जयपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने आनंद धाबास की निर्माण इकाई पर कार्रवाई करते हुए बिना जरूरी पैकेजिंग और एक्सपायरी डेट वाली करीब 1600 किलो सोहनपापड़ी नष्ट कराई। टीम ने सोहनपापड़ी और बादाम कटिंग के नमूने लिए, जिनकी प्रयोगशाला जांच होगी।
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट और खाद्य नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 1600 किलो सोहनपापड़ी नष्ट कराई है। विभाग की टीम को मिठाई निर्माण इकाई में तैयार सोहनपापड़ी के पैकेट पर जरूरी खाद्य लेबलिंग नहीं मिली। कई उत्पादों पर पैकेजिंग डेट और एक्सपायरी या उपभोग की अंतिम तिथि अंकित नहीं थी। कार्रवाई के दौरान सोहनपापड़ी और बादाम कटिंग के नमूने भी जांच के लिए लिए गए हैं।
आनंद धाबास की निर्माण इकाई में पहुंची टीम
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग की सेंट्रल टीम ने जयपुर स्थित मेसर्स आनंद धाबास की सोहनपापड़ी निर्माण इकाई का निरीक्षण किया। यह कार्रवाई राजस्थान सरकार की ओर से चलाए जा रहे ‘शुद्ध आहार–मिलावट पर वार’ अभियान के तहत की गई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्माण इकाई में तैयार मिठाइयों और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग तथा लेबलिंग से जुड़े मानकों की जांच की। टीम को तैयार सोहनपापड़ी की बड़ी मात्रा पर जरूरी जानकारी दर्ज नहीं मिली।
खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली तारीखों का उल्लेख नहीं होने को विभाग ने गंभीरता से लिया।
जांच के दौरान स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से संबंधित कुछ अन्य कमियां भी सामने आने की बात कही गई है। इसके बाद मौके पर उपलब्ध तैयार स्टॉक के खिलाफ कार्रवाई की गई।
1600 किलो सोहनपापड़ी कराया गया नष्ट
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, निर्माण इकाई में करीब 1600 किलो तैयार सोहनपापड़ी का स्टॉक मौजूद था। इस स्टॉक पर आवश्यक पैकेजिंग और एक्सपायरी या उपभोग की अंतिम तिथि अंकित नहीं थी। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत जरूरी जानकारी के अभाव को देखते हुए विभाग ने पूरा स्टॉक नष्ट करा दिया। कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे खाद्य उत्पादों की बिक्री रोकना है, जिनके बारे में उपभोक्ता को निर्माण और उपयोग की अंतिम तारीख जैसी जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होती। विभाग की कार्रवाई के बाद संबंधित प्रतिष्ठान में मौजूद स्टॉक को बाजार में पहुंचने से पहले ही हटा दिया गया।
सोहनपापड़ी और बादाम कटिंग के लिए गए नमूने
निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सोहनपापड़ी और बादाम कटिंग के एक-एक नमूने भी लिए। इन नमूनों को विस्तृत जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा जाएगा। प्रयोगशाला जांच में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूप होने की स्थिति सामने आएगी। रिपोर्ट आने के बाद विभाग यह तय करेगा कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे किस तरह की कार्रवाई की जानी है। इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि केवल खाद्य सामग्री की पैकेजिंग ही नहीं, बल्कि उसके निर्माण, गुणवत्ता और उपभोक्ता तक पहुंचने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन करना भी जरूरी है।
प्रतिष्ठान को जारी होगा इम्प्रूवमेंट नोटिस
निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों के संबंध में संबंधित प्रतिष्ठान को इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। नोटिस के जरिए प्रतिष्ठान को खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े मानकों में सुधार करने के निर्देश दिए जाएंगे। खाद्य विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रयोगशाला में भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन या किसी तरह की मिलावट की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
‘शुद्ध आहार–मिलावट पर वार’ अभियान के तहत कार्रवाई
जयपुर की यह कार्रवाई मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के निर्देशन में चल रहे ‘शुद्ध आहार–मिलावट पर वार’ अभियान के तहत की गई। कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग की टीम ने आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देशन में की।
अभियान का उद्देश्य मिलावटी और नियमों का उल्लंघन करने वाले खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाना है। इसके तहत खाद्य निर्माण इकाइयों, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जाता है और संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उनकी जांच कराई जाती है। जयपुर में सोहनपापड़ी का बड़ा स्टॉक नष्ट किए जाने की कार्रवाई इसी व्यापक अभियान का हिस्सा है।
खाद्य लेबलिंग क्यों है जरूरी?
खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग पर निर्माण और उपयोग से जुड़ी जानकारी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होती है। इससे ग्राहक यह समझ सकता है कि उत्पाद कब तैयार हुआ और उसे कितने समय के भीतर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। विशेष रूप से मिठाई और जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों के मामले में यह जानकारी और महत्वपूर्ण हो जाती है।
यदि किसी उत्पाद पर जरूरी तारीखें या अन्य अनिवार्य जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो उपभोक्ता के लिए उसकी गुणवत्ता और सुरक्षित उपयोग का आकलन करना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर निर्माण इकाइयों और दुकानों की जांच करता है। जयपुर में हुई कार्रवाई में भी लेबलिंग से जुड़ी कमियों को प्रमुख आधार बनाया गया।
गुजरात में नकली घी की फैक्टरी पर भी कार्रवाई
खाद्य मिलावट के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई के बीच गुजरात में भी नकली घी बनाने वाली कथित फैक्टरी का मामला सामने आया है। पांच अगस्त को गांधीनगर जिले में पुलिस और खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन की संयुक्त टीम ने कलोल के छत्राल औद्योगिक क्षेत्र में एक गोदाम पर छापा मारा था।
पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान कथित रूप से मिलावटी घी, ताड़ का तेल और अन्य रसायनों समेत करीब 1.67 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त की गई। अधिकारियों ने लगभग 30,000 लीटर तैयार सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी दी थी। अधिकारियों के अनुसार, जब्त सामग्री के नमूने अपराध विज्ञान प्रयोगशाला यानी FSL को जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। छापेमारी के बाद संबंधित फैक्टरी को सील कर दिया गया था। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि फैक्टरी से जुड़े व्यक्ति ने पहले कड़ी क्षेत्र में इसी तरह की एक इकाई संचालित की थी, जहां 2024 में कार्रवाई की गई थी। इसके बाद कलोल में नई इकाई शुरू किए जाने की बात सामने आई।
मिलावट के खिलाफ कार्रवाई से उपभोक्ताओं को उम्मीद
जयपुर और गुजरात में हुई कार्रवाइयां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता लगातार बनी हुई है। मिठाई, दूध से बने उत्पाद, घी और अन्य खाद्य वस्तुओं में मिलावट की शिकायतें खाद्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती हैं। जयपुर में 1600 किलो सोहनपापड़ी को नष्ट करने की कार्रवाई फिलहाल लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के आधार पर हुई है। वहीं, लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित खाद्य उत्पादों में गुणवत्ता संबंधी कोई अन्य गंभीर समस्या थी या नहीं।
फिलहाल खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए प्रतिष्ठान को सुधार संबंधी नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रयोगशाला जांच के नतीजों के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।










