जमशेदपुर के सोनारी स्थित बिंदल मॉल के उडुपी रेस्टोरेंट में हुई फायरिंग के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। विशेष जांच टीम यानी SIT ने छत्तीसगढ़ के रायपुर के पास टोल प्लाजा से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान टीटू शर्मा, मनोज सरकार, शंकर मुंडा और दीपु ओझा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ये चारों सीधे रेस्टोरेंट में गोली चलाने वालों में शामिल नहीं थे, बल्कि फायरिंग की साजिश और वारदात में सहयोग से जुड़े होने की जांच की जा रही है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर सीधे गोली चलाने वाले शूटरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
पुलिस जांच के मुताबिक वारदात के बाद आरोपी दो गाड़ियों में सवार होकर जमशेदपुर से बाहर निकले थे। छत्तीसगढ़ की तरफ बढ़ते समय रास्ते में एक गाड़ी खराब हो गई। इसके बाद आरोपियों को दूसरी गाड़ी से आगे बढ़ना पड़ा। इसी बीच पुलिस को उनके संभावित रूट और रायपुर की तरफ जाने की जानकारी मिली। तकनीकी सर्विलांस और अन्य सुरागों के आधार पर पुलिस ने रायपुर के पास टोल प्लाजा पर निगरानी बढ़ाई और वहां चारों को पकड़ लिया। कार के खराब होने के कारण आरोपियों की गतिविधियों पर पुलिस की नजर और मजबूत हुई और उन्हें रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया।
बिंदल मॉल में फायरिंग की यह घटना शनिवार दोपहर हुई थी। सोनारी के मरीन ड्राइव स्थित बिंदल मॉल के उडुपी रेस्टोरेंट में डोमनिक सैमसन, रिजवान, दिलशाद और अन्य लोग खाना खा रहे थे। इसी दौरान बाइक पर सवार तीन युवक वहां पहुंचे। पुलिस की जांच के अनुसार, इनमें से दो युवक रेस्टोरेंट के अंदर गए और अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जबकि तीसरा युवक बाइक के पास मौजूद रहा। अचानक गोलियां चलने से रेस्टोरेंट में अफरा-तफरी मच गई और वहां मौजूद लोग सुरक्षित जगह की तरफ भागने लगे।
रिपोर्ट के मुताबिक फायरिंग में करीब 11 राउंड गोलियां चलाए जाने की बात सामने आई है। घटना में डोमनिक सैमसन, रिजवान, दिलशाद और कृष्णा चौधरी घायल हुए। घायलों को तत्काल इलाज के लिए टाटा मेन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इनमें कुछ घायलों की स्थिति गंभीर बताई गई थी। घटना के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और जांच के लिए विशेष टीम गठित की।
फायरिंग के बाद पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। CCTV में बाइक से आए संदिग्ध युवकों की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई थीं। पुलिस ने फुटेज के आधार पर हमलावरों के आने-जाने के रास्ते की जानकारी जुटाई और वारदात के बाद उनके संभावित ठिकानों का पता लगाने का प्रयास किया। जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ की ओर भागने की जानकारी मिली। इसके बाद तकनीकी निगरानी बढ़ाई गई और संभावित रूट पर पुलिस टीमों को सक्रिय किया गया।
पुलिस की जांच में अब इस फायरिंग के पीछे जमीन कारोबार, रेलवे ठेकेदारी और इलाके में वर्चस्व से जुड़े विवाद के पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है। इससे पहले की जांच में पुलिस का ध्यान जमशेदपुर के डोबो इलाके में जमीन कारोबार को लेकर चल रहे विवादों पर गया था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि क्या अलग-अलग गुटों के बीच पुरानी रंजिश और जमीन कारोबार से जुड़े विवाद का इस फायरिंग से कोई संबंध है। इन पहलुओं को फिलहाल पुलिस जांच का हिस्सा बताया गया है और अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
जांच एजेंसियां घायल डोमनिक सैमसन और उसके साथियों के कारोबारी संपर्कों को भी खंगाल रही हैं। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि फायरिंग से पहले किन लोगों के साथ उनका विवाद था और क्या किसी पुराने विवाद ने इस घटना का रूप लिया। जांच में जमीन कारोबार और रेलवे से जुड़े ठेकेदारी विवाद के अलावा आपराधिक संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का फोकस यह पता लगाने पर है कि फायरिंग की योजना कहां बनी और इसमें शामिल लोगों के बीच किस तरह संपर्क हुआ।
रायपुर से गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों को पुलिस अब जमशेदपुर लाने की प्रक्रिया में जुटी है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें ट्रांजिट रिमांड के आधार पर झारखंड लाया जाएगा। इसके बाद पुलिस उनकी हिरासत में पूछताछ कर सकती है। पूछताछ के दौरान फायरिंग की योजना, शूटरों से संपर्क, वाहनों की व्यवस्था, हथियारों और भागने के रूट से जुड़े सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि चारों में से किसकी क्या भूमिका थी और क्या इनके अलावा भी कोई व्यक्ति इस साजिश में शामिल था।
पुलिस की कार्रवाई में एक अहम बात यह भी सामने आई कि वारदात के बाद आरोपी लंबे समय तक एक ही स्थान पर नहीं रुके। वे दो वाहनों के जरिए शहर से बाहर निकले और अलग-अलग रास्तों से आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस को उनके भागने की दिशा का इनपुट मिलने के बाद निगरानी बढ़ाई गई। इसी दौरान रायपुर के पास टोल प्लाजा पर उनकी गतिविधियों की जानकारी मिली और टीम ने कार्रवाई की। इस तरह घटनास्थल के CCTV, तकनीकी निगरानी और संभावित भागने के रास्तों की जानकारी को जोड़कर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
इस मामले में पुलिस ने चार कथित साजिशकर्ताओं को तो गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सीधे फायरिंग करने वाले शूटर अभी पुलिस की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर उन लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने रेस्टोरेंट में जाकर गोलियां चलाई थीं। शूटरों तक पहुंचना जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि हमलावरों को हथियार किसने उपलब्ध कराए और घटना के बाद उन्हें सुरक्षित निकलने में किसने मदद की।
बिंदल मॉल जैसे सार्वजनिक स्थान पर दिनदहाड़े हुई फायरिंग के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। घटना के बाद कोल्हान डीआईजी और जमशेदपुर एसएसपी समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था। SIT को तकनीकी साक्ष्यों, CCTV फुटेज और संभावित आपराधिक कनेक्शन के आधार पर जांच आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए। पुलिस ने घटना के बाद संदिग्धों की तलाश में अलग-अलग इलाकों में छापेमारी भी की।
इस मामले की जांच में जमीन कारोबार का पहलू पहले ही सामने आ चुका था। पुलिस के अनुसार डोबो इलाके में जमीन कारोबार को लेकर अलग-अलग गुटों के बीच वर्चस्व की स्थिति और पुराने विवादों की जानकारी जुटाई जा रही थी। इसके अलावा रेलवे ठेकेदारी से जुड़े विवाद की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि पुलिस अभी इन सभी पहलुओं को जोड़कर फायरिंग की पूरी वजह और साजिश की कड़ी तैयार कर रही है। इसलिए फिलहाल जमीन या ठेकेदारी विवाद को घटना का अंतिम कारण मानना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
गिरफ्तार चारों आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस को घटना से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या वारदात से पहले आरोपियों ने घटनास्थल की रेकी की थी। CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हमलावर कब से इलाके में मौजूद थे और उन्होंने किस तरह रेस्टोरेंट को निशाना बनाया। इसके साथ ही घटना में इस्तेमाल बाइक और अन्य वाहनों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल बिंदल मॉल फायरिंग मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण जांच कदम है। टीटू शर्मा, मनोज सरकार, शंकर मुंडा और दीपु ओझा को रायपुर के पास से पकड़े जाने के बाद पुलिस अब उनकी कथित भूमिका और पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। दूसरी ओर, गोली चलाने वाले आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि फायरिंग की योजना किसने बनाई, किस विवाद के कारण इसे अंजाम दिया गया और इसमें कितने लोग शामिल थे।











