IndiGo Q1 Results: कच्चे तेल की महंगाई से इंडिगो को ₹382 करोड़ का घाटा, रेवेन्यू 20% बढ़कर ₹24,584 करोड़ पहुंचा

IndiGo Q1 Results: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच इंडिगो को पहली तिमाही में ₹382 करोड़ का घाटा हुआ। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 20% बढ़कर ₹24,584 करोड़ पहुंच

देश की दिग्गज एयरलाइन कंपनी इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड ने FY27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने 23 जुलाई को 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए 382 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन नेट लॉस दर्ज किया है।

बिजनेस न्यूज़: भारत की प्रमुख एयरलाइन कंपनी इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में ₹382 करोड़ का स्टैंडअलोन शुद्ध घाटा दर्ज किया। एक साल पहले की समान अवधि में एयरलाइन ने ₹2,161 करोड़ का शुद्ध मुनाफा कमाया था। हालांकि, कंपनी के परिचालन से होने वाले राजस्व में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।

इंडिगो के ताजा तिमाही नतीजे ऐसे समय में सामने आए हैं, जब वैश्विक विमानन उद्योग को ईंधन की बढ़ती कीमतों, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन दबावों का असर कंपनी की लागत पर पड़ा, जिससे बेहतर राजस्व के बावजूद मुनाफा घाटे में बदल गया।

Q1 FY27 में 20% बढ़ा इंडिगो का रेवेन्यू

इंटरग्लोब एविएशन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का परिचालन से राजस्व ₹24,584 करोड़ रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह आंकड़ा ₹20,496 करोड़ था। इस तरह सालाना आधार पर कंपनी के राजस्व में करीब 20% की वृद्धि हुई। हालांकि, राजस्व में मजबूत बढ़ोतरी का फायदा मुनाफे में नहीं बदल सका। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ₹382 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में उसे ₹2,161 करोड़ का लाभ हुआ था।

कंपनी के कुल खर्च में भी तेज वृद्धि हुई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, तिमाही के दौरान कुल खर्च करीब 35% बढ़ा। इसमें विमान ईंधन की लागत सबसे बड़ी चिंता रही।

विमान ईंधन की लागत में 86% तक उछाल

IndiGo Q1 Results: कच्चे तेल की महंगाई से इंडिगो को ₹382 करोड़ का घाटा, रेवेन्यू 20% बढ़कर ₹24,584 करोड़ पहुंचा

इंडिगो के वित्तीय प्रदर्शन पर सबसे बड़ा दबाव एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमतों में बढ़ोतरी से पड़ा। कंपनी के अनुसार, ईंधन खर्च सालाना आधार पर लगभग 86% बढ़कर ₹10,830 करोड़ तक पहुंच गया। एयरलाइन उद्योग में ईंधन की लागत कुल परिचालन खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर एयरलाइनों के मार्जिन पर पड़ता है। 

इंडिगो के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिली। यात्रियों की संख्या और राजस्व में बढ़ोतरी के बावजूद ईंधन लागत में तेज उछाल ने कंपनी के मुनाफे पर दबाव बढ़ा दिया।

विदेशी मुद्रा और पश्चिम एशिया संकट का भी असर

इंटरग्लोब एविएशन के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया के अनुसार, तिमाही के दौरान कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर कई बाहरी कारकों का असर पड़ा। इनमें विमान ईंधन की ऊंची कीमतें, विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख रहे। रुपये की कमजोरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी एयरलाइन कंपनियों के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि विमान लीज, रखरखाव और अन्य अंतरराष्ट्रीय खर्चों का एक बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा में होता है।

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण एयरलाइन नेटवर्क और परिचालन पर भी दबाव पड़ा। कुछ मार्गों पर उड़ान संचालन प्रभावित होने से कंपनी को अतिरिक्त परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। राहुल भाटिया ने कहा कि निकट भविष्य में वैश्विक परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है। इसके बावजूद कंपनी क्षमता विस्तार, लागत पर नियंत्रण और अपने नेटवर्क को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

3.13 करोड़ यात्रियों ने की यात्रा

इंडिगो ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान करीब 3.13 करोड़ यात्रियों को हवाई यात्रा की सुविधा दी। कंपनी का विमान बेड़ा भी बढ़कर 432 विमानों का हो गया है। एयरलाइन वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 2,298 उड़ानों का संचालन कर रही है। इनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मार्ग शामिल हैं। कंपनी लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही है और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।

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