भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) ने दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) ‘निपुण’ भारतीय नौसेना को सौंप दिया है।
नई दिल्ली: भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को एक और बड़ी मजबूती मिली है। रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) ने भारतीय नौसेना को दूसरा अत्याधुनिक डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) ‘निपुण’ सौंप दिया है। यह जहाज गहरे समुद्र में बचाव अभियानों, पनडुब्बी सहायता संचालन और विशेष अंडरवाटर मिशनों के लिए तैयार किया गया है। इसकी डिलीवरी भारत के आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण अभियान और स्वदेशी नौसैनिक क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
‘निपुण’ को भारतीय रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के मानकों के अनुरूप डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह भारतीय नौसेना के पहले डाइविंग सपोर्ट वेसल ‘निस्तार’ के बाद इस श्रेणी का दूसरा जहाज है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी बचाव और गहरे समुद्र में संचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
118 मीटर लंबा और 8,560 टन से अधिक वजनी
‘निपुण’ आकार और तकनीक दोनों के लिहाज से एक अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म है। इसकी लंबाई 118 मीटर है और इसका डिस्प्लेसमेंट 8,560 टन से अधिक है। जहाज का डिजाइन इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह कठिन समुद्री परिस्थितियों में भी स्थिर रह सके और भारी तकनीकी उपकरणों को संचालित कर सके।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पोत में उपयोग किए गए 80 प्रतिशत से अधिक उपकरण और प्रणालियां भारत में निर्मित हैं। यह तथ्य इसे देश के रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण की सफलता का एक प्रमुख उदाहरण बनाता है।
पनडुब्बी बचाव अभियानों में निभाएगा अहम भूमिका

‘निपुण’ का मुख्य उद्देश्य समुद्र के भीतर होने वाले जटिल बचाव अभियानों को अंजाम देना है। यदि किसी कारणवश कोई पनडुब्बी समुद्र की गहराई में फंस जाती है या दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है, तो यह जहाज बचाव अभियान का केंद्र बनेगा। यह पोत डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (DSRV) के लिए “मदर शिप” के रूप में कार्य करेगा। DSRV वह विशेष वाहन होता है जो समुद्र की गहराई में जाकर संकटग्रस्त पनडुब्बी तक पहुंचता है और उसमें फंसे नौसैनिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद करता है।
‘निपुण’ इस पूरे अभियान के दौरान DSRV की लॉन्चिंग, रिकवरी, संचार और संचालन संबंधी सहायता प्रदान करेगा। दुनिया की केवल कुछ ही नौसेनाओं के पास ऐसी एकीकृत पनडुब्बी बचाव क्षमता उपलब्ध है।
डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम है सबसे बड़ी ताकत
इस जहाज की सबसे उन्नत तकनीकों में से एक इसका डायनामिक पोजिशनिंग (DP) सिस्टम है। यह प्रणाली जहाज को बिना लंगर डाले समुद्र में एक निश्चित स्थान पर सटीक रूप से स्थिर बनाए रखने में सक्षम बनाती है। समुद्र की तेज लहरों और धाराओं के बीच भी जहाज अपनी स्थिति बनाए रख सकता है, जो गोताखोरी अभियानों और पनडुब्बी बचाव कार्यों के दौरान बेहद आवश्यक होता है। इससे नीचे काम कर रहे गोताखोरों और विशेष उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
बहुउद्देशीय अंडरवाटर मिशनों के लिए तैयार
‘निपुण’ केवल आपातकालीन बचाव अभियानों तक सीमित नहीं है। इसे कई प्रकार के अंडरवाटर ऑपरेशनों के लिए डिजाइन किया गया है। यह जहाज गहरे समुद्र में तकनीकी सर्वेक्षण, विशेष गोताखोरी मिशन, समुद्री अवसंरचना निरीक्षण, अंडरवाटर मरम्मत कार्य और अन्य नौसैनिक अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसकी उन्नत प्रणालियां लंबे समय तक समुद्र में संचालन करने की क्षमता प्रदान करती हैं।
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने इस परियोजना के निर्माण में लगभग 120 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को शामिल किया। इन कंपनियों ने विभिन्न नौसैनिक मानकों के अनुरूप उपकरण और पुर्जे उपलब्ध कराए। इस व्यापक औद्योगिक भागीदारी ने न केवल स्वदेशीकरण के लक्ष्य को मजबूत किया बल्कि देश के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को भी नई गति दी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रोजेक्ट भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।











