सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला के 31 साल पुराने विवाह को किया समाप्त

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला के 31 साल पुराने विवाह को खत्म करने की मंजूरी दे दी है। अदालत ने आपसी सहमति और सभी

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला की शादी को कानूनी रूप से समाप्त करने की मंजूरी दे दी।

Umar Abdullah Divorce: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला के वैवाहिक संबंधों का औपचारिक रूप से अंत हो गया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति और सभी लंबित विवादों के समाधान को ध्यान में रखते हुए विवाह समाप्त करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए इस मामले में हस्तक्षेप किया और विवाह विच्छेद को मंजूरी प्रदान की।

यह फैसला केवल एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक परिवार से जुड़े वैवाहिक विवाद का अंत नहीं है, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था में आपसी सहमति, समझौते और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद विवाद समाधान का भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी तलाक की मंजूरी?

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया कि उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला ने अपने बीच के सभी विवादों को सुलझा लिया है। दोनों पक्षों ने अदालत को बताया कि वे लंबे समय से अलग रह रहे हैं और अब विवाह को आगे जारी रखने की कोई संभावना नहीं बची है। उमर अब्दुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से अपने सभी विवाद समाप्त कर चुके हैं और विवाह को कानूनी रूप से खत्म करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत आवेदन दायर किया गया है।

सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी बताया गया कि इस विवाद से जुड़े अन्य लंबित मामलों को भी वापस लेने पर सहमति बन चुकी है। इसके बाद न्यायालय ने विवाह समाप्त करने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया।

क्या है अनुच्छेद 142?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को विशेष परिस्थितियों में “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अधिकार प्रदान करता है। इस प्रावधान के तहत अदालत ऐसे मामलों में विशेष आदेश जारी कर सकती है, जहां सामान्य कानूनी प्रक्रिया पर्याप्त समाधान प्रदान नहीं कर पाती। पिछले कुछ वर्षों में सुप्रीम कोर्ट ने कई वैवाहिक विवादों में अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए उन विवाहों को समाप्त किया है, जिन्हें अदालत ने “अपरिवर्तनीय रूप से टूट चुका” माना।

कब से अलग रह रहे थे उमर और पायल?

अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का विवाह 1 सितंबर 1994 को हुआ था। हालांकि, समय के साथ दोनों के संबंधों में मतभेद बढ़ते गए और वर्ष 2009 से दोनों अलग-अलग रहने लगे। उमर अब्दुल्ला ने अपनी याचिका में दावा किया था कि वर्ष 2007 के बाद पति-पत्नी के रूप में उनके संबंध लगभग समाप्त हो चुके थे। उन्होंने यह भी कहा था कि वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुका है और इसे बनाए रखने की कोई व्यावहारिक संभावना नहीं है।

यह मामला कई वर्षों तक विभिन्न अदालतों में चलता रहा। वर्ष 2016 में फैमिली कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। अदालत का मानना था कि क्रूरता और परित्याग (डेजर्शन) से जुड़े आरोप पर्याप्त रूप से साबित नहीं किए जा सके। इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा। दिसंबर 2023 में हाई कोर्ट ने भी फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए तलाक की अपील खारिज कर दी थी। 

अदालत ने कहा था कि प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर विवाह विच्छेद के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं बनता। हालांकि, बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के बीच समझौता होने और सभी विवाद सुलझने के बाद परिस्थितियां बदल गईं।

गुजारा-भत्ता विवाद भी रहा चर्चा में

इस कानूनी विवाद के दौरान गुजारा-भत्ते का मुद्दा भी प्रमुख रहा। वर्ष 2023 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला को पायल अब्दुल्ला को अंतरिम गुजारा-भत्ते के रूप में प्रति माह 1.5 लाख रुपये देने का आदेश दिया था। इसके अलावा, अदालत ने दोनों बेटों की शिक्षा और अन्य जरूरतों के लिए प्रति माह 60,000 रुपये प्रति बच्चे देने का भी निर्देश दिया था। यह आदेश पहले की निचली अदालत के फैसले में संशोधन करते हुए जारी किया गया था।

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