जयपुर में नकली घी की पैकिंग का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार; 61,600 कार्टन-पाउच बरामद

जयपुर में नकली घी की पैकिंग तैयार करने वाले कथित गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस ने 61,600 कार्टन-पाउच समेत मशीनें जब्त कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

जयपुर पुलिस ने नकली घी की पैकिंग तैयार करने वाले कथित नेटवर्क का खुलासा किया है। झोटवाड़ा के गोदाम से 61,600 खाली कार्टन, पाउच और बारकोड स्कैनर बरामद हुए। पुलिस ने अनिल अग्रवाल समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान पुलिस ने नकली घी के कारोबार से जुड़े एक कथित पैकिंग नेटवर्क का खुलासा किया है। जयपुर कमिश्नरेट की क्राइम स्पेशल टीम (CST) और झोटवाड़ा थाना पुलिस ने फैक्ट्री एरिया स्थित एक गोदाम पर कार्रवाई कर बड़ी मात्रा में ब्रांडेड कंपनियों के नाम वाली कथित फर्जी पैकिंग सामग्री बरामद की है। पुलिस के अनुसार, गोदाम से सरस, लोट्स, महान और कृष्णा घी के नाम पर इस्तेमाल की जाने वाली 61,600 खाली मोनो कार्टन, 61,600 पाउच पैक और 61,600 बारकोड स्कैनर बरामद किए गए। इसके अलावा पैकिंग और प्रिंटिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनें तथा सप्लाई के लिए इस्तेमाल किए जा रहे वाहन भी जब्त किए गए हैं।

मामले में पुलिस ने कथित मुख्य सरगना अनिल अग्रवाल समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

एक महीने की निगरानी के बाद पुलिस की कार्रवाई

डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण के मुताबिक, झोटवाड़ा थाना पुलिस और CST टीम करीब एक महीने से आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। पुलिस ने तकनीकी सहायता के जरिए संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाई। इसके बाद मंगलवार को झोटवाड़ा के फैक्ट्री एरिया स्थित गोदाम पर दबिश दी गई।

पुलिस की कार्रवाई के दौरान गोदाम से बड़ी संख्या में पैकिंग सामग्री और मशीनें मिलीं। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने इसे कथित तौर पर नकली घी की पैकिंग तैयार करने और सप्लाई करने से जुड़ा नेटवर्क बताया है।

तीन आरोपियों को किया गया गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनिल अग्रवाल (35), पुत्र टीकमचंद अग्रवाल, निवासी कोटड़ा मोहल्ला, वार्ड नंबर 6, चाकसू; मोहनलाल शर्मा (42), पुत्र राजेंद्र प्रसाद शर्मा, निवासी वार्ड नंबर 19, मालियों का मोहल्ला, चाकसू; और याकूब (40), पुत्र इब्राहीम, निवासी मकान नंबर डी-17, पुरानी बस्ती, नाहरगढ़ किले के नीचे, नीम घर की मस्जिद के पास, नाहरगढ़ थाना के रूप में हुई है।

पुलिस का कहना है कि पूछताछ के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अब जांच के दौरान उनसे कथित नेटवर्क के संचालन, पैकिंग की सप्लाई और उससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

सरस डेयरी अधिकारियों ने की पैकिंग सामग्री की जांच

गोदाम से बड़ी मात्रा में ब्रांडेड घी के नाम वाली पैकिंग सामग्री मिलने के बाद पुलिस ने सरस डेयरी के अधिकारियों को मौके पर बुलाया। अधिकारियों ने बरामद रैपर, मोनो कार्टन और हॉलमार्क की जांच की।

पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान संबंधित पैकिंग सामग्री और हॉलमार्क को नकली बताया गया। इसके बाद सरस डेयरी के राजाराम कार्यालय की ओर से पुलिस को रिपोर्ट दी गई।

रिपोर्ट के आधार पर झोटवाड़ा थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले में कॉपीराइट एक्ट और ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। मामले की जांच ACP झोटवाड़ा शिव कुमार भारद्वाज कर रहे हैं।

प्रिंटिंग मशीन से तैयार किए जाते थे ब्रांडेड नाम वाले रैपर

पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी अनिल अग्रवाल कथित तौर पर टोंक निवासी अमन जैन से रैपर और खाली मोनो कार्टन खरीदता था। इसके बाद झोटवाड़ा स्थित गोदाम में मौजूद प्रिंटिंग मशीनों की मदद से कार्टन और रैपर पर अलग-अलग ब्रांड के नाम, तारीख और हॉलमार्क अंकित किए जाते थे।

पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया में सरस, लोट्स, महान और कृष्णा घी के नाम का इस्तेमाल किया जाता था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि ब्रांडेड कंपनियों की पहचान का इस्तेमाल कर ऐसी पैकिंग तैयार की जा रही थी, जिसका इस्तेमाल बाद में नकली घी की पैकिंग के लिए किया जाना था।

हालांकि, बरामद सामग्री में वास्तविक घी की मात्रा और तैयार नकली घी का कितना स्टॉक मौजूद था, इसे लेकर पुलिस की जांच अभी जारी है।

छोटे कारोबारियों तक पहुंचाई जाती थी पैकिंग

पुलिस के मुताबिक, गोदाम में तैयार की गई कथित फर्जी पैकिंग जयपुर और आसपास के इलाकों में छोटे कारोबारियों को सप्लाई की जाती थी। जांच में प्रमोद अग्रवाल, श्यामसुंदर राठौड़ और अन्य कथित नकली घी कारोबारियों के नाम सामने आए हैं।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गोदाम से तैयार की जाने वाली पैकिंग किन-किन लोगों तक पहुंचाई जाती थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे और उनकी जिम्मेदारियां क्या थीं।

कोडवर्ड में लिए जाते थे ऑर्डर

जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के काम करने के तरीके के बारे में भी जानकारी मिली है। पुलिस के अनुसार, आरोपी अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए कथित तौर पर कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे।

पैकिंग सामग्री की मांग व्यापारियों से कोडवर्ड में ली जाती थी। इसके बाद मांग के अनुसार सामान को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाया जाता था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सप्लाई के दौरान अलग-अलग रास्तों और वाहनों का इस्तेमाल करते थे, ताकि उनकी गतिविधियों पर आसानी से नजर न रखी जा सके।

पुलिस तकनीकी इनपुट और निगरानी के जरिए इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।

गोदाम से बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान गोदाम से बड़ी मात्रा में कथित फर्जी पैकिंग सामग्री बरामद की। जब्त सामान में 61,600 खाली मोनो कार्टन, 61,600 पाउच पैक और 61,600 बारकोड स्कैनर शामिल हैं।

इसके अलावा पुलिस ने एक इलेक्ट्रिक मशीन, एक प्रिंटर/कन्वेयर, एक इलेक्ट्रिक कांटा और एक सिलाई मशीन भी जब्त की है। गोदाम से सरस, लोट्स, महान और कृष्णा के नाम वाले कथित नकली रैपर, फर्जी हॉलमार्क और अन्य पैकिंग सामग्री भी मिली है।

सप्लाई में इस्तेमाल होने वाले वाहनों में एक अर्टिगा कार और एक लोडिंग टेम्पो भी पुलिस ने जब्त किया है।

नकली घी के पूरे नेटवर्क की जांच

पुलिस की कार्रवाई फिलहाल केवल पैकिंग नेटवर्क तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद सामग्री का इस्तेमाल किन कारोबारियों के लिए किया जाता था और इसके जरिए कितने क्षेत्रों में कथित नकली घी की सप्लाई की जा रही थी।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पैकिंग तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले रैपर और कार्टन कहां से खरीदे जाते थे और इस प्रक्रिया में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।

पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। मामले में खाद्य सुरक्षा, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट से जुड़े पहलुओं की जांच भी की जा रही है।

खाद्य मिलावट के खिलाफ अभियान के बीच बड़ी कार्रवाई

जयपुर पुलिस की यह कार्रवाई खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान हुई है। बड़ी मात्रा में कथित फर्जी ब्रांडेड पैकिंग की बरामदगी के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि कथित पैकिंग नेटवर्क का संचालन कितने समय से हो रहा था, कितने कारोबारियों को सामग्री सप्लाई की गई और इससे जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही। जांच पूरी होने के बाद नेटवर्क के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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