ईरान की सत्ता संरचना को लेकर नई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की भूमिका रणनीतिक मामलों में सीमित की गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर घटनाक्रम तेज बना हुआ है।
ईरान/अमेरिका वॉर: मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान की आंतरिक सत्ता व्यवस्था को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि देश के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की निर्णय लेने की शक्तियों में कटौती की गई है और सुरक्षा व विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका और मजबूत हुई है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि ईरानी सरकार या सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से नहीं की गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ईरान परमाणु कार्यक्रम, अमेरिका के साथ संभावित वार्ता, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों को लेकर वैश्विक सुर्खियों में बना हुआ है।
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है
कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे रणनीतिक विषयों पर अंतिम निर्णय लेने की प्रक्रिया में राष्ट्रपति की भूमिका सीमित हो सकती है। दावा किया गया है कि इन मामलों में IRGC नेतृत्व की राय अधिक प्रभावी होगी। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि राष्ट्रपति मसूद पजशकियान पहले भी सरकार को महत्वपूर्ण निर्णयों से दूर रखे जाने पर असंतोष जता चुके हैं। हालांकि इन दावों पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
ईरान की सत्ता व्यवस्था कैसे काम करती है
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सर्वोच्च अधिकार सुप्रीम लीडर के पास होता है। रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे कई महत्वपूर्ण मामलों में अंतिम निर्णय का अधिकार भी सुप्रीम लीडर के पास माना जाता है। राष्ट्रपति सरकार का प्रमुख होता है और प्रशासनिक तथा आर्थिक नीतियों का संचालन करता है, लेकिन संवेदनशील रणनीतिक मामलों में विभिन्न संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। यही कारण है कि किसी भी संभावित बदलाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान दिया जा रहा है।
अमेरिका-ईरान वार्ता पर अब भी अनिश्चितता
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर अभी तक न तो तारीख तय हुई है और न ही स्थान। पाकिस्तान और कतर का नाम संभावित मेजबान देशों के रूप में सामने आया है, लेकिन किसी भी पक्ष ने आधिकारिक घोषणा नहीं की है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि बातचीत शुरू होती है तो उसका प्रभाव परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र
विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा में है। रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान और ओमान के बीच समुद्री यातायात व्यवस्था को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में एक वाणिज्यिक जहाज पर हमले और एक नाविक के लापता होने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। यदि इस मार्ग पर तनाव बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है।
IRGC का ड्रोन मार गिराने का दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज क्षेत्र में उड़ रहे MQ-9 रीपर ड्रोन को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ड्रोन किस देश का था और स्वतंत्र स्रोतों से इस दावे की पुष्टि भी नहीं हो सकी है। ऐसे दावों के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिका नए विकल्पों पर कर रहा विचार
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ईरान पर दबाव बढ़ाने के संभावित विकल्पों का अध्ययन कर रहा है। इसमें सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर किसी नए अभियान की घोषणा नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका की नीति क्षेत्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
हूती गतिविधियों से समुद्री व्यापार प्रभावित
यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों की ओर से बढ़ती गतिविधियों के कारण लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक कई बड़े तेल टैंकरों ने अपने समुद्री मार्ग बदल दिए हैं और अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा रास्ता अपनाया है। इस बदलाव से परिवहन लागत बढ़ सकती है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है।
विदेश मंत्री पर राजनीतिक दबाव
ईरान की संसद के कुछ सदस्यों द्वारा विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी की खबरें भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि कुछ सांसद अमेरिका के साथ बातचीत की रणनीति और हालिया कूटनीतिक कदमों से असंतुष्ट हैं। हालांकि संसद में किसी औपचारिक प्रक्रिया की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
राष्ट्रपति का बयान
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि ईरान युद्ध को आगे नहीं बढ़ाना चाहता, लेकिन यदि राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा पैदा होता है तो देश अपनी सीमाओं की रक्षा करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष किसी भी देश के लिए दीर्घकालिक समाधान नहीं हो सकता।












