आईआरसीटीसी घोटाला मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की याचिका पर दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट ने अहम आदेश जारी किया है। अदालत ने बुधवार को उनकी अर्जी पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी किया है।
IRCTC Scam Case: आईआरसीटीसी घोटाला मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की याचिका पर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आज (बुधवार) अहम सुनवाई की। अदालत ने राबड़ी देवी की याचिका पर CBI को नोटिस जारी किया और उसे 6 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई उसी दिन आयोजित होगी।
क्या है राबड़ी देवी की याचिका?
राबड़ी देवी ने उस जज को मामले से हटाने की मांग की है, जो वर्तमान में आईआरसीटीसी घोटाला का परीक्षण कर रहे हैं। उनकी याचिका में यह मांग की गई है कि न्यायाधीश विशाल गोगने द्वारा देखे जा रहे मामलों जिनमें आईआरसीटीसी घोटाला, नौकरी के बदले भूमि का मामला और उनसे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग केस शामिल हैं को किसी अन्य कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए।
राबड़ी देवी की तरफ से यह तर्क पेश किया गया है कि न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मामला नए जज के पास स्थानांतरित होना चाहिए। अब अदालत 6 दिसंबर को इस याचिका पर अंतिम निर्णय लेगी और CBI के जवाब को ध्यान में रखते हुए अगली कार्रवाई तय करेगी।

CBI को नोटिस का आदेश
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया है कि वह 6 दिसंबर तक अपना पक्ष प्रस्तुत करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका पर आगे की सुनवाई उसी दिन होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि न्यायाधीश को बदलने की मांग पर क्या निर्णय लिया जाएगा। 13 अक्टूबर को न्यायाधीश विशाल गोगने ने आईआरसीटीसी घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आपराधिक आरोप तय किए थे। यह मामला तब सुर्खियों में आया था, जब यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान रेलवे के होटलों के टेंडर आवंटन में कथित अनियमितताओं का खुलासा हुआ।
विशाल गोगने द्वारा तय आरोपों में यह कहा गया कि रेलवे होटलों के टेंडरों में नियमानुसार प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, जिससे सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान हुआ। इस घोटाले के चलते कई प्रमुख नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ लंबी जांच प्रक्रिया शुरू हुई।
IRCTC घोटाले की पृष्ठभूमि
आईआरसीटीसी घोटाला मुख्य रूप से रेलवे के होटल संचालन और टेंडर आवंटन में हुई अनियमितताओं से जुड़ा है। यह मामला 2004-2009 के दौरान हुआ, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। जांच में सामने आया कि कुछ टेंडरों में नियमों का उल्लंघन किया गया और कई प्रक्रियाएं पारदर्शिता के खिलाफ थीं। घोटाले की जांच CBI कर रही है, और इस मामले में कई वरिष्ठ नेताओं को आरोपी बनाया गया है। राबड़ी देवी की याचिका इस मामले में न्यायिक निष्पक्षता और संभावित जज की बदलवाने की मांग को लेकर है।
कोर्ट ने तय किया है कि 6 दिसंबर को अगली सुनवाई में याचिका पर फाइनल निर्णय लिया जाएगा। इस दिन CBI अपना पक्ष प्रस्तुत करेगी और अदालत यह तय करेगी कि जज बदलने की मांग स्वीकार होगी या नहीं।












