नए बाजारों में प्रवेश आसान हो सकता है।

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