जमशेदपुर के यात्रियों के लिए जरूरी खबर, आज से 15 ट्रेनें रद; सरयू राय ने मांगी वैकल्पिक व्यवस्था

जमशेदपुर में बिरराजपुर स्टेशन पर नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य से 19 से 23 सितंबर तक 15 ट्रेनें रद रहेंगी। सरयू राय ने यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की।
जमशेदपुर के यात्रियों के लिए जरूरी खबर, आज से 15 ट्रेनें रद; सरयू राय ने मांगी वैकल्पिक व्यवस्था
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जमशेदपुर और आसपास के रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर है। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल में बिरराजपुर स्टेशन पर नॉन-इंटरलॉकिंग यानी एनआई कार्य के कारण 19 से 23 सितंबर के बीच रेल परिचालन प्रभावित रहेगा। इस दौरान टाटानगर और आदित्यपुर से चलने वाली 15 ट्रेनों को अलग-अलग तारीखों पर पूरी तरह रद किया गया है। इसके अलावा कुछ ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट किया जाएगा, यानी वे अपने निर्धारित गंतव्य तक नहीं जाएंगी और बीच के किसी स्टेशन से ही वापस लौटेंगी। रेलवे के इस बदलाव का सीधा असर रोजाना ट्रेन से सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, छोटे कारोबारियों और दूसरे यात्रियों पर पड़ने वाला है।

रेलवे के अनुसार बिरराजपुर स्टेशन पर चल रहा काम एक निजी रेलवे साइडिंग को गति शक्ति कार्गो टर्मिनल के तहत कमीशन करने से जुड़ा है। इसके लिए 20 और 21 सितंबर को प्री-नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा, जबकि 22 सितंबर को मुख्य नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य प्रस्तावित है। इस दौरान सिग्नलिंग और टेलीकॉम से जुड़े काम के लिए निर्धारित समय का डिस्कनेक्शन और ट्रैफिक ब्लॉक भी लिया जाएगा। इन तकनीकी कार्यों के कारण संबंधित रेलखंड पर ट्रेनों का सामान्य परिचालन संभव नहीं होगा, इसलिए रेलवे ने पहले से ही कई ट्रेनों को रद करने और कुछ के परिचालन में बदलाव की सूचना जारी की है।

19 सितंबर से ही ट्रेनों के रद होने का असर यात्रियों को दिखाई देने लगा है। रेलवे की सूची के मुताबिक ट्रेन नंबर 68085 टाटा-बरकाकाना मेमू 19 से 22 सितंबर तक रद रहेगी, जबकि इसकी विपरीत दिशा की ट्रेन नंबर 68086 बरकाकाना-टाटा मेमू 20 से 23 सितंबर तक रद रहेगी। ये दोनों ट्रेनें टाटानगर और बरकाकाना के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में लगातार कई दिनों तक इनके नहीं चलने से यात्रियों को अपनी यात्रा के लिए दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ेगा।

इसी तरह ट्रेन नंबर 68055 आसनसोल-टाटा-आसनसोल मेमू का परिचालन 20 से 22 सितंबर तक प्रभावित रहेगा। खड़गपुर-टाटा-खड़गपुर रूट पर चलने वाली ट्रेन नंबर 68013 और 68014 को भी 20 से 22 सितंबर तक रद किया गया है। जामदा-पुरी-जामदा रूट की ट्रेन नंबर 68023 और 68024 भी इसी अवधि में नहीं चलेंगी। इन ट्रेनों पर निर्भर रहने वाले यात्रियों के लिए खास तौर पर परेशानी बढ़ सकती है, क्योंकि मेमू ट्रेनें कई छोटे-बड़े स्टेशनों के बीच दैनिक यात्रियों के आवागमन का महत्वपूर्ण साधन होती हैं।

हटिया और टाटानगर के बीच चलने वाली ट्रेन नंबर 68036 हटिया-टाटा मेमू 21 सितंबर को रद रहेगी, जबकि ट्रेन नंबर 68035 आदित्यपुर-हटिया मेमू 22 सितंबर को नहीं चलेगी। इसी तरह ट्रेन नंबर 18601 और 18602 टाटा-हटिया-टाटा एक्सप्रेस का परिचालन 20 से 22 सितंबर तक प्रभावित रहेगा। एक्सप्रेस ट्रेन के रद होने से उन यात्रियों को भी अपनी यात्रा की योजना बदलनी पड़ सकती है, जो टाटानगर और हटिया के बीच नियमित रूप से आवागमन करते हैं।

टाटा-बक्सर एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए भी रेलवे ने बदलाव की सूचना दी है। ट्रेन नंबर 18114 टाटा-बक्सर एक्सप्रेस 19 से 21 सितंबर तक रद रहेगी, जबकि ट्रेन नंबर 18113 बक्सर-टाटा एक्सप्रेस 20 से 22 सितंबर तक रद रहेगी। इसके अलावा ट्रेन नंबर 18019 और 18020 जामदा-धनबाद-जामदा एक्सप्रेस का परिचालन 22 सितंबर को रद रहेगा। इस तरह अलग-अलग रूट की ट्रेनों पर प्रभाव पड़ने से जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति जांचना जरूरी होगा।

सिर्फ ट्रेनें रद ही नहीं की गई हैं, बल्कि कुछ ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट और शॉर्ट ओरिजिनेट भी किया जाएगा। ट्रेन नंबर 13301 और 13302 धनबाद-आद्रा-धनबाद एक्सप्रेस का 20 से 22 सितंबर तक परिचालन आद्रा तक सीमित रहेगा। यानी इन तारीखों में ट्रेन आद्रा से आगे निर्धारित मार्ग पर नहीं जाएगी और आद्रा से ही वापस लौटेगी। इसी तरह ट्रेन नंबर 13512 और 13511 आसनसोल-आद्रा-आसनसोल एक्सप्रेस का 20 और 22 सितंबर को परिचालन आद्रा तक ही किया जाएगा। इन तारीखों में आद्रा और आसनसोल के बीच सेवा प्रभावित रहेगी।

रेलवे की ओर से यात्रियों को सूचना देने के लिए स्टेशन स्तर पर व्यवस्था अपडेट करने के निर्देश भी दिए गए हैं। संबंधित प्रणालियों में ट्रेन संचालन की जानकारी अपडेट की जानी है, ताकि यात्रियों को ऑनलाइन माध्यमों और स्टेशन से सही सूचना मिल सके। फिर भी इतने बड़े पैमाने पर ट्रेनें रद होने के कारण यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जांच लेना जरूरी होगा। खासकर वे यात्री जिनका टिकट पहले से बुक है, उन्हें यह देखना होगा कि उनकी ट्रेन पूरी तरह रद है, उसका मार्ग बदला गया है या उसे किसी दूसरे स्टेशन तक सीमित किया गया है।

ट्रेनों के इस बदलाव को लेकर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने रेलवे की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्रालय और चक्रधरपुर रेल मंडल को टैग करते हुए यात्रियों की सुविधा पर ध्यान देने की मांग की। सरयू राय का कहना है कि टाटानगर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कर्मचारी, श्रमिक, विद्यार्थी और छोटे कारोबारी लोकल ट्रेनों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कई दिनों तक ट्रेन सेवा प्रभावित होने पर इन यात्रियों की परेशानी को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जाना चाहिए।

सरयू राय ने सवाल उठाया है कि यदि किसी निजी कंपनी की रेलवे साइडिंग से जुड़े विकास कार्य के कारण लगातार कई दिनों तक लोकल ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होता है तो रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की समस्या का समाधान किस तरह होगा। उनका कहना है कि रेलवे के विकास कार्य जरूरी हो सकते हैं, लेकिन इनके दौरान दैनिक यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने यात्रियों को पहले से स्पष्ट जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है। यह विधायक की ओर से उठाई गई मांग है, जबकि रेलवे की ओर से ट्रेनों के रद और परिचालन में बदलाव का कारण निर्धारित तकनीकी कार्य बताया गया है।

जमशेदपुर में लोकल और मेमू ट्रेनों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। टाटानगर रेलवे स्टेशन औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक प्रमुख परिवहन केंद्र है और आसपास के क्षेत्रों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां काम, पढ़ाई और दूसरे जरूरी कामों के लिए आते-जाते हैं। ऐसे में जब एक साथ कई मेमू और एक्सप्रेस ट्रेनें रद होती हैं तो यात्रियों के सामने बस, ऑटो, टैक्सी या निजी वाहन जैसे विकल्प बचते हैं। इन साधनों से सफर करने में समय और खर्च दोनों बढ़ सकते हैं। इसी वजह से ट्रेन रद होने की सूचना मिलने के बाद यात्री वैकल्पिक मार्ग और साधन तलाशने में जुट जाते हैं।

रेलवे का कहना है कि नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य रेल परिचालन की तकनीकी व्यवस्था से जुड़ा होता है। इंटरलॉकिंग सिस्टम के जरिए रेलवे के सिग्नल, पॉइंट और ट्रैक के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाता है। किसी स्टेशन या रेलखंड पर बड़े तकनीकी बदलाव, नई लाइन, साइडिंग या सिग्नलिंग से जुड़े काम के दौरान सामान्य परिचालन को रोकना या सीमित करना आवश्यक हो सकता है। बिरराजपुर स्टेशन पर भी विकास कार्य के चलते ऐसा ही ब्लॉक लिया जा रहा है। इन कार्यों का उद्देश्य रेल ढांचे से जुड़े बदलावों को पूरा करना है, लेकिन निर्माण अवधि में यात्रियों को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

इस बीच यात्रियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे 19 से 23 सितंबर के बीच यात्रा करने से पहले ट्रेन की स्थिति जरूर जांच लें। खासकर 20 से 22 सितंबर के दौरान कई ट्रेनों का परिचालन प्रभावित है। किसी यात्री की ट्रेन सूची में रद दिखाई दे रही है तो उसे बिना पुष्टि किए स्टेशन पहुंचने से बचना चाहिए। इसी तरह जिन ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट किया गया है, उनके यात्रियों को यह देखना होगा कि ट्रेन वास्तव में किस स्टेशन तक जाएगी और वहां से आगे की यात्रा कैसे करनी होगी।

ट्रेन रद होने का असर केवल यात्रियों की संख्या तक सीमित नहीं रहता। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ सकती है, बसों और दूसरे सार्वजनिक परिवहन साधनों पर अतिरिक्त दबाव आ सकता है और निजी वाहनों से सड़क पर यातायात भी बढ़ सकता है। औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए समय पर कार्यस्थल पहुंचना चुनौती बन सकता है। विद्यार्थियों और परीक्षा या जरूरी काम के लिए दूसरे शहर जाने वाले यात्रियों को भी अपनी यात्रा पहले से प्लान करनी पड़ सकती है। ऐसे में रेलवे की ओर से समय पर सूचना और यात्रियों की ओर से पहले से तैयारी दोनों जरूरी हो जाते हैं।

सरयू राय की मांग इसी यात्री सुविधा के मुद्दे से जुड़ी है। उन्होंने रेलवे प्रशासन से यह सवाल उठाया है कि जब कई दिनों तक लोकल ट्रेनों की सेवा प्रभावित हो रही है तो यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में भी सोचा जाना चाहिए। उनका कहना है कि दैनिक यात्रियों की समस्या को केवल ट्रेन रद होने की सूचना देकर समाप्त नहीं किया जा सकता। हालांकि वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था करना रेलवे या स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी किस स्तर पर होगी, यह संबंधित अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगा।

रेलवे ने फिलहाल निर्धारित तकनीकी कार्य के लिए ट्रेनों का परिचालन कार्यक्रम जारी किया है। बिरराजपुर में प्री-एनआई और मुख्य एनआई कार्य पूरा होने के बाद सामान्य परिचालन बहाल होने की उम्मीद है। 22 सितंबर को मुख्य एनआई कार्य के दौरान सबसे अधिक तकनीकी गतिविधियां होने वाली हैं, इसलिए इस अवधि में रेल यातायात पर विशेष असर पड़ रहा है। 23 सितंबर तक कुछ ट्रेनों के रद रहने का कार्यक्रम भी जारी किया गया है।

जमशेदपुर के यात्रियों के लिए यह बदलाव कुछ दिनों का है, लेकिन रोजाना सफर करने वालों के लिए इसका प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यालय पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय रखना पड़ सकता है। विद्यार्थियों को स्कूल, कॉलेज या परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधन तलाशने होंगे। छोटे कारोबारी और अन्य यात्री भी अपनी यात्रा की तारीख और समय में बदलाव कर सकते हैं। जिन यात्रियों ने पहले से टिकट बुक कर रखे हैं, उन्हें रेलवे की ओर से जारी अपडेट के आधार पर अपनी यात्रा योजना तय करनी चाहिए।

फिलहाल 19 से 23 सितंबर तक बिरराजपुर स्टेशन पर होने वाले नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के कारण 15 ट्रेनें अलग-अलग तारीखों में रद की गई हैं और चार ट्रेनों का परिचालन आंशिक रूप से सीमित किया गया है। रेलवे ने तकनीकी कार्य के कारण यह बदलाव किया है, जबकि विधायक सरयू राय ने प्रभावित यात्रियों की परेशानी को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था और बेहतर यात्री सूचना की मांग उठाई है। यात्रियों के लिए सबसे जरूरी है कि वे स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति जांचें और यदि ट्रेन रद या शॉर्ट टर्मिनेट है तो वैकल्पिक यात्रा की तैयारी रखें।

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