कुलदीप सिंह पंवार ने उमलिंग ला तक बाइक दौड़ाकर बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

इंदौर के 53 वर्षीय कुलदीप सिंह पंवार ने 19,024 फीट ऊंचे उमलिंग ला पास तक बाइक चलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने 14 दिनों में चुनौतीपूर्ण सफर पूरा किया।

इंदौर के 53 वर्षीय कुलदीप सिंह पंवार ने दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क उमलिंग ला तक बाइक चलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने 14 दिनों में चुनौतीपूर्ण सफर पूरा कर यह उपलब्धि हासिल की।

इंदौर: Indore News में शहर के 53 वर्षीय कुलदीप सिंह पंवार ने विश्व की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क उमलिंग ला पास तक बाइक चलाकर नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मार्ग तक पहुंचकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। कठिन मौसम और कम ऑक्सीजन जैसी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने 14 दिनों में यह अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया।

19,024 फीट की ऊंचाई पर रचा नया इतिहास

मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी कुलदीप सिंह पंवार ने अपनी साहसिक यात्रा से देश का नाम रोशन किया है। 53 वर्षीय कुलदीप ने दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क उमलिंग ला पास (लद्दाख) तक रॉयल एनफील्ड हिमालयन बाइक चलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। लगभग 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस सड़क तक बाइक पहुंचाना आसान नहीं माना जाता, क्योंकि यहां ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम होता है और मौसम पल-पल बदलता रहता है।

इस उपलब्धि के बाद उन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र भी प्रदान किया गया। उनकी इस सफलता को एडवेंचर और मोटरसाइकिल राइडिंग के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

14 दिनों में पूरा किया चुनौतीपूर्ण अभियान

कुलदीप सिंह पंवार ने यह अभियान 3 जुलाई से 17 जुलाई 2026 के बीच पूरा किया। उन्होंने इंदौर से अपनी यात्रा शुरू की और करीब दो हजार किलोमीटर से अधिक का सफर तय करते हुए लद्दाख के उमलिंग ला पास तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने सड़क मार्ग से ही वापसी कर अपना अभियान पूरा किया।

यात्रा के दौरान उनका रूट जम्मू, श्रीनगर, सोनमर्ग, जोजिला दर्रा, कारगिल, लेह, नुब्रा घाटी, खारदुंग ला, पांगोंग झील, हानले, उमलिंग ला, सारचू, अटल टनल, मनाली, दिल्ली और फिर इंदौर तक रहा। इस पूरे सफर में उन्होंने अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन रास्तों का सामना किया।

बर्फीले रास्तों और कम ऑक्सीजन ने बढ़ाई चुनौती

उमलिंग ला तक पहुंचने का सफर बेहद कठिन माना जाता है। यात्रा के दौरान कई इलाकों में तापमान शून्य से पांच डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच गया। कई स्थानों पर सड़कें बर्फ से ढकी हुई थीं, जबकि कई हिस्सों में कच्चे और उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर गुजरना पड़ा।

ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी भी बड़ी चुनौती बनी रही। ऐसे इलाकों में लंबे समय तक रुकना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसके बावजूद कुलदीप ने पूरे अभियान के दौरान धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखा और सुरक्षित तरीके से अपनी मंजिल तक पहुंचे।

कई महीनों की तैयारी के बाद मिली सफलता

कुलदीप सिंह पंवार ने बताया कि इस रिकॉर्ड को बनाने के लिए उन्होंने कई महीनों तक तैयारी की थी। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बाइक चलाने के लिए केवल बेहतर राइडिंग स्किल ही नहीं, बल्कि शारीरिक फिटनेस और मानसिक मजबूती भी बेहद जरूरी होती है। इसी वजह से उन्होंने यात्रा शुरू करने से पहले अपनी फिटनेस और बाइक दोनों पर विशेष ध्यान दिया।

उन्होंने कहा कि 53 वर्ष की उम्र में इस उपलब्धि को हासिल करना उनके लिए गर्व और यादगार पल है। उनका मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और तैयारी पूरी हो, तो उम्र किसी भी उपलब्धि के रास्ते में बाधा नहीं बनती।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी उपलब्धि

कुलदीप सिंह पंवार की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो एडवेंचर स्पोर्ट्स और लंबी दूरी की बाइक राइडिंग में रुचि रखते हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और लगातार तैयारी के दम पर बड़ी से बड़ी चुनौती को भी पार किया जा सकता है।

उनकी इस उपलब्धि से इंदौर ही नहीं, पूरे मध्य प्रदेश में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों और बाइकिंग समुदाय ने उनकी सफलता पर बधाई दी है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज यह उपलब्धि आने वाले समय में कई युवाओं को अपने सपनों का पीछा करने और नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करेगी।

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