जयशंकर ने अमेरिका के साथ रिश्तों की चुनौतियों पर खुलकर बात की, आतंकवाद और चीन नीति पर रखी भारत की बात

एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में कहा कि आतंकवाद पर भारत की चिंताओं को अमेरिका न समझे तो द्विपक्षीय रिश्तों पर असर पड़ता है। चीन और वैश्विक संकट पर भी बात की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में भारत-अमेरिका संबंधों पर कहा कि सीमा पार आतंकवाद भारत की प्रमुख चिंता है और इसकी पर्याप्त समझ नहीं होने से रिश्तों पर असर पड़ता है। उन्होंने चीन, बहुध्रुवीय व्यवस्था और वैश्विक ‘4F’ संकट पर भी बात की।

न्यूयॉर्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों, सीमा पार आतंकवाद, चीन के साथ रिश्तों और बदलती वैश्विक व्यवस्था पर भारत का पक्ष रखा। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत की आतंकवाद संबंधी चिंताओं को उसके साझेदारों द्वारा पर्याप्त रूप से समझना जरूरी है और इस मुद्दे पर संवेदनशीलता की कमी का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है। यह बातचीत संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के हाई-लेवल वीक के समापन के बाद हुई। कार्यक्रम का संचालन पूर्व अमेरिकी राजनयिक और एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के प्रतिष्ठित फेलो डेनियल रसेल ने किया। बातचीत में भारत-अमेरिका व्यापार, टैरिफ, आतंकवाद, चीन और मौजूदा वैश्विक अस्थिरता समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

आतंकवाद पर भारत की चिंता का जिक्र

जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों की चुनौतियों पर बात करते हुए आतंकवाद को भारत की प्रमुख सुरक्षा चिंताओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने कई दशकों से अपने पड़ोसी की ओर से आतंकवाद का सामना किया है और यदि उसके साझेदार इस चिंता को पर्याप्त रूप से नहीं समझते या इसकी गंभीरता को स्वीकार नहीं करते, तो इसका असर रिश्तों पर पड़ता है।

विदेश मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल के महीनों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, टैरिफ, रूस से भारत की ऊर्जा खरीद और अमेरिका के पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं। जयशंकर ने हालांकि कहा कि भारत अमेरिका के साथ संबंधों को आगे बढ़ते हुए देखना चाहता है, लेकिन इसके लिए दोनों देशों के सामने मौजूद मुद्दों का समाधान जरूरी है।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध भी चर्चा में

कार्यक्रम में भारत-अमेरिका व्यापार और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल पूछे गए। जयशंकर ने कहा कि दुनिया के कई देशों के लिए अमेरिका के साथ संबंध पहले की तुलना में अधिक जटिल हुए हैं।

उन्होंने संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर समझ बनी है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता ऐसे समय में चल रही है जब टैरिफ और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद सहित कई विषय संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं।

जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा दोनों तरफ मौजूद है, लेकिन मौजूदा मतभेदों को व्यावहारिक तरीके से संबोधित करना होगा।

अमेरिका-चीन संबंधों पर भारत की नजर

जयशंकर ने अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते संपर्क और दोनों बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया की प्रमुख शक्तियां एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने के साथ-साथ कई क्षेत्रों में परस्पर निर्भर भी हैं।

उन्होंने इस संदर्भ में भारत की विदेश नीति के उस दृष्टिकोण को रेखांकित किया जिसमें देश अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न शक्तियों और साझेदारों के साथ संबंध बनाए रखता है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जयशंकर ने अमेरिका और चीन को मौजूदा दौर में “competitive mode” में बताया और कहा कि भारत समेत अन्य देश अपने हितों की सुरक्षा के लिए जोखिम कम करने और संबंधों में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं।

बहुध्रुवीय दुनिया की ओर बढ़ने का संकेत

जयशंकर ने बदलती वैश्विक व्यवस्था को बहुध्रुवीयता की दिशा में बढ़ता हुआ बताया। उनके अनुसार, वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में देश किसी एक शक्ति या साझेदार पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय कई देशों के साथ समानांतर संबंध विकसित कर रहे हैं।

एशिया सोसाइटी में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में “multipolarity” को एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति बताया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज की दुनिया में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक परस्पर निर्भरता साथ-साथ चल रही हैं।

भारत लंबे समय से अपनी विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता और विभिन्न देशों के साथ स्वतंत्र संबंधों पर जोर देता रहा है। जयशंकर की टिप्पणी इसी व्यापक दृष्टिकोण के संदर्भ में आई।

भारत-चीन संबंधों पर भी बयान

विदेश मंत्री ने भारत-चीन संबंधों की मौजूदा स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध 2020 के सीमा तनाव के बाद काफी प्रभावित हुए थे, लेकिन अब स्थिति में सुधार हुआ है।

जयशंकर के अनुसार, वर्तमान स्थिति की तुलना 2024-25 के दौर से की जाए तो संबंध बेहतर हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सीमा पर परिस्थितियां दोनों देशों के व्यापक संबंधों को प्रभावित करती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच तनाव दोनों देशों के हित में नहीं है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में लंबे समय तक फंसे रहना उचित नहीं है जिससे किसी तीसरे देश को लाभ मिल सके।

सीमा पर शांति को बताया अहम

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। 2020 के सीमा संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई।

जयशंकर ने मौजूदा स्थिति में सुधार का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट किया कि सीमा पर स्थिरता और शांति का संबंध व्यापक द्विपक्षीय रिश्तों से जुड़ा हुआ है। भारत की ओर से लगातार यह रुख सामने आता रहा है कि सीमा पर शांति के बिना दोनों देशों के संबंधों में सामान्य स्थिति हासिल करना मुश्किल होगा।

दुनिया के सामने ‘4F’ संकट

जयशंकर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के सामने मौजूद चुनौतियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने Food, Fuel, Fertiliser और Finance यानी भोजन, ईंधन, खाद और वित्त से जुड़े ‘4F’ संकट का उल्लेख किया।

उनके अनुसार, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों का असर आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहा है। विशेष रूप से यूक्रेन और पश्चिम एशिया में संघर्षों ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी महत्वपूर्ण वस्तु या संसाधन के लिए किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता आर्थिक और रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकती है।

आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा पर जोर

विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं पहले की तुलना में अधिक असुरक्षित हुई हैं। भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक प्रतिबंध और संघर्षों के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

भारत सहित कई देश ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने और रणनीतिक भंडार तथा घरेलू क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

जयशंकर ने मौजूदा परिस्थितियों को ऐसी दुनिया के रूप में पेश किया जहां आर्थिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दे एक-दूसरे से तेजी से जुड़ रहे हैं।

कूटनीति के लिए बढ़ती चुनौती

जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में कूटनीति को अधिक चुनौतीपूर्ण बताया। उनके अनुसार, एक ओर देशों को पुराने विवादों को संभालना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर नए आर्थिक और सुरक्षा संकट तेजी से सामने आ रहे हैं।

उन्होंने वैश्विक स्तर पर चल रहे संघर्षों, आर्थिक दबावों और व्यापार को राजनीतिक प्रभाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने की प्रवृत्ति का उल्लेख किया।

इस संदर्भ में उन्होंने कूटनीति को पहले की तुलना में अधिक जोखिम भरा और जटिल बताया।

भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने की उम्मीद

जयशंकर ने अपने वक्तव्य में भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य को लेकर कहा कि भारत दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ते हुए देखना चाहता है। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि संबंधों के सामने मौजूद वास्तविक मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

आतंकवाद पर भारत की चिंताएं, व्यापार और टैरिफ, रूस से ऊर्जा खरीद तथा अमेरिका-पाकिस्तान संबंध ऐसे विषय हैं जिनका असर मौजूदा द्विपक्षीय बातचीत पर पड़ रहा है।

एशिया सोसाइटी में जयशंकर की टिप्पणी से यह स्पष्ट हुआ कि भारत अपने सुरक्षा हितों और रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए अमेरिका, चीन और अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ संबंधों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

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