झुंझुनूं में नाम बदलने के विरोध में पूर्व मंत्री का प्रदर्शन, गर्मी में बिगड़ी तबीयत, कलेक्ट्रेट पर तनाव

झुंझुनूं में पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा गांव का नाम बदलने के विरोध में प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट के सामने बेहोश हो गए, बाद में अस्पताल जाने से इनकार किया।

झुंझुनूं में पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा गांव का नाम बदलने के विरोध में कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन के दौरान गर्मी से बेहोश हो गए। समर्थकों ने उन्हें संभाला, लेकिन उन्होंने अस्पताल जाने से साफ इनकार कर दिया।

झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में गांव के नाम परिवर्तन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर ‘श्रीरामपुर’ करने के प्रस्ताव के विरोध में पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने ग्रामीणों के साथ जोरदार प्रदर्शन किया। यह विवाद तब और बढ़ गया जब स्थानीय विधायक की सिफारिश के बाद प्रशासनिक स्तर पर नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई।

जैसे ही यह जानकारी ग्रामीणों तक पहुंची, इलाके में विरोध तेज हो गया और लोगों ने इसे अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए आंदोलन शुरू कर दिया।

22 किलोमीटर पैदल मार्च, कलेक्ट्रेट तक पहुंचा प्रदर्शन

विरोध दर्ज कराने के लिए ग्रामीणों के साथ पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने इस्लामपुर से झुंझुनूं कलेक्ट्रेट तक लगभग 22 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च निकाला। सुबह करीब 9 बजे शुरू हुए इस मार्च में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। तेज गर्मी और उमस के बीच यात्रा करने के कारण कई प्रदर्शनकारी थकान और कमजोरी महसूस करने लगे। जब भीड़ कलेक्ट्रेट पहुंची, तब तक हालात बेहद कठिन हो चुके थे।

कलेक्ट्रेट के सामने बिगड़ी पूर्व मंत्री की तबीयत

कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे सड़क पर बेहोश होकर गिर पड़े। तेज धूप और अत्यधिक पसीने के कारण उनकी हालत खराब हो गई।

झुंझुनूं में नाम बदलने के विरोध में पूर्व मंत्री का प्रदर्शन, गर्मी में बिगड़ी तबीयत, कलेक्ट्रेट पर तनाव

मौके पर मौजूद समर्थकों और स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें संभाला। किसी ने हाथ के पंखे से हवा दी, तो किसी ने पानी छिड़ककर होश में लाने की कोशिश की। एम्बुलेंस बुलाए जाने के बावजूद उन्होंने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।

प्रशासन पर आरोप और टेंट न लगाने का मुद्दा

पूर्व मंत्री ने प्रशासन पर प्रदर्शन के दौरान सहयोग न करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि धूप से बचने के लिए टेंट की अनुमति नहीं दी गई, जिससे प्रदर्शनकारियों को खुले आसमान के नीचे तेज गर्मी में बैठना पड़ा। उन्होंने कहा कि वे अपने समर्थकों को कठिन परिस्थितियों में छोड़कर छांव में नहीं जा सकते, इसलिए उन्होंने अस्पताल जाने से भी मना कर दिया।

ऐतिहासिक पहचान और सांप्रदायिक सौहार्द का मुद्दा

प्रदर्शन के दौरान राजेंद्र गुढ़ा ने गांव की ऐतिहासिक पहचान और सामाजिक सौहार्द का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि शेखावाटी क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम समुदाय लंबे समय से साथ रहते आए हैं और इतिहास में भी दोनों समुदायों ने मिलकर संघर्ष किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गांव का नाम बदला गया तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा और “जैसे को तैसा” जवाब देने की बात भी कही, जिससे विवाद और गहरा गया।

प्रशासन को सौंपे गए ऐतिहासिक दस्तावेज

प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने झुंझुनूं कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर गांव का नाम न बदलने की मांग की। इस दौरान ग्रामीणों ने करीब 200 साल पुराने रिकॉर्ड और 1897 के ऐतिहासिक दस्तावेज भी प्रशासन को सौंपे। इन दस्तावेजों के माध्यम से ग्रामीणों ने यह साबित करने की कोशिश की कि गांव की पहचान ऐतिहासिक रूप से इस्लामपुर नाम से ही जुड़ी हुई है।

कलेक्टर का बयान: निर्णय तथ्यों के आधार पर होगा

झुंझुनूं कलेक्टर अरुण गर्ग ने स्पष्ट किया कि गांव का नाम बदलने का आवेदन प्राप्त हुआ है और इस पर प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसी भी दबाव में नहीं आएगा और निर्णय पूरी तरह दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें जिला स्तर के बाद राज्य और फिर केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है।

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