झारखंड हाईकोर्ट को मिले 3 नए जज केंद्र ने दी मंजूरी जानें कौन हैं मनोज प्रसाद अखिल कुमार और राम शर्मा

झारखंड हाईकोर्ट में मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा की नियुक्ति को केंद्र ने मंजूरी दी। तीनों जज बनने के बाद हाईकोर्ट में संख्या 16 हो जाएगी।
झारखंड हाईकोर्ट को मिले 3 नए जज केंद्र ने दी मंजूरी जानें कौन हैं मनोज प्रसाद अखिल कुमार और राम शर्मा
Photo Credit / Attribution: Google

झारखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ गई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को मंजूरी देते हुए तीन न्यायिक अधिकारियों की झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति कर दी है। शनिवार को नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना जारी होने के बाद गढ़वा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद, साहिबगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अखिल कुमार और डालटनगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम शर्मा को हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 सितंबर को इन तीनों न्यायिक अधिकारियों के नामों की सिफारिश की थी। अब केंद्र की मंजूरी के बाद उनकी नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

तीनों न्यायिक अधिकारी झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस कैडर से आते हैं और वर्तमान में अलग-अलग जिलों में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के तौर पर न्यायिक जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इनमें मनोज प्रसाद गढ़वा, अखिल कुमार साहिबगंज और राम शर्मा डालटनगंज में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इन अधिकारियों के न्यायिक अनुभव को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की सिफारिश की थी। कॉलेजियम की 10 सितंबर 2026 की बैठक में इन नामों को मंजूरी दी गई थी।

केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद झारखंड हाईकोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 13 से बढ़कर 16 हो जाएगी। हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 25 पद स्वीकृत हैं। तीन नए जजों की नियुक्ति से पहले 12 पद खाली थे। अब तीन पदों पर नियुक्ति होने के बाद रिक्त पदों की संख्या घटकर नौ रह जाएगी। इस तरह हाईकोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायाधीशों की संख्या बढ़ेगी।

झारखंड हाईकोर्ट के लिए यह नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं जब अदालत में स्वीकृत पदों की तुलना में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या काफी कम थी। 25 न्यायाधीशों की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले 13 न्यायाधीशों के साथ अदालत का कामकाज चल रहा था। नई नियुक्तियों के बाद कामकाजी संख्या 16 तक पहुंच जाएगी। हालांकि इसके बावजूद नौ स्वीकृत पद खाली रहेंगे। न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से अलग-अलग मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता में इजाफा होगा।

इन नियुक्तियों की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश से शुरू हुई थी। 10 सितंबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने झारखंड हाईकोर्ट के लिए तीन न्यायिक अधिकारियों के नामों की सिफारिश की थी। कॉलेजियम के प्रस्ताव में मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा के नाम शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कॉलेजियम सूची में भी 10 सितंबर 2026 को झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव दर्ज है।

कॉलेजियम की सिफारिश के बाद नियुक्ति प्रक्रिया केंद्र सरकार के स्तर पर आगे बढ़ी। शनिवार को केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद तीनों अधिकारियों की हाईकोर्ट में नियुक्ति की घोषणा की गई। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की ओर से भी नियुक्तियों की जानकारी सार्वजनिक की गई। इसके साथ ही झारखंड हाईकोर्ट में इन तीनों न्यायिक अधिकारियों के जज बनने की प्रक्रिया का प्रमुख प्रशासनिक चरण पूरा हो गया।

गढ़वा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद अब झारखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में काम करेंगे। इसी तरह साहिबगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अखिल कुमार और डालटनगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम शर्मा भी हाईकोर्ट की न्यायिक व्यवस्था का हिस्सा बनेंगे। तीनों अधिकारियों का जिला स्तर पर न्यायिक प्रशासन और मामलों की सुनवाई का अनुभव रहा है। अब उनकी जिम्मेदारी हाईकोर्ट के स्तर पर बढ़ जाएगी।

साहिबगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अखिल कुमार का नाम 10 सितंबर को सामने आने के बाद से ही उनकी नियुक्ति को लेकर चर्चा थी। उस समय उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके साथ मनोज प्रसाद और राम शर्मा के नामों की सिफारिश की थी। उस समय नियुक्ति को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र और राष्ट्रपति स्तर की प्रक्रिया बाकी थी। अब केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।

हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या किसी भी राज्य की न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि हाईकोर्ट में संवैधानिक मामलों के साथ-साथ अपील, आपराधिक मामले, सिविल विवाद, सेवा संबंधी मामले और अन्य कानूनी मामलों की सुनवाई होती है। ऐसे में स्वीकृत पदों के मुकाबले कम न्यायाधीश होने पर अदालत के कामकाज पर अतिरिक्त दबाव रहता है। झारखंड हाईकोर्ट में तीन नई नियुक्तियों से कार्यरत जजों की संख्या बढ़कर 16 हो रही है, हालांकि नौ पद अभी भी खाली रहेंगे।

झारखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति का यह फैसला केवल तीन पदों को भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे न्यायिक प्रशासन में जिला स्तर के अनुभवी अधिकारियों को हाईकोर्ट स्तर पर जिम्मेदारी मिलने का रास्ता भी खुलता है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के तौर पर काम करने वाले अधिकारियों को निचली अदालतों में आपराधिक और दीवानी मामलों की सुनवाई के साथ-साथ जिला न्यायपालिका के प्रशासनिक कामकाज का भी अनुभव होता है। अब मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा अपने इस अनुभव के साथ हाईकोर्ट में नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में कई संवैधानिक और प्रशासनिक स्तर शामिल होते हैं। संबंधित हाईकोर्ट से प्रस्ताव आगे बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम उस पर विचार करता है। कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार के स्तर पर प्रक्रिया पूरी होती है और नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका आती है। नियुक्ति वारंट और संबंधित अधिसूचना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद न्यायाधीश पद की शपथ लेकर औपचारिक रूप से कार्यभार संभालते हैं।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने झारखंड के साथ इसी बैठक में दूसरे हाईकोर्ट के लिए भी न्यायिक अधिकारियों के नामों पर विचार किया था। 10 सितंबर की बैठक में दिल्ली, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख और झारखंड हाईकोर्ट के लिए नियुक्तियों से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। झारखंड के मामले में तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम शामिल थे। बाद में केंद्र सरकार ने अलग-अलग हाईकोर्ट के लिए नियुक्तियों को मंजूरी दी।

झारखंड हाईकोर्ट की स्वीकृत क्षमता 25 न्यायाधीशों की है। इससे पहले 13 न्यायाधीश कार्यरत थे, जिनमें मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक भी शामिल थे। तीन नए जजों की नियुक्ति के बाद यह संख्या 16 हो जाएगी। इसका मतलब यह है कि स्वीकृत क्षमता के मुकाबले अभी भी नौ पदों पर नियुक्ति की जरूरत बनी रहेगी। इसलिए ताजा नियुक्तियों के बावजूद हाईकोर्ट में भविष्य में और न्यायाधीशों की नियुक्ति की आवश्यकता बनी रह सकती है।

तीनों नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से झारखंड के न्यायिक क्षेत्र में भी इसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। जिला न्यायपालिका में जिम्मेदारी संभाल चुके अधिकारियों को हाईकोर्ट में नियुक्त किए जाने से उन्हें राज्य के उच्च न्यायिक स्तर पर मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी मिलेगी। आने वाले समय में उनके कार्यभार ग्रहण करने और पीठों के गठन के बाद यह स्पष्ट होगा कि उन्हें किस प्रकार की न्यायिक जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं।

कुल मिलाकर झारखंड हाईकोर्ट को तीन नए न्यायाधीश मिलने से अदालत में कार्यरत जजों की संख्या 13 से बढ़कर 16 हो जाएगी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। गढ़वा के मनोज प्रसाद, साहिबगंज के अखिल कुमार और डालटनगंज के राम शर्मा अब हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। हाईकोर्ट में कुल 25 स्वीकृत पदों में से अब भी नौ पद खाली रहेंगे।

Leave a comment