सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बंधक बनाने का मामला कंपनी के 5 कर्मी जेल भेजे गए, असम-बंगाल से बुलाए गए थे युवक-युवतियां

सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवक-युवतियों को बंधक बनाने के मामले में कंपनी के 5 कर्मचारियों को जेल भेज दिया गया। पीड़ित असम और बंगाल से बुलाए गए थे।
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बंधक बनाने का मामला कंपनी के 5 कर्मी जेल भेजे गए, असम-बंगाल से बुलाए गए थे युवक-युवतियां
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नालंदा। सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवक-युवतियों को बंधक बनाने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। अदालत में पेशी के बाद कंपनी के पांच कर्मचारियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। आरोप है कि ये लोग नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को अपने जाल में फंसाते थे और फिर उन्हें बंधक बनाकर रखते थे।

पुलिस जांच में सामने आया है कि कंपनी के लोग असम और पश्चिम बंगाल से युवक-युवतियों को सरकारी नौकरी दिलाने का वादा कर बुलाते थे। उनसे रजिस्ट्रेशन और ट्रेनिंग के नाम पर पैसे भी लिए जाते थे। जब अभ्यर्थी नौकरी के बारे में पूछते थे, तो उन्हें बहाने बनाकर रोका जाता था और कई मामलों में बाहर जाने की अनुमति भी नहीं दी जाती थी।

मामले का खुलासा तब हुआ, जब कुछ युवाओं ने किसी तरह अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को शिकायत मिली और छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान कई युवक-युवतियों को वहां से मुक्त कराया गया। पुलिस ने मौके से दस्तावेज, कंप्यूटर और अन्य सामान भी जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

पूछताछ में पता चला कि कंपनी लंबे समय से नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को फंसा रही थी। हालांकि, पुलिस अभी यह जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने युवाओं को इसका शिकार बनाया गया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मामले की जांच जारी है और कंपनी के संचालकों समेत अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।

इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सरकारी नौकरी के नाम पर किसी भी निजी संस्था या व्यक्ति के झांसे में न आएं। किसी भी भर्ती प्रक्रिया में आवेदन करने से पहले उसकी वैधता और सरकारी मान्यता की पूरी जांच जरूर करें।

फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने लोगों से ठगी की गई और इस कथित गिरोह का संचालन किस स्तर पर किया जा रहा था।

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