India Post की देरी का अनोखा मामला, 9 साल बाद मिला इंटरव्यू लेटर

उत्तराखंड के सुरेश चंद को लोकसभा सचिवालय का इंटरव्यू कॉल लेटर 9 साल देरी से मिला। 2017 का पत्र 2026 में पहुंचा, जिससे सरकारी नौकरी का मौका छूट गया।

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ निवासी सुरेश चंद को लोकसभा सचिवालय भर्ती का इंटरव्यू कॉल लेटर 9 साल की देरी से मिला। 2017 के इंटरव्यू के लिए भेजा गया पत्र 2026 में पहुंचा, जिससे वह सरकारी नौकरी का मौका गंवा बैठे। इस घटना ने डाक व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लोकसभा सचिवालय भर्ती कॉल लेटर देरी: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में रहने वाले सुरेश चंद को लोकसभा सचिवालय के श्रमिक पद के लिए भेजा गया इंटरव्यू कॉल लेटर 2026 में मिला, जबकि इंटरव्यू 19 फरवरी 2017 को होना था। उन्होंने 2016 में डाक के माध्यम से आवेदन किया था, लेकिन समय पर सूचना नहीं मिलने के कारण वह इंटरव्यू में शामिल नहीं हो सके। इस देरी की वजह से वह सरकारी नौकरी से वंचित रह गए, जिससे डाक वितरण प्रणाली और भर्ती प्रक्रिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

2016 की भर्ती, 2026 में पहुंचा कॉल लेटर

सुरेश चंद ने 2016 में लोकसभा सचिवालय में श्रमिक पद के लिए आवेदन किया था। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए जरूरी दस्तावेज और आवेदन डाक के माध्यम से भेजा था। इसके बाद लंबे समय तक उन्हें भर्ती से जुड़ी कोई सूचना नहीं मिली, जिससे उन्होंने उम्मीद छोड़ दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2026 में उनके पते पर सामान्य डाक से एक पत्र पहुंचा, जिसे खोलने पर पता चला कि यह लोकसभा सचिवालय की भर्ती का इंटरव्यू कॉल लेटर है। इस पत्र में उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था, लेकिन निर्धारित तिथि काफी पहले की थी।

India Post की देरी का अनोखा मामला, 9 साल बाद मिला इंटरव्यू लेटर

इंटरव्यू की तारीख 2017, सूचना मिली 2026 में

कॉल लेटर पर जारी होने की तारीख 27 जनवरी 2017 अंकित थी और इंटरव्यू के लिए 19 फरवरी 2017 को उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। यानी इंटरव्यू की तारीख बीत जाने के लगभग नौ साल बाद यह पत्र उम्मीदवार तक पहुंचा।

इस असामान्य देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर डाक वितरण प्रणाली और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इतनी लंबी देरी कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

सरकारी नौकरी का मौका गया

इस देरी के कारण सुरेश चंद सरकारी नौकरी पाने से वंचित रह गए। अगर उन्हें समय पर कॉल लेटर मिल जाता, तो वह इंटरव्यू में शामिल होकर नौकरी पाने का मौका हासिल कर सकते थे। वर्तमान में वह एक सरकारी विभाग में संविदा के आधार पर कार्यरत हैं।

सुरेश चंद का कहना है कि उन्हें भर्ती प्रक्रिया की कोई जानकारी समय पर नहीं मिली। अब जब कॉल लेटर मिला, तब तक इंटरव्यू और भर्ती प्रक्रिया समाप्त हो चुकी थी। इस घटना ने सरकारी भर्ती प्रणाली में सूचना पहुंचाने के तरीकों पर भी सवाल खड़े किए हैं।

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