दिल्ली में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। इस बैठक में जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा को बिहार की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में लगातार चल रही अटकलों के बीच मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात ने राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद प्रधानमंत्री से यह उनकी पहली औपचारिक मुलाकात मानी जा रही है।
बैठक में जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी मौजूद रहे। हालांकि, दोनों दलों की ओर से इसे नियमित राजनीतिक और विकास संबंधी चर्चा बताया गया है, लेकिन बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इस मुलाकात को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
विकास और राष्ट्रीय मुद्दों पर हुई चर्चा
मुलाकात के बाद जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि बैठक के दौरान देश और बिहार के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात सकारात्मक माहौल में हुई और इसमें विकास योजनाओं, केंद्र-राज्य सहयोग तथा जनहित से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।संजय झा ने यह भी बताया कि बैठक में बिहार की हालिया राजनीतिक घटनाओं या किसी विशेष चुनावी रणनीति पर चर्चा नहीं हुई। उनके अनुसार, बातचीत का मुख्य केंद्र विकास और प्रशासनिक सहयोग रहा।
हाल के दिनों में बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव चर्चा का विषय बना हुआ है। उपचुनाव के परिणामों के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी देखने को मिला था। मुलाकात के बाद यह सवाल उठने लगे कि क्या प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार के बीच बांकीपुर उपचुनाव के परिणामों पर चर्चा हुई। हालांकि, जदयू नेताओं ने साफ किया कि बैठक में इस विषय पर कोई बातचीत नहीं हुई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव को लेकर विभिन्न दलों ने अपने-अपने राजनीतिक निष्कर्ष निकाले हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और नीतीश कुमार की मुलाकात का केंद्र वह मुद्दा नहीं था।

बिहार में नेतृत्व परिवर्तन के बाद पहली बड़ी मुलाकात
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि बिहार में हाल के महीनों में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। लंबे समय तक राज्य की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा था, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में राज्य को नया मुख्यमंत्री मिला। नीतीश कुमार बाद में राज्यसभा पहुंचे और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने लगे। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी से उनकी यह पहली प्रमुख मुलाकात कई राजनीतिक संदेशों के संदर्भ में देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर समन्वय और राजनीतिक एकजुटता को लेकर भी इस मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
एनडीए की एकजुटता पर फिर लगा मुहर?
हाल के समय में बिहार की राजनीति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। विपक्षी दलों ने नेतृत्व परिवर्तन और चुनावी नतीजों को लेकर एनडीए के भीतर मतभेदों के दावे भी किए थे। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार की संयुक्त उपस्थिति को राजनीतिक पर्यवेक्षक गठबंधन की एकजुटता के संकेत के रूप में देख रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से राजनीतिक सहयोग का इतिहास रहा है और यह मुलाकात उसी सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।












