इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक गवर्नर पेरी वारजियो ने निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए डेस्ट्री दमायंती को अंतरिम गवर्नर नियुक्त किया। इस घटनाक्रम से निवेशकों के बीच केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और आर्थिक नीतियों को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई हैं।
जकार्ता: इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक बैंक इंडोनेशिया (BI) के गवर्नर पेरी वारजियो ने अपने पद से अचानक इस्तीफा देकर वित्तीय बाजारों को चौंका दिया है। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। सरकार ने वरिष्ठ डिप्टी गवर्नर डेस्ट्री दमायंती को अंतरिम गवर्नर नियुक्त किया है। वारजियो ने अपने इस्तीफे के पीछे निजी कारण बताए हैं, हालांकि सरकार ने उनके फैसले के बारे में अधिक जानकारी साझा नहीं की। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था, मुद्रा और केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर पहले से ही निवेशकों की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। इसलिए इस इस्तीफे का असर देश के वित्तीय बाजारों और निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है।
राष्ट्रपति ने स्वीकार किया इस्तीफा
राज्य सचिवालय मंत्री प्रसेत्यो हादी ने सोमवार को घोषणा की कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने पेरी वारजियो का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। यह घोषणा जकार्ता के वित्तीय बाजार खुलने से पहले की गई, ताकि बाजारों को आधिकारिक जानकारी मिल सके। सरकार ने केवल इतना कहा कि वारजियो ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा सौंपा था। हालांकि उनके निजी कारणों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। वारजियो की ओर से भी तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
डेस्ट्री दमायंती को मिली अंतरिम जिम्मेदारी
बैंक इंडोनेशिया की वरिष्ठ डिप्टी गवर्नर डेस्ट्री दमायंती को अंतरिम गवर्नर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक अपनी सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन पहले की तरह जारी रखेगा और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि रुपिया की स्थिरता, महंगाई नियंत्रण और वित्तीय प्रणाली की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए बैंक इंडोनेशिया अपनी मौद्रिक नीति को प्रभावी ढंग से लागू करता रहेगा।
कौन हैं पेरी वारजियो?
पेरी वारजियो को पहली बार वर्ष 2018 में बैंक इंडोनेशिया का गवर्नर नियुक्त किया गया था। इसके बाद वर्ष 2023 में उन्हें दूसरा पांच वर्षीय कार्यकाल दिया गया। उनके नेतृत्व में केंद्रीय बैंक ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, कोविड-19 महामारी के बाद की आर्थिक रिकवरी और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। अर्थशास्त्रियों के अनुसार वारजियो को एक अनुभवी और संतुलित केंद्रीय बैंकर माना जाता था, जिनकी नीतियों ने इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था को कई वैश्विक झटकों से बचाने में मदद की।
निवेशकों की चिंता क्यों बढ़ी?
विशेषज्ञों का मानना है कि वारजियो का अचानक इस्तीफा निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। उनका कहना है कि केंद्रीय बैंक के नेतृत्व में अचानक बदलाव से मौद्रिक नीति की निरंतरता और संस्थागत विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। सिंगापुर स्थित निवेश विशेषज्ञ एंगस मैकिन्टोश के अनुसार, वारजियो को बाजार एक भरोसेमंद और अनुभवी नीति निर्माता के रूप में देखता था। ऐसे में उनके जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि स्थायी गवर्नर कौन बनेगा और क्या केंद्रीय बैंक अपनी स्वतंत्रता बनाए रख पाएगा।
केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता पर बहस
हाल के महीनों में इंडोनेशिया का केंद्रीय बैंक सरकार की विकास योजनाओं को समर्थन देने के दबाव में रहा है। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की सरकार तेज आर्थिक विकास और बड़े सार्वजनिक निवेश कार्यक्रमों पर जोर दे रही है। पिछले महीने इंडोनेशियाई संसद ने एक नया कानून पारित किया, जिसके तहत केंद्रीय बैंक की आर्थिक विकास में भूमिका और अधिक बढ़ाई गई। साथ ही सांसदों को वित्तीय नियामकों और केंद्रीय बैंक के संबंध में सिफारिशें करने के अधिक अधिकार भी दिए गए। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है, जबकि सरकार का कहना है कि यह कदम आर्थिक विकास को गति देने के लिए आवश्यक है।

रुपिया पर बना हुआ है दबाव
इंडोनेशियाई मुद्रा रुपिया हाल के महीनों में वैश्विक वित्तीय अस्थिरता और निवेशकों की चिंताओं के कारण दबाव में रही है। जून में रुपिया अपने ऐतिहासिक निचले स्तर तक पहुंच गई थी। इस स्थिति से निपटने के लिए बैंक इंडोनेशिया ने मई से अब तक कुल 100 आधार अंक (Basis Points) तक ब्याज दरें बढ़ाईं, ताकि विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सके और रुपिया को मजबूती मिल सके। हालांकि पिछले सप्ताह केंद्रीय बैंक ने बाजार को चौंकाते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। इसके बजाय विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए नए प्रोत्साहन उपायों की घोषणा की गई।
बाजार की नजर नए गवर्नर पर
विश्लेषकों का कहना है कि अब वित्तीय बाजारों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि स्थायी गवर्नर के रूप में किसकी नियुक्ति होगी। यदि नियुक्ति पूरी तरह पेशेवर और स्वतंत्र प्रक्रिया के तहत होती है, तो निवेशकों का भरोसा कायम रह सकता है। वहीं यदि नियुक्ति को राजनीतिक प्रभाव से जोड़कर देखा गया, तो विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है और इसका असर मुद्रा, शेयर बाजार और बॉन्ड बाजार पर भी पड़ सकता है। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकार द्वारा लिए जाने वाले फैसले बैंक इंडोनेशिया की विश्वसनीयता और भविष्य की मौद्रिक नीति की दिशा तय करेंगे।
पहले भी बाजार में बढ़ी थी चिंता
पिछले वर्ष इंडोनेशिया की वित्त मंत्री श्री मुल्यानी इंद्रावती के अचानक पद छोड़ने की खबरों ने भी वित्तीय बाजारों को प्रभावित किया था। उस समय निवेशकों ने आशंका जताई थी कि यदि अनुभवी आर्थिक नेतृत्व में बदलाव होता है, तो देश की वित्तीय साख और राजकोषीय अनुशासन प्रभावित हो सकता है। अब पेरी वारजियो के इस्तीफे के बाद एक बार फिर बाजार उसी तरह की अनिश्चितता का सामना कर रहा है।
आगे क्या?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि डेस्ट्री दमायंती के अंतरिम नेतृत्व में बैंक इंडोनेशिया फिलहाल मौद्रिक नीति की निरंतरता बनाए रखने का प्रयास करेगा। हालांकि दीर्घकालिक स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार नया गवर्नर किसे नियुक्त करती है और केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को किस हद तक सुरक्षित रखा जाता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की संवेदनशीलता को देखते हुए इंडोनेशिया के लिए आने वाले सप्ताह काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।












