भारतीय सेना की 26 पंजाब यूनिट ने युवाओं और छात्रों के बीच शारीरिक फिटनेस, अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष साइकिल अभियान शुरू किया है। अंबाला कैंट से शुरू हुआ यह अभियान हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों से होकर केलंग तक पहुंचा है। इसके बाद अभियान का अगला चरण जालंधर तक जारी रहेगा। इस पूरे अभियान के दौरान सेना के जवान करीब 1200 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करेंगे।
इस साइकिल अभियान का उद्देश्य केवल लंबी दूरी तय करना नहीं है, बल्कि रास्ते में आने वाले गांवों, कस्बों और शैक्षणिक संस्थानों के युवाओं से सीधे संवाद करना भी है। अभियान के दौरान सेना की टीम अलग-अलग स्थानों पर स्कूली विद्यार्थियों, एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस स्वयंसेवकों और स्थानीय युवाओं के साथ बातचीत कर रही है। इन संवाद कार्यक्रमों में युवाओं को फिटनेस के साथ अनुशासन, साहस और देशसेवा के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है।
सेना के जवानों ने हिमाचल प्रदेश के केलंग के अलावा पलचान, पंडोह और चौंतड़ा में भी विद्यार्थियों और युवाओं के साथ संवाद किया। टीम लीडर कैप्टन अनीश एम और डिप्टी टीम लीडर सूबेदार कुलवंत मान के नेतृत्व में जवानों ने इन स्थानों पर युवाओं से मुलाकात की। बातचीत के दौरान भारतीय सेना की कार्यप्रणाली, सैनिक जीवन में अनुशासन, शारीरिक क्षमता और राष्ट्रसेवा से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
युवाओं के साथ आयोजित इन कार्यक्रमों में सेना में करियर को लेकर भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को सेना में शामिल होने के लिए जरूरी पात्रता, चयन प्रक्रिया और अलग-अलग प्रवेश योजनाओं के बारे में बताया गया। जवानों ने अपने अनुभव भी विद्यार्थियों के साथ साझा किए, ताकि युवा सेना में करियर बनाने के अवसरों और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझ सकें। इस दौरान युवाओं को देश सेवा के लिए आगे आने का संदेश भी दिया गया।
संवाद कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रश्नोत्तर सत्र भी रहा। इसमें विद्यार्थियों ने सेना में भर्ती, चयन प्रक्रिया और करियर से जुड़े सवाल पूछे। सेना के जवानों ने छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए उन्हें उपलब्ध अवसरों और जरूरी तैयारियों के बारे में जानकारी दी। सक्रिय रूप से हिस्सा लेने और सही जवाब देने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन के तौर पर उपहार भी दिए गए। इससे कार्यक्रम में छात्रों की भागीदारी और बढ़ी।
सेना की इस साइकिल यात्रा में हिमाचल के कठिन पहाड़ी रास्ते भी अभियान का हिस्सा हैं। अंबाला कैंट से निकलने के बाद जवानों ने मैदानी इलाकों से होते हुए हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में साइकिल चलाई। केलंग तक पहुंचने के दौरान उन्हें अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। करीब 1200 किलोमीटर की पूरी दूरी तय करने के लिए जवानों को लगातार शारीरिक क्षमता, धैर्य और अनुशासन बनाए रखना होगा।
अभियान के दौरान सेना की ओर से युवाओं को फिटनेस को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया गया। जवानों ने बताया कि शारीरिक रूप से सक्रिय रहना केवल खेल या सेना भर्ती के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए भी महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को नियमित व्यायाम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया गया।
हिमाचल के शैक्षणिक संस्थानों में हुए संवाद कार्यक्रमों में एनसीसी और एनएसएस से जुड़े विद्यार्थियों ने भी हिस्सा लिया। सेना के जवानों के साथ बातचीत के दौरान विद्यार्थियों को सैनिक जीवन को करीब से समझने का अवसर मिला। सेना में भर्ती से संबंधित सवालों के जवाब मिलने से उन छात्रों को भी जानकारी मिली जो भविष्य में रक्षा सेवाओं में करियर बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
अभियान का एक अन्य पहलू सेना और स्थानीय समुदाय के बीच संपर्क बढ़ाना भी है। साइकिल पर लंबी दूरी तय कर रहे जवान रास्ते में स्थानीय लोगों और युवाओं से मिल रहे हैं। इससे सेना के जवानों को स्थानीय समुदाय से संवाद का अवसर मिल रहा है और युवाओं को भी सैनिकों के अनुभवों को सीधे सुनने का मौका मिल रहा है। केलंग और अन्य स्थानों पर हुए कार्यक्रमों में स्थानीय युवाओं और विद्यार्थियों ने सेना की टीम के साथ बातचीत की।
करीब 1200 किलोमीटर लंबी यह यात्रा अंबाला कैंट से शुरू होकर हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्र केलंग तक पहुंची है और वहां से जालंधर की ओर आगे बढ़ेगी। अभियान के दौरान जवान न सिर्फ साइकिलिंग की चुनौती को पूरा कर रहे हैं, बल्कि रास्ते में युवाओं के बीच फिटनेस और राष्ट्रसेवा का संदेश भी पहुंचा रहे हैं। सेना के मुताबिक, इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को शारीरिक रूप से सक्रिय रहने और अनुशासन को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में सेना के जवानों की इस साइकिल यात्रा को लेकर स्थानीय स्तर पर भी लोगों की रुचि देखने को मिली। विद्यार्थियों और स्थानीय युवाओं ने जवानों से सेना की दिनचर्या, भर्ती प्रक्रिया और अलग-अलग करियर विकल्पों को लेकर सवाल किए। जवानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सेना में सेवा के लिए शारीरिक क्षमता के साथ अनुशासन, जिम्मेदारी और निरंतर मेहनत की जरूरत होती है।
इस अभियान के माध्यम से सेना की ओर से युवाओं को यह संदेश दिया जा रहा है कि फिटनेस और अनुशासन को केवल किसी परीक्षा या भर्ती के समय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी अपनाना चाहिए। छात्रों के साथ संवाद में सेना के जवानों ने देशसेवा के विभिन्न अवसरों के बारे में जानकारी दी और विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार करियर विकल्पों को समझने के लिए प्रेरित किया।
अंबाला से शुरू हुई यह साइकिल यात्रा अब हिमाचल के अलग-अलग क्षेत्रों से गुजरते हुए केलंग तक पहुंच चुकी है। अभियान के अगले चरण में जवान जालंधर की ओर बढ़ेंगे और इस दौरान भी युवाओं व छात्रों के साथ संवाद का सिलसिला जारी रहने की जानकारी है। करीब 1200 किलोमीटर की यह यात्रा फिटनेस, अनुशासन और युवाओं से सीधे संपर्क के संदेश के साथ आगे बढ़ रही है।











