जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित केनरा बैंक में दिनदहाड़े हुई करोड़ों रुपये की लूट की जांच अब चतरा तक पहुंच गई है। मामले में चतरा पुलिस ने सदर थाना क्षेत्र के आसपास संचालित डिजनीलैंड मेला से जुड़े चार कर्मियों को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, इन लोगों के जमशेदपुर बैंक लूटकांड में संदिग्ध आरोपितों के संपर्क में रहने की जानकारी मिली थी। पूछताछ के दौरान पुलिस ने उनके जमशेदपुर में रहने, लूटकांड के संदिग्धों से मुलाकात और उनके बीच संपर्क समेत कई बिंदुओं पर जानकारी जुटाई है। चतरा के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सन्नी वर्धन के मुताबिक, हिरासत में लिए गए चार लोगों में से दो की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत हो रही है। हालांकि पूरे मामले की स्थिति जमशेदपुर पुलिस की पूछताछ और आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि डिजनीलैंड मेला के ये चार कर्मी कुछ समय पहले जमशेदपुर में भी लगे मेले के दौरान वहां मौजूद थे। इसी अवधि में गणेश उत्सव के दौरान इन लोगों के बैंक लूटकांड से जुड़े संदिग्धों के संपर्क में आने की जानकारी पुलिस को मिली। जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि संदिग्धों और लूटकांड के आरोपितों के एक ही लॉज में ठहरने की बात सामने आई है। इसी सूचना के आधार पर चतरा पुलिस ने देर रात कार्रवाई करते हुए चारों को हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ शुरू की।
पूछताछ के दौरान पुलिस ने यह जानने की कोशिश की कि जमशेदपुर में रहने के दौरान चारों की किन लोगों से मुलाकात हुई थी, वे कहां ठहरे थे और लूटकांड से जुड़े संदिग्धों के साथ उनका संपर्क किस तरह का था। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि संपर्क महज संयोग था या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। अभी तक चारों के खिलाफ बैंक लूट में सीधे तौर पर शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से भी केवल दो लोगों की भूमिका संदिग्ध बताए जाने की जानकारी सामने आई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले उनकी भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
चतरा पुलिस से मिले इनपुट के बाद हिरासत में लिए गए लोगों को जमशेदपुर पुलिस के हवाले किए जाने की सूचना है। अब जमशेदपुर की जांच टीम उनसे पूछताछ कर लूट की पूरी साजिश की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश करेगी। पुलिस यह समझना चाहती है कि बैंक की रेकी किसने की थी, अपराधियों को स्थानीय स्तर पर किससे मदद मिली थी और वारदात के बाद फरार होने के दौरान किसी बाहरी व्यक्ति या स्थानीय नेटवर्क ने उनकी सहायता की थी या नहीं। हालांकि इन बिंदुओं पर अभी जांच जारी है और पुलिस ने किसी निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
दरअसल, जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित केनरा बैंक में 24 सितंबर को दिनदहाड़े बड़ी लूट हुई थी। पुलिस के मुताबिक हथियारबंद बदमाश बैंक में दाखिल हुए और कर्मचारियों तथा ग्राहकों को अपने कब्जे में लेने के बाद कैश और बैंक में गिरवी रखा सोना लेकर फरार हो गए। शुरुआती जानकारी में करीब 42 से 43 लाख रुपये नकद और लगभग 23 किलोग्राम सोना लूटे जाने की बात सामने आई है। सोने की कीमत का अंतिम आकलन बैंक के रिकॉर्ड और जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।
घटना के बाद जमशेदपुर पुलिस ने जांच को तेज करते हुए 20 सदस्यीय विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है। टीम में तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण, संदिग्धों की पहचान और अन्य साक्ष्यों को जोड़ने के लिए अलग-अलग स्तर पर काम किया जा रहा है। पुलिस ने पांच संदिग्ध लुटेरों की तस्वीरें भी जारी की हैं और उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए इनाम की घोषणा की है। पुलिस का कहना है कि संदिग्ध लगातार अपना ठिकाना बदल रहे हैं और उनकी तलाश में कई स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है।
लूट की वारदात के बाद पुलिस ने बैंक और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले हैं। जांच टीम ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि अपराधी किस रास्ते से बैंक पहुंचे, कितनी देर तक वहां रहे और वारदात के बाद किस दिशा में फरार हुए। घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम ने भी साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस तकनीकी निगरानी और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
जांच में बैंक की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार बैंक में आपातकालीन अलार्म सिस्टम के काम नहीं करने की बात सामने आई थी। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या अपराधियों को बैंक की सुरक्षा व्यवस्था और वहां मौजूद नकदी तथा सोने की जानकारी पहले से थी। अपराधियों ने वारदात को जिस तरीके से अंजाम दिया, उससे पुलिस कई संभावनाओं पर काम कर रही है। हालांकि यह जांच का विषय है कि बैंक की सुरक्षा संबंधी जानकारी उन्हें किस माध्यम से मिली थी।
जमशेदपुर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दूसरे राज्यों में भी जांच का दायरा बढ़ाया है। लूटकांड में शामिल संदिग्धों की तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि वारदात के बाद अपराधी राज्य की सीमा से बाहर निकलने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से पड़ोसी राज्यों की पुलिस से भी समन्वय किया जा रहा है।
अब चतरा से चार लोगों के हिरासत में लिए जाने के बाद जांच की दिशा में एक और कड़ी जुड़ गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि डिजनीलैंड मेला में काम करने वाले इन लोगों का जमशेदपुर में रहने वाले संदिग्धों से किस तरह का संबंध था। अगर पूछताछ में इनके बीच लगातार संपर्क, आवाजाही या अन्य किसी तरह के सहयोग से जुड़े तथ्य सामने आते हैं, तो बैंक लूट की साजिश की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल पुलिस ने केवल दो लोगों की भूमिका संदिग्ध होने की बात कही है और बाकी दो के संबंध में जांच जारी है।
इस पूरे मामले में पुलिस के लिए सबसे अहम सवाल बैंक लूट में शामिल मुख्य अपराधियों तक पहुंचना है। इसके लिए चतरा से मिले इनपुट को जमशेदपुर की एसआईटी अपनी जांच में शामिल करेगी। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के जरिए पुलिस यह जानने का प्रयास करेगी कि लूट से पहले और बाद में संदिग्धों की गतिविधियां क्या थीं, उन्होंने किन लोगों से संपर्क किया और क्या किसी ने उन्हें ठहरने, आने-जाने या फरार होने में मदद की थी। इन सवालों के जवाब जांच के अगले चरण में सामने आने की उम्मीद है।
फिलहाल जमशेदपुर बैंक लूटकांड में मुख्य आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। पांच संदिग्धों की तस्वीरें जारी होने के बाद जांच एजेंसियों को उनसे जुड़ी जानकारी मिलने की उम्मीद है। वहीं चतरा में चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने से पुलिस को मामले की कड़ियां जोड़ने के लिए नया इनपुट मिला है। आने वाले दिनों में जमशेदपुर और चतरा पुलिस की संयुक्त पूछताछ से यह स्पष्ट हो सकता है कि मेला कर्मियों का लूटकांड से वास्तविक संबंध था या उनका संपर्क केवल संयोगवश था। तब तक उनकी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।









